BNT Desk: पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने वर्ष 2020 में हुए प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में बुधवार को पटना की अदालत में आत्मसमर्पण किया। सरेंडर के बाद उन्होंने जमानत के लिए अर्जी दाखिल की, जिसे एसीजेएम-15 प्रीति राय की अदालत ने मंजूर कर लिया। यह मामला कोरोना काल के दौरान सरकारी निर्देशों के कथित उल्लंघन और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रदर्शन करने से जुड़ा है। गांधी मैदान थाना में दर्ज इस केस में पप्पू यादव पर शिक्षा कर्मियों के प्रदर्शन के दौरान मौजूद रहने और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।
2020 के प्रदर्शन मामले में कोर्ट पहुंचे पप्पू यादव
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव को वर्ष 2020 में हुए एक प्रदर्शन से जुड़े मामले में पटना की अदालत में पेश होकर कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी। बुधवार को उन्होंने अदालत में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद उनकी ओर से जमानत याचिका दाखिल की गई। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने उनकी अर्जी स्वीकार कर ली।
यह प्रकरण कोरोना महामारी के दौरान लागू सरकारी निर्देशों और सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन से संबंधित है। उस समय कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रशासन की ओर से कई तरह की पाबंदियां लागू की गई थीं। इसी अवधि में गांधी मैदान के पास हुए प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
गांधी मैदान थाना कांड संख्या 225/2020 से जुड़ा मामला
यह मामला पटना के गांधी मैदान थाना कांड संख्या 225/2020 से संबंधित है। पप्पू यादव के अधिवक्ता विजय आनंद के मुताबिक, घटना 2 नवंबर 2020 की है। उस दिन शिक्षा कर्मी अपनी मांगों को लेकर गांधी मैदान के पास प्रदर्शन कर रहे थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पप्पू यादव करीब 150 से 200 लोगों के साथ प्रदर्शन स्थल के पास पहुंचे थे। वहां महाविद्यालयों के वित्त रहित शिक्षा कर्मी अपनी मांगों के समर्थन में जुटे हुए थे। प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की जा रही थी।
इसी घटनाक्रम को लेकर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ा और बुधवार को सांसद ने अदालत में आत्मसमर्पण कर जमानत की मांग की।
शिक्षा कर्मियों की मांगों के समर्थन में जुटे थे लोग
बताया जाता है कि प्रदर्शन में महाविद्यालयों के वित्त रहित शिक्षा कर्मी शामिल थे। वे अपनी मांगों को लेकर बैनर के साथ गांधी मैदान के पास एकत्र हुए थे। प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब 150 से 200 बताई गई है।
इस दौरान सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए। पप्पू यादव भी इसी घटनाक्रम के दौरान वहां पहुंचे थे। पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े मामले में सरकारी निर्देशों के उल्लंघन और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रदर्शन करने के आरोपों के आधार पर केस दर्ज किया था।
वित्त रहित शिक्षा कर्मियों का प्रदर्शन उनकी मांगों को लेकर था, लेकिन कोरोना काल में लागू प्रतिबंधों के कारण सार्वजनिक रूप से लोगों के जुटने और प्रदर्शन करने का मामला प्रशासनिक कार्रवाई के दायरे में आ गया।
कोरोना काल में नियमों के उल्लंघन का आरोप
पप्पू यादव के खिलाफ दर्ज मामले में कोरोना काल के दौरान सरकारी निर्देशों के कथित उल्लंघन, प्रतिबंधित क्षेत्र में जुलूस निकालने और प्रदर्शन करने जैसे आरोप शामिल हैं। इसी आधार पर गांधी मैदान थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में संबंधित धाराओं की पूरी सूची स्पष्ट नहीं है। इसलिए मामले की कानूनी स्थिति और आरोपों का अंतिम निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही के आधार पर ही तय होगा।
प्राथमिकी दर्ज होने का अर्थ आरोपों का साबित होना नहीं है। मामले में अदालत की प्रक्रिया के तहत ही आरोपों और संबंधित तथ्यों पर विचार किया जाता है।
सरेंडर के बाद जमानत अर्जी मंजूर
बुधवार को पटना की अदालत में आत्मसमर्पण करने के बाद पप्पू यादव की ओर से जमानत की अर्जी दाखिल की गई। एसीजेएम-15 प्रीति राय की अदालत ने सुनवाई के बाद जमानत याचिका मंजूर कर ली।
इस आदेश से 2020 के प्रदर्शन से जुड़े मामले में सांसद को राहत मिली है। हालांकि, जमानत मिलना मामले से बरी होना नहीं है। केस की आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत के निर्देशों के अनुसार जारी रह सकती है।
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम घटनाक्रम यही है कि पप्पू यादव ने अदालत में सरेंडर किया और इसके बाद उन्हें जमानत मिल गई। गांधी मैदान के पास हुए प्रदर्शन से जुड़ा यह केस कोरोना काल में सरकारी निर्देशों के कथित उल्लंघन के आरोपों पर आधारित है।