BNT Desk: बिहार के सीमांचल क्षेत्र में आबादी के स्वरूप, संदिग्ध आवागमन, जमीन की खरीद-बिक्री और सीमा-पार गतिविधियों से जुड़े मामलों की समीक्षा जारी है। किशनगंज और अररिया समेत नेपाल और पश्चिम बंगाल से सटे इलाकों में सुरक्षा एजेंसियां निगरानी बढ़ा रही हैं। हाल के महीनों में बिहार सरकार और केंद्र के स्तर पर भी भारत-नेपाल सीमा पर क्रॉस-बॉर्डर अपराध, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों को लेकर समन्वय बढ़ाने की बात सामने आई है।
किशनगंज और अररिया पर विशेष नजर
सीमांचल में किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार चार प्रमुख जिले हैं। इन जिलों में संदिग्ध आवागमन, जमीन की खरीद-बिक्री, अवैध निर्माण और सीमा पार से होने वाली गतिविधियों से जुड़े मामलों की समीक्षा की जा रही है। हालांकि, किशनगंज में आबादी के स्वरूप में 70 प्रतिशत और अररिया में 40 प्रतिशत बदलाव होने का दावा उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सका है। इसलिए इन प्रतिशतों को जांच के निष्कर्ष के तौर पर प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
बिहार की नेपाल सीमा 729 किलोमीटर
बिहार की नेपाल से लगी सीमा करीब 729 किलोमीटर लंबी है। सीमा की सुरक्षा में SSB की प्रमुख भूमिका है। केंद्र सरकार के अनुसार भारत-नेपाल सीमा पर सीमा प्रबंधन के तहत सुरक्षा बलों की तैनाती, बॉर्डर आउट पोस्ट और तकनीकी निगरानी जैसी व्यवस्थाएं की जाती हैं। सितंबर के अंत में SSB और नेपाल की Armed Police Force के बीच हुई बैठक में भी सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और खुफिया जानकारी के समय पर आदान-प्रदान पर जोर दिया गया।
बैंकिंग लेनदेन और विदेश यात्राओं की जानकारी जुटाने का दावा
रिपोर्ट के अनुसार किशनगंज और अररिया में विदेश यात्रा करने वाले लोगों, विदेशी फंडिंग और संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन से जुड़ी जानकारियां जुटाई जा रही हैं। इसमें खाड़ी देशों समेत अन्य देशों की यात्रा करने वाले लोगों के टूरिस्ट, स्टूडेंट, रोजगार, धार्मिक और बिजनेस वीजा से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा किए जाने की बात कही गई है। विदेश यात्रा के खर्च के स्रोत और विदेश में संपर्कों की जानकारी की भी जांच किए जाने का दावा है। हालांकि, इन सभी जांचों के नतीजों या किसी व्यक्ति की कथित गतिविधि को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत आधिकारिक रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है।
जमीन और सीमा-पार गतिविधियों की भी निगरानी
जांच के दायरे में जमीन की खरीद-बिक्री और सीमावर्ती क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को भी शामिल किए जाने की बात सामने आई है। मई 2026 में बिहार सरकार ने भारत-नेपाल सीमा की निगरानी मजबूत करने के लिए IG, Border का नया पद भी बनाया था। उस समय अधिकारियों ने सीमा पर अतिक्रमण, नशीले पदार्थों की तस्करी, नकली करेंसी और अन्य अवैध गतिविधियों को लेकर समीक्षा की थी। सितंबर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भी भारत-नेपाल सीमा पर क्रॉस-बॉर्डर अपराधों को रोकने के लिए केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बढ़ाने पर चर्चा हुई।
सीमांचल की जनसंख्या के आंकड़ों को लेकर सावधानी जरूरी
सीमांचल की जनसांख्यिकी को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आते रहे हैं। उदाहरण के लिए, 2011 की जनगणना पर आधारित प्रकाशित आंकड़ों में किशनगंज में मुस्लिम आबादी करीब 68 प्रतिशत और अररिया में करीब 43 प्रतिशत बताई गई है। ये जनसंख्या संरचना के आंकड़े हैं, आबादी में हालिया बदलाव या अवैध आवागमन के प्रमाण नहीं। इसलिए जनसंख्या में बदलाव, अवैध आव्रजन और सीमा-पार अपराध जैसे अलग-अलग मुद्दों को एक ही निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता। किसी व्यक्ति या समुदाय की पहचान के आधार पर अवैध गतिविधि का निष्कर्ष भी नहीं निकाला जा सकता।
एजेंसियों के बीच समन्वय पर जोर
सीमावर्ती जिलों में राज्य पुलिस, प्रशासन, SSB और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। SSB और नेपाल की APF की हालिया बैठक में भी ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन और समय पर इंटेलिजेंस शेयरिंग को प्रमुख मुद्दा बनाया गया।