BNT Desk: : पश्चिम चंपारण जिले के बैरिया प्रखंड में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। फुलियाखाड़ बांध टूटने के बाद अब चंद्रावत नदी के बढ़े जलस्तर और तेज बहाव ने इलाके में एक और बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है। पूजहा-पटजीरवा-बेतिया मुख्य मार्ग पर पुलिया और सड़क का हिस्सा पानी के तेज दबाव में बह गया। इसके बाद बैरिया प्रखंड के कई गांवों का जिला मुख्यालय बेतिया से सीधा संपर्क बाधित हो गया है। बाढ़ के कारण इलाके में पहले से ही लोग परेशान हैं। अब सड़क और पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से आवागमन और राहत पहुंचाने में भी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
छोटलाल चौक के पास पुलिया और नहर क्षतिग्रस्त
पूजहा-पटजीरवा-बेतिया मुख्य मार्ग पर छोटलाल चौक के पास बाढ़ के पानी के तेज बहाव के कारण पुलिया और नहर की संरचना क्षतिग्रस्त हो गई। पानी के दबाव को पुलिया और नहर की दीवारें नहीं झेल सकीं और देखते ही देखते इसका बड़ा हिस्सा टूट गया। पुलिया के ध्वस्त होने के बाद बेतिया और बैरिया के बीच सड़क संपर्क पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सड़क का एक हिस्सा पानी में बह जाने से इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है।
कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क बाधित
मुख्य सड़क के क्षतिग्रस्त होने का असर आसपास के कई गांवों पर पड़ा है। ग्रामीणों के लिए जिला मुख्यालय बेतिया तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। रोजमर्रा के काम, इलाज, जरूरी सामान और अन्य जरूरतों के लिए मुख्यालय जाने वाले लोगों को अब वैकल्पिक रास्तों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। बाढ़ के बीच सड़क संपर्क टूटने से प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। राहत सामग्री और जरूरी सेवाओं को प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पतरखा और निमुइया के बीच भी सड़क बही
संतघाट-पटजीरवा मार्ग पर पतरखा और निमुइया गांव के बीच भी चंद्रावत नदी के पानी का असर देखने को मिला। नदी के ओवरफ्लो होने के कारण पुलिया समेत सड़क का बड़ा हिस्सा पानी में बह गया। इससे पटजीरवा माई स्थान से लेकर निमुइया तक का क्षेत्र प्रभावित हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पुलिया और सड़क के क्षतिग्रस्त होने के बाद नदी के पानी के बहाव का रास्ता भी बदल गया है। इससे आसपास के दूसरे इलाकों में पानी फैलने की आशंका बनी हुई है।
चंद्रावत नदी के तेज बहाव से बढ़ी परेशानी
इलाके में चंद्रावत नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। नदी के पानी ने सड़क और पुलिया जैसी बुनियादी संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले फुलियाखाड़ बांध टूटने से क्षेत्र में बाढ़ का पानी फैल गया था। अब सड़क और पुलिया के टूटने से आवागमन की समस्या भी गंभीर हो गई है।
हजारों एकड़ में लगी फसलें पानी में डूबीं
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। क्षेत्र में हजारों एकड़ में लगी धान और अन्य फसलें पानी में डूब गई हैं। कई खेतों में फसल तैयार हो चुकी थी और किसान उसकी कटाई की तैयारी कर रहे थे। बाढ़ का पानी खेतों में भर जाने से किसानों को फसल नुकसान की चिंता सता रही है। तैयार फसल के डूबने से किसानों के सामने आर्थिक नुकसान का संकट खड़ा हो गया है।
किसानों के सामने आर्थिक संकट
फसल के नुकसान का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ सकता है। जिन किसानों ने धान और अन्य फसलों की खेती पर अपनी उम्मीदें लगा रखी थीं, उनके खेतों में पानी भरने से स्थिति गंभीर हो गई है। लगातार बारिश, नदी के बढ़े जलस्तर और बाढ़ के कारण खेतों में पानी जमा है। पानी कम होने के बाद ही फसल को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन किया जा सकेगा।
राहत और बचाव में जुटा प्रशासन
सड़क और पुलिया टूटने की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और राहत-बचाव दल सक्रिय हो गए हैं। प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। तेज बहाव वाले क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सावधानी बरती जा रही है। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने और आवागमन के वैकल्पिक इंतजाम करने का प्रयास किया जा रहा है।
वैकल्पिक रास्तों की तलाश
मुख्य सड़क के क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रशासन के सामने प्रभावित गांवों तक पहुंच बनाए रखना बड़ी चुनौती है। बाढ़ का पानी कम होने और सड़क की स्थिति सामान्य होने तक वैकल्पिक रास्तों के जरिए लोगों की आवाजाही सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन की ओर से स्थिति का जायजा लेकर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री और अन्य जरूरी सुविधाएं पहुंचाई जा सकें।
बाढ़ से दोहरी मार झेल रहा बैरिया
बैरिया प्रखंड के लोगों को इस समय बाढ़ की दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है। पहले फुलियाखाड़ बांध टूटने से बड़ी आबादी प्रभावित हुई और अब चंद्रावत नदी के तेज बहाव से सड़क और पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई है। इससे एक तरफ घरों और खेतों में पानी पहुंचने की समस्या है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य मार्ग टूटने से आवागमन भी बाधित हो गया है। प्रशासन के सामने अब लोगों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क और राहत व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है।