BNT Desk: वैशाली जिले के हाजीपुर सदर अस्पताल से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर आपकी रूह कांप जाएगी। एक स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा हुआ है कि यहाँ डॉक्टर और नर्सों की जगह सफाईकर्मी और प्राइवेट एम्बुलेंस ड्राइवर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। जिस वक्त अस्पताल के स्टाफ को मरीजों की सेवा करनी चाहिए थी, उस वक्त वे मोबाइल में बिजी थे, जबकि अनपढ़ और अप्रशिक्षित लोग मरीजों की जान जोखिम में डाल रहे थे।
सफाईकर्मी का सुपरवाइजर बना ‘डॉक्टर’
अस्पताल की पहली डरावनी तस्वीर में देखा गया कि आउटसोर्स एजेंसी का सफाई सुपरवाइजर प्रभात, एक भर्ती मरीज का बाकायदा इलाज कर रहा है। प्रभात के पास न तो डॉक्टरी की डिग्री है और न ही उसने पैरामेडिकल की कोई पढ़ाई की है। बावजूद इसके, वह अस्पताल प्रशासन की नाक के नीचे खुलेआम मरीजों को देख रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों की जान इन सफाईकर्मियों के भरोसे छोड़ दी है?
ड्यूटी छोड़ मोबाइल में डूबी मिली नर्स
वहीं दूसरी ओर, अस्पताल की व्यवस्था कितनी लचर है इसका अंदाजा जीएनएम पुष्पा को देखकर लगाया जा सकता है। जब अस्पताल में मरीजों की भीड़ थी और उन्हें देखरेख की जरूरत थी, तब ड्यूटी पर तैनात पुष्पा अपने मोबाइल पर चैटिंग करने में मशगूल थीं। डॉक्टर के निर्देशों का पालन करने और मरीजों की मरहम-पट्टी करने के बजाय उनका पूरा ध्यान सोशल मीडिया पर था। स्टाफ की इसी लापरवाही का फायदा बाहरी लोग उठा रहे हैं।
प्राइवेट एम्बुलेंस ड्राइवर और कमीशन का खेल
सबसे चौंकाने वाला मामला संजय नाम के एक प्राइवेट एम्बुलेंस ड्राइवर का है। यह शख्स 24 घंटे में से 12 घंटे सदर अस्पताल में ही डेरा जमाए रहता है। वीडियो में उसे महुआ की रहने वाली रानू कुमारी (31 वर्ष) को इंजेक्शन लगाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। यह ड्राइवर मौका मिलते ही मरीजों को बहला-फुसलाकर पटना या हाजीपुर के निजी अस्पतालों में शिफ्ट करा देता है ताकि मोटा कमीशन वसूल सके। ताज्जुब की बात है कि सिविल सर्जन, जो अक्सर दूसरों की कमियां निकालते हैं, अपने ही नाक के नीचे हो रहे इस खेल पर पूरी तरह मौन हैं।