BNT Desk: बिहार में डिजिटल अरेस्ट यानी पुलिस द्वारा बिना ठोस कारण गिरफ्तारी और डिजिटल माध्यमों के जरिए की गई ट्रैकिंग मामलों की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगी। राज्य सरकार और उच्च न्यायालय के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि पटना जिले में सबसे ज्यादा डिजिटल अरेस्ट के मामले सामने आए हैं, जिसके चलते विशेष ध्यान इस क्षेत्र पर दिया जाएगा।
डिजिटल अरेस्ट मामलों की गंभीरता
डिजिटल अरेस्ट में आम तौर पर सोशल मीडिया, मोबाइल एप्लिकेशन और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों को परेशान किया जाता है या उन्हें गिरफ्तार किया जाता है। राज्य में दर्ज किए गए मामलों में शिकायतकर्ताओं ने यह आरोप लगाया है कि उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ और कुछ मामलों में पुलिस की कार्रवाई निष्पक्ष नहीं थी।
CBI की जांच प्रक्रिया
CBI अब बिहार के सभी जिलों में डिजिटल अरेस्ट के मामलों की विस्तृत जांच करेगी। इसके तहत शिकायतों की सत्यता की जांच, पुलिस कार्रवाई का रिकार्ड, डिजिटल साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की समीक्षा शामिल होगी। अधिकारियों ने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और कानूनी होगी, ताकि किसी भी प्रकार के अन्याय को उजागर किया जा सके।
संभावित प्रभाव और कार्रवाई
पटना और अन्य जिलों में CBI की जांच से प्रशासन में जवाबदेही बढ़ेगी। लोगों को उम्मीद है कि इससे अवैध या मनमाने गिरफ्तारी की घटनाओं में कमी आएगी और न्याय सुनिश्चित होगा। राज्य सरकार ने कहा कि जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मामले में सहयोग करें।