IRCTC होटल घोटाला: लालू यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली राहत की उम्मीद, ED को नोटिस; 3 दिसंबर को अगली सुनवाई

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BNT Desk: IRCTC होटल घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को लेकर गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने जांच एजेंसी से इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है। लालू यादव ने 10 सितंबर 2026 को ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। उनकी याचिका में आरोप तय करने के फैसले और उसके कानूनी आधार पर सवाल उठाए गए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान ED का जवाब और अदालत की आगे की टिप्पणियां महत्वपूर्ण होंगी। हालांकि, जांच एजेंसी को नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि लालू यादव के खिलाफ आरोप समाप्त हो गए हैं या ट्रायल कोर्ट के आदेश पर स्वतः रोक लग गई है।

 

लालू यादव ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को क्यों दी चुनौती?

लालू प्रसाद यादव की याचिका का मुख्य आधार मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को लेकर ट्रायल कोर्ट के आदेश पर सवाल उठाना है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने दलील दी है कि उनके खिलाफ आरोप तय करने का फैसला संबंधित अनुसूचित अपराध में आरोप तय किए जाने के आधार पर किया गया, जबकि उनके अनुसार कथित अपराध से प्राप्त धनराशि से जुड़ी गतिविधियों में उनकी भूमिका स्थापित नहीं होती। याचिका में यह भी कहा गया है कि ED ने उन्हें जांच के लिए कभी तलब नहीं किया था। लालू यादव के पक्ष की ये दलीलें अदालत में रखे गए उनके कानूनी तर्क हैं; इन पर अंतिम फैसला अभी नहीं आया है। हाई कोर्ट ने ED से जवाब मांगा है, जिससे दोनों पक्षों की दलीलों पर आगे विचार किया जा सकेगा। इस स्तर पर अदालत के सामने मुख्य सवाल यह है कि ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका में उठाए गए कानूनी आधारों पर क्या राहत दी जानी चाहिए।

 

ट्रायल कोर्ट ने लालू, राबड़ी और तेजस्वी समेत नौ आरोपियों के खिलाफ तय किए थे आरोप

इससे पहले 10 सितंबर 2026 को दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने ED के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। ED की ओर से इस मामले में कुल 16 आरोपियों के नाम शामिल किए गए थे। अदालत ने इनमें से सात आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया, जबकि नौ के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया। अदालत ने उस चरण में उपलब्ध रिकॉर्ड और आरोपों के आधार पर आगे मुकदमा चलाने का निर्णय लिया था। आरोप तय होना किसी आरोपी को दोषी ठहराए जाने के समान नहीं है। इसके बाद मामले में साक्ष्यों और गवाहों की जांच के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़नी है। लालू यादव की हाई कोर्ट में याचिका इसी आदेश को चुनौती देने से जुड़ी है। अब हाई कोर्ट यह देखेगा कि याचिका में उठाए गए आधारों पर हस्तक्षेप की जरूरत है या नहीं।

 

क्या है IRCTC होटल घोटाला मामला?

यह मामला उस अवधि से जुड़ा है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र की तत्कालीन UPA सरकार में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों के आरोपों के अनुसार, रेलवे के अधीन रांची और पुरी स्थित होटलों के संचालन और रखरखाव का ठेका देने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुई थीं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का आरोप है कि ठेका देने की प्रक्रिया में नियमों और पात्रता की शर्तों में बदलाव कर एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाया गया। इसके बाद कथित तौर पर जमीन के लेनदेन के माध्यम से अनुचित लाभ दिए जाने का आरोप सामने आया। इसी कथित लेनदेन से जुड़े धन और संपत्ति की जांच ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 यानी PMLA के तहत की। CBI और ED की जांच आपस में संबंधित हैं, लेकिन दोनों एजेंसियों के मामले और आरोपों का कानूनी आधार अलग-अलग है। अदालत में इन आरोपों की जांच साक्ष्यों और लागू कानून के अनुसार होनी है।

 

सुजाता होटल्स को ठेका देने और जमीन के लेनदेन पर आरोप

CBI के अनुसार, रेलवे होटलों के संचालन और रखरखाव का ठेका मेसर्स सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को देने की प्रक्रिया में कथित रूप से हेरफेर किया गया था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि तत्कालीन रेल मंत्री के कार्यकाल में अधिकारियों के जरिए निविदा प्रक्रिया को इस तरह प्रभावित किया गया कि संबंधित कंपनी को लाभ मिल सके। ED का आरोप है कि इस कथित लाभ के बदले पटना में कीमती जमीन कम कीमत पर एक कंपनी को हस्तांतरित की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े शेयरों और स्वामित्व में बाद में बदलाव हुए तथा कंपनी का नियंत्रण राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव तक पहुंचा। कंपनी बाद में लारा प्रोजेक्ट्स के नाम से जानी गई। ये सभी आरोप जांच एजेंसियों के दावों और अदालत में रखे गए रिकॉर्ड पर आधारित हैं। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष मुकदमे में साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही निकलेगा।

 

ED ने 44.75 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पहले धनशोधन निवारण कानून के तहत कार्रवाई करते हुए करीब 44.75 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी। ED ने आरोप लगाया था कि कथित अपराध से प्राप्त लाभ को संपत्ति और कारोबारी लेनदेन के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। जांच एजेंसी ने 24 अगस्त 2018 को दिल्ली की विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत भी दाखिल की थी। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में ED का काम कथित अपराध से प्राप्त धन, उसके हस्तांतरण और संपत्ति के स्वरूप की जांच करना होता है। हालांकि, किसी संपत्ति की कुर्की या अभियोजन शिकायत दाखिल होना अपने-आप में आरोपी की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम न्यायिक निर्धारण नहीं है। मामले में अदालत को संबंधित दस्तावेजों, लेनदेन और अन्य साक्ष्यों का मूल्यांकन करना होगा।

 

ट्रायल कोर्ट में राहत मांगने का विकल्प भी खुला

दिल्ली हाई कोर्ट ने लालू यादव को अगली सुनवाई तक ट्रायल कोर्ट के सामने राहत के लिए आवेदन करने की छूट भी दी है। वे आरोप तय करने के आदेश पर रोक लगाने जैसी अंतरिम राहत मांग सकते हैं। यह विकल्प उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत दिया गया है, लेकिन राहत मिलना अलग विषय है और इसके लिए संबंधित अदालत को आवेदन पर विचार कर आदेश देना होगा। फिलहाल हाई कोर्ट में ED से जवाब मांगा गया है और अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होनी है। इस बीच ट्रायल कोर्ट में कोई आवेदन दायर किया जाता है या नहीं और उस पर क्या आदेश आता है, यह भी मामले की आगे की दिशा के लिए अहम हो सकता है।

 

3 दिसंबर की सुनवाई पर रहेंगी निगाहें

IRCTC होटल घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अब दिल्ली हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर नजर रहेगी। लालू यादव की याचिका पर ED का जवाब मिलने के बाद अदालत उनके तर्कों और जांच एजेंसी के पक्ष पर विचार करेगी। सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि आरोप तय करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर आगे किस तरह कार्यवाही होगी और अंतरिम राहत से जुड़ा कोई मुद्दा उठता है या नहीं। फिलहाल आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है, लेकिन उस पर रोक लगने की पुष्टि नहीं हुई है। मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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