BNT Desk: बिहार के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए अपने संघर्ष और नीतीश कुमार के नेतृत्व की जमकर सराहना की। उन्होंने तेजस्वी यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राजनीति किसी की ‘बपौती’ नहीं है, बल्कि यह जनता के आशीर्वाद से चलती है। सम्राट चौधरी ने अपने निजी जीवन के संघर्षों और लालू परिवार द्वारा किए गए कथित अत्याचारों को याद करते हुए भावुक और आक्रामक भाषण दिया।
सुशासन के 20 साल: नीतीश कुमार का विजन
सम्राट चौधरी ने कहा कि पिछले दो दशकों से बिहार में एनडीए की सरकार ने सुशासन की नींव रखी है। उन्होंने नीतीश कुमार के कार्यों को गिनाते हुए कहा:
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महिलाओं का उत्थान: साइकिल योजना जैसी क्रांतिकारी पहल से बेटियों को स्कूल तक पहुँचाया गया।
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नौकरियों की बहार: बिहार में सरकारी नौकरियों के अवसर पैदा किए गए।
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भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: नीतीश जी ने ‘ट्रिपल सी’ (कौशल, कानून और भ्रष्टाचार मुक्त शासन) पर कभी समझौता नहीं किया और आगे भी नहीं होगा।
लालू यादव के ‘अत्याचार’ पर बड़ा खुलासा
मुख्यमंत्री ने विपक्षी खेमे को याद दिलाया कि उनकी राजनीति की शुरुआत लालू यादव के विरोध से हुई थी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “अगर लालू जी का मेरे परिवार पर अत्याचार नहीं होता, तो शायद मैं आज बिहार की राजनीति में इस मुकाम पर नहीं होता।”
उन्होंने पुरानी यादें साझा करते हुए बताया कि 1994 में जब समता पार्टी बनी, तब उनके पिता इसके संस्थापक सदस्य थे। राजनीतिक प्रतिशोध के कारण लालू यादव ने उनके परिवार के 22 सदस्यों को जेल भेज दिया था। सम्राट चौधरी ने तेजस्वी की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह किसी की ‘पाठशाला’ से नहीं निकले हैं, बल्कि उन्होंने अपना रास्ता खुद बनाया है।
जेल और कानूनी लड़ाई: ‘मैं संघर्ष से तपकर यहाँ पहुँचा हूँ’
अपने उम्र और एफिडेविट विवाद पर सम्राट चौधरी ने तेजस्वी यादव को घेरा। उन्होंने कहा कि 1995 में जब उन्हें जेल भेजा गया, तब वह नाबालिग थे या नहीं, इस पर विवाद खड़ा किया गया।
“अगर मैं माइनर होता, तो मुझे बाल सुधार गृह भेजा जाता, लेकिन मुझे जेल में रखा गया। मैंने लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपनी लड़ाई लड़ी और हर जगह से जीत हासिल कर आज यहाँ बैठा हूँ।”
उन्होंने तेजस्वी पर चुटकी लेते हुए कहा कि डिग्रियों और कानूनी लड़ाइयों के मामले में तेजस्वी उनसे बहुत पीछे छूट गए हैं।
बीजेपी में लोकतंत्र: ‘मुझे खुद नहीं पता था कि सीएम बनूँगा’
सम्राट चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी की कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह केवल बीजेपी में ही संभव है कि एक सामान्य कार्यकर्ता को नेता प्रतिपक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और फिर मुख्यमंत्री बनाया जाए।
उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के पल को याद करते हुए कहा, “मैं पार्टी में दूसरे नंबर का नेता था, लेकिन मुझे भी नहीं पता था कि पार्टी मुझे मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लेगी। जब नीतीश जी आखिरी कैबिनेट कर रहे थे और उन्होंने इस्तीफे की बात कही, तब जाकर मुझे इस बड़े फैसले की जानकारी मिली।”
विपक्ष को नसीहत: ‘कुर्सी किसी की जागीर नहीं’
तेजस्वी यादव के दावों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि यह कुर्सी उनकी ‘बपौती’ है, लेकिन उन्हें इस भ्रम से बाहर निकलना चाहिए। बिहार की 14 करोड़ जनता ने एनडीए और नीतीश कुमार के नेतृत्व को आशीर्वाद दिया है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि लालू यादव को मुख्यमंत्री बनाने में भी नीतीश कुमार की अहम भूमिका थी। उन्होंने कहा कि लालू यादव युवा मुख्यमंत्री तो बने, लेकिन उन्होंने अपना पूरा समय बिहार को लूटने में लगा दिया, जबकि नीतीश कुमार ने बिहार को समृद्ध बनाने का सपना देखा।
लक्ष्य: 1 करोड़ नौकरियां
अंत में सम्राट चौधरी ने अपनी सरकार का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य एक करोड़ लोगों को सरकारी नौकरी और रोजगार के अवसरों से जोड़ना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीए पूरी तरह एकजुट है और विपक्ष को किसी भी तरह की गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए।