जेडीयू की ओर से यह कदम अनंत सिंह के खिलाफ पार्टी की कार्रवाई के बाद उठाया गया है। पार्टी ने पहले ही अनंत सिंह को छह साल के लिए निष्कासित करने और उनकी प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने का फैसला लिया था। अब विधानसभा अध्यक्ष को अनुशंसा पत्र सौंपे जाने के बाद उनकी विधायकी को लेकर आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को सौंपे दस्तावेज
जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधानसभा पहुंचकर अध्यक्ष प्रेम कुमार को अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने के लिए अनुशंसा पत्र दिया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पत्र के साथ 10 पन्नों के दस्तावेजी सबूत और वीडियो भी सौंपे गए हैं। जेडीयू ने इन सामग्रियों के जरिए अपनी मांग के समर्थन में पक्ष रखा है।
इस घटनाक्रम के बाद अब विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर मामले को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है, यह महत्वपूर्ण होगा। अनुशंसा पत्र सौंपना सदस्यता समाप्त होने के बराबर नहीं है। इस संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित नियमों और लागू प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।
जेडीयू पहले ही कर चुकी है कार्रवाई
अनंत सिंह को लेकर जेडीयू पहले ही कार्रवाई कर चुकी है। पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित करने और प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने की घोषणा की थी। पार्टी की कार्रवाई और विधानसभा की सदस्यता से जुड़ी प्रक्रिया अलग-अलग हैं। इसलिए पार्टी से निष्कासन के बाद भी विधायक पद पर बने रहने या सदस्यता समाप्त होने का फैसला संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के तहत ही होगा।
अब विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर नजर
उमेश कुशवाहा की ओर से अनुशंसा पत्र, दस्तावेज और वीडियो सौंपे जाने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर होनी है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में विधानसभा अध्यक्ष की ओर से किसी अंतिम निर्णय या अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त किए जाने की पुष्टि नहीं है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि उनकी विधायकी खत्म हो गई है।