BNT Desk: बिहार में एक प्रतियोगी परीक्षा घोटाले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि परीक्षा पास कराने के लिए पहले 50 हजार रुपये पेशगी लिए जाते थे और रिजल्ट आने के बाद 2.5 लाख रुपये वसूले जाते थे। पुलिस ने इस मामले में चार शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह घोटाला प्रतियोगी परीक्षा के दौरान पकड़ा गया, जब फर्जी परीक्षार्थियों और सेटर्स की पहचान हुई।
गिरफ्तार आरोपियों और सौदे की डील
पकड़े गए आरोपियों में शामिल हैं रंजीत कुमार, मनीष कुमार, संतोष और अन्य एक आरोपी। रंजीत ने तीन लाख रुपये में सौदा किया था, जिसमें 50 हजार रुपये पहले लिए गए और शेष ढाई लाख रिजल्ट के बाद मिलने थे। आरोपी संतोष को असली उम्मीदवार की जगह परीक्षा में बैठाया गया। इस घपले में फर्जी एडमिट कार्ड और अन्य दस्तावेज भी उपयोग किए गए।
पेपर लीक नेटवर्क की जांच
पुलिस ने पकड़े गए फर्जी परीक्षार्थियों की जानकारी पर होटल और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कितने परीक्षा केंद्रों पर फर्जी उम्मीदवार शामिल थे और यह नेटवर्क कितना बड़ा था। तीनों आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी गहन जांच की जा रही है।
संजय प्रभात से संभावित कनेक्शन
प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि यह घोटाला पेपर लीक माफिया संजय कुमार प्रभात से जुड़ा हो सकता है। पुलिस इस कनेक्शन की विस्तार से जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि संजय और गिरफ्तार आरोपियों के बीच संबंध किस प्रकार का था और यह पूरी कार्रवाई एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी या नहीं।