BNT Desk: बिहार में हवाई सफर को आसान और मजबूत बनाने के लिए बुनियादी ढांचे पर तेजी से काम चल रहा है। इसी कड़ी में सीमावर्ती क्षेत्र के रक्सौल एयरपोर्ट के निर्माण कार्य में बड़ी तेजी आई है। इस एयरपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि इसका रनवे राजधानी पटना के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भी काफी लंबा होने जा रहा है। रनवे बड़ा होने के कारण रक्सौल में अब देश-दुनिया के बड़े व्यावसायिक और रणनीतिक विमान आसानी से लैंडिंग और टेक-ऑफ कर सकेंगे।
पटना से 288 मीटर लंबा रनवे, उतरेंगे बड़े विमान
रक्सौल एयरपोर्ट के रनवे की कुल लंबाई 2,360 मीटर तय की गई है। अगर इसकी तुलना पटना एयरपोर्ट से करें, तो पटना के रनवे की लंबाई 2,072 मीटर है। इस लिहाज से रक्सौल का रनवे पटना से लगभग 288 मीटर ज्यादा लंबा होगा। रनवे के इस विस्तार के बाद यहाँ एयरबस A320 और बोइंग 737 जैसे विशाल पैसेंजर विमान आसानी से उड़ान भर सकेंगे। इससे उत्तर बिहार के यात्रियों को विश्वस्तरीय हवाई सेवा का लाभ मिलेगा।
युद्ध की स्थिति में राफेल और तेजस के लिए बनेगा मददगार
रक्सौल एयरपोर्ट को न केवल आम यात्रियों के लिए, बल्कि देश की सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखकर भी डिजाइन किया जा रहा है। नेपाल की सीमा के नजदीक होने के कारण इसका सामरिक महत्व बहुत ज्यादा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भविष्य में किसी तरह की युद्ध या आपातकाल की स्थिति बनती है, तो भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान जैसे राफेल और तेजस भी इस रनवे का इस्तेमाल कर सकेंगे और यहाँ से उड़ान भर सकेंगे।
जमीन अधिग्रहण के लिए 207 करोड़ रुपये जारी
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए कुल 139 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के पूरा करने के लिए प्रशासन की ओर से लगभग 207.70 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी कर दी गई है। इस बजट से जमीन मालिकों को मुआवजा देने और शुरुआती इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का काम तेजी से किया जाएगा।
6 मई को जारी हुआ टेंडर, सीएम ने जताया आभार
रक्सौल हवाई अड्डे के विकास के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की ओर से 6 मई 2026 को आधिकारिक टेंडर जारी कर दिया गया है। इसके तहत हवाई अड्डे के रनवे, एप्रन, टैक्सीवे और एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी सेवाओं की बोलियां मांगी गई हैं।
इस महत्वपूर्ण कदम पर खुशी जताते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर लिखा:
“राज्य के सीमावर्ती क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी से जोड़ने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक पहल है। रक्सौल हवाई अड्डे के नवनिर्माण से पूरे क्षेत्र का विकास होगा।”
नेपाल या गोरखपुर जाने की मजबूरी होगी खत्म
वर्तमान में पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) और पश्चिमी चंपारण (बेतिया) के लोगों को दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े शहरों के लिए फ्लाइट पकड़ने या तो नेपाल के सिमरा जाना पड़ता है या फिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का रुख करना पड़ता है। रक्सौल एयरपोर्ट चालू होने से इन दोनों जिलों के लाखों लोगों की यह मजबूरी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
कब तक तैयार होगा रक्सौल एयरपोर्ट?
शेड्यूल के मुताबिक, टेंडर की प्रक्रिया पूरी तरह फाइनल होने के बाद निर्माण एजेंसी को काम पूरा करने के लिए 18 महीने (डेढ़ साल) का समय दिया जाएगा। इस अवधि में नागरिक सुविधाएं, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर और रनवे से जुड़े सभी तकनीकी काम पूरे करने होंगे। इसके बाद एजेंसी को अंतिम फिनिशिंग और टेस्टिंग के लिए 2 महीने (60 दिन) का अतिरिक्त समय मिलेगा। अधिकारियों का अनुमान है कि यदि सारा काम योजना के अनुसार चला, तो 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत तक यह एयरपोर्ट पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा और यहाँ से विमान उड़ान भरने लगेंगे।