बिहार: शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की शिकायत पर बेगूसराय DEO को चेतावनी, उर्दू स्कूलों में हाफ-डे का था विवाद

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BNT Desk: बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की ओर से कार्रवाई की सिफारिश के बाद शिक्षा विभाग ने बेगूसराय के जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार को चेतावनी जारी की है। मामला उर्दू, मकतब और मदरसा विद्यालयों में गुरुवार को हाफ-डे शिक्षण कार्य संचालित करने से जुड़े एक व्हाट्सएप मैसेज का है। विभाग ने डीईओ से स्पष्टीकरण मांगा था। उनका जवाब मिलने के बाद भविष्य में ऐसी गलती नहीं करने की चेतावनी देकर मामले को समाप्त कर दिया गया।

 

शिक्षा मंत्री ने डीईओ के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की

मिली जानकारी के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को शिक्षा मंत्री के कोषांग से इस मामले में पत्र जारी किया गया था। पत्र में बेगूसराय के जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार की ओर से कथित तौर पर भ्रामक व्हाट्सएप संदेश साझा किए जाने का उल्लेख किया गया था।

शिकायत के मुताबिक, संदेश में जिले के सभी उर्दू, मकतब और मदरसा विद्यालयों में गुरुवार को हाफ-डे शिक्षण कार्य संचालित करने की बात कही गई थी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा मंत्री की ओर से सचिव को पत्र लिखकर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।

इसके बाद शिक्षा विभाग ने मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा। विभाग यह जानना चाहता था कि गुरुवार को विद्यालयों में आधे दिन की पढ़ाई से संबंधित संदेश किस आधार पर जारी किया गया था।

 

उर्दू विद्यालयों में गुरुवार को हाफ-डे को लेकर विवाद

इस पूरे मामले की वजह उर्दू, मकतब और मदरसा विद्यालयों में गुरुवार को आधे दिन की पढ़ाई संचालित करने से जुड़ा संदेश बना। शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार, सरकारी विद्यालयों में शनिवार को हाफ-डे शिक्षण कार्य संचालित करने का आदेश था।

इसी बीच बेगूसराय के जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से व्हाट्सएप ग्रुप में गुरुवार को हाफ-डे शिक्षण कार्य से जुड़ा संदेश साझा किए जाने की शिकायत सामने आई। शिक्षा मंत्री के कोषांग ने इसे भ्रामक मानते हुए कार्रवाई की सिफारिश की।

विभाग की ओर से पूछे गए स्पष्टीकरण में डीईओ को अपने पक्ष में स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया गया। इसके बाद मनोज कुमार ने अपने जवाब में संदेश जारी करने के पीछे की वजह बताई।

 

डीईओ मनोज कुमार ने स्पष्टीकरण में क्या कहा?

जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार ने अपने जवाब में बताया कि बेगूसराय जिले के उर्दू, मकतब और मदरसा विद्यालयों में पदस्थापित शिक्षक उनसे लगातार अनुरोध कर रहे थे कि पूर्व की परंपरा के अनुसार गुरुवार को हाफ-डे शिक्षण कार्य संचालित किया जाए।

डीईओ के मुताबिक, निदेशालय स्तर से सरकारी विद्यालयों में शनिवार को आधे दिन की पढ़ाई संचालित करने का आदेश था। इसी परिस्थिति में उन्होंने विद्यालय संचालन की पूर्व परंपरा को ध्यान में रखते हुए व्हाट्सएप ग्रुप में संदेश लिखा था।

उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्हें अपने संदेश में त्रुटि होने की जानकारी मिली, तो उन्होंने तत्काल उसे डिलीट कर दिया। इसके बाद व्हाट्सएप ग्रुप में नया संदेश साझा किया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि गुरुवार को विद्यालयों का संचालन अन्य कार्यदिवसों की तरह पूरी अवधि तक किया जाएगा।

गलती का एहसास होने पर संदेश लिया वापस

अपने स्पष्टीकरण में डीईओ ने कहा कि त्रुटिपूर्ण संदेश को हटाने के बाद उन्होंने विद्यालयों के पूर्ण अवधि तक संचालित होने की जानकारी भी साझा कर दी थी। उनके अनुसार, वर्तमान में जिले के सभी उर्दू, मकतब और मदरसा विद्यालय पूर्व की तरह संचालित हो रहे हैं।

इस जवाब के आधार पर विभाग के सामने यह स्पष्ट किया गया कि गुरुवार को हाफ-डे संचालन से जुड़ा संदेश जारी होने के बाद उसे वापस ले लिया गया था और विद्यालयों के पूरे समय तक संचालन का संदेश दिया गया था।

हालांकि, इस मामले में शिक्षा मंत्री के कोषांग की ओर से पहले ही कार्रवाई की सिफारिश की जा चुकी थी। इसलिए विभाग ने स्पष्टीकरण मिलने के बाद मामले पर प्रशासनिक स्तर से निर्णय लिया।

 

चेतावनी देकर शिक्षा विभाग ने समाप्त किया मामला

शिक्षा मंत्री की कार्रवाई संबंधी सिफारिश और जिला शिक्षा पदाधिकारी के स्पष्टीकरण पर विचार करने के बाद शिक्षा विभाग ने मनोज कुमार को भविष्य के लिए चेतावनी जारी की। इसके साथ ही मामले को संचिकास्त कर दिया गया, यानी संबंधित फाइल पर विभागीय कार्रवाई को समाप्त कर दिया गया।

निदेशक प्रशासन की ओर से इस संबंध में 13 अक्टूबर 2026 को पत्र जारी किए जाने की जानकारी दी गई है। इस तरह मामले में डीईओ के खिलाफ बड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय चेतावनी देकर प्रकरण समाप्त कर दिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी विद्यालयों के संचालन संबंधी निर्देशों और उनके पालन को लेकर विभागीय सतर्कता का मुद्दा सामने रखा है। फिलहाल विभाग की ओर से की गई कार्रवाई चेतावनी तक सीमित रही है।

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