पटना: 108 साल पुरानी जलमीनार का होगा कायाकल्प, 3.38 करोड़ रुपये से बनेगा कैफेटेरिया

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BNT Desk: पटना के वीर चंद पटेल पथ स्थित मिलर हाई स्कूल के पास मौजूद ऐतिहासिक जलमीनार के दिन अब बदलने वाले हैं। करीब 108 वर्ष पुरानी इस जलमीनार के जीर्णोद्धार और पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण की तैयारी शुरू कर दी गई है। नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि इस परियोजना पर कुल 3.38 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पटना नगर निगम की ओर से जलमीनार परिसर के विकास, सौंदर्यीकरण और कैफेटेरिया निर्माण के लिए निविदा आमंत्रित की गई है। कार्यकारी एजेंसी का चयन होते ही निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है।

 

108 साल पुरानी जलमीनार का होगा जीर्णोद्धार

वीर चंद पटेल पथ पर मिलर हाई स्कूल के समीप स्थित यह जलमीनार पटना की पुरानी स्थापत्य और तकनीकी विरासत का हिस्सा मानी जाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसका निर्माण वर्ष 1915 से 1918 के बीच कराया गया था। करीब 130 फीट ऊंची यह जलमीनार अपने समय की जलापूर्ति व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। अब इतने वर्षों बाद इसके संरक्षण और परिसर के विकास की योजना बनाई गई है। सरकार की ओर से इसे सिर्फ एक पुरानी संरचना के तौर पर देखने के बजाय इसके आसपास के क्षेत्र को भी विकसित करने की तैयारी है, ताकि यह स्थान लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके।

 

3.38 करोड़ रुपये होंगे खर्च

नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा के अनुसार, जलमीनार के जीर्णोद्धार, परिसर के विकास और सौंदर्यीकरण समेत अन्य कार्यों पर 3.38 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पटना नगर निगम ने इसके लिए निविदा की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कार्यकारी एजेंसी का चयन होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। परियोजना के तहत जलमीनार के आसपास के पूरे परिसर को व्यवस्थित और विकसित करने की योजना है। इससे लंबे समय से उपेक्षित पड़े इस ऐतिहासिक स्थल को नया स्वरूप देने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण कार्य कब तक पूरा होगा, इसकी समयसीमा की जानकारी उपलब्ध कराई गई जानकारी में नहीं दी गई है।

 

14,400 वर्गफीट में विकसित होगा पूरा परिसर

परियोजना के तहत करीब 14,400 वर्गफीट क्षेत्रफल में जलमीनार परिसर का समग्र विकास किया जाएगा। इसमें परिसर के सौंदर्यीकरण के साथ आगंतुकों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। सरकार का उद्देश्य केवल जलमीनार की मरम्मत तक सीमित नहीं है। इसके आसपास के क्षेत्र को भी बेहतर तरीके से विकसित किया जाएगा, ताकि यहां आने वाले लोगों को बेहतर माहौल और सुविधाएं मिल सकें। पुरानी ऐतिहासिक संरचना को संरक्षित करते हुए उसके आसपास आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

2,500 वर्गफीट में बनेगा आधुनिक कैफेटेरिया

जलमीनार परिसर में पर्यटकों और आगंतुकों की सुविधा के लिए करीब 2,500 वर्गफीट क्षेत्र में आधुनिक कैफेटेरिया का निर्माण भी प्रस्तावित है। कैफेटेरिया बनने के बाद यहां आने वाले लोगों को बैठने और खाने-पीने की सुविधा मिल सकेगी। इससे परिसर को केवल ऐतिहासिक स्थल के रूप में देखने के बजाय लोगों के लिए एक विकसित सार्वजनिक स्थान के तौर पर तैयार करने की योजना नजर आती है। कैफेटेरिया के अलावा परिसर के विकास और सौंदर्यीकरण के दूसरे कार्य भी परियोजना में शामिल हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कैफेटेरिया के डिजाइन या इसमें उपलब्ध होने वाली विशेष सुविधाओं का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

 

पटना की पहली जलमीनार मानी जाती है

इस जलमीनार को पटना की पहली जलमीनार माना जाता है। इसकी ऊंचाई करीब 130 फीट बताई गई है, जबकि इसकी चौड़ाई लगभग 7 फीट है। सामान्य जलमीनारों की तुलना में इसका स्वरूप अलग है और इसकी बनावट इसे खास बनाती है। इतने लंबे समय तक शहर के इतिहास का हिस्सा रहने के कारण यह संरचना पटना की पुरानी जलापूर्ति व्यवस्था और उस दौर की तकनीकी जरूरतों की याद दिलाती है। अब इसके संरक्षण की कवायद शुरू होने से इस ऐतिहासिक संरचना को नए तरीके से लोगों के सामने लाने की तैयारी है।

 

बिहार के निर्माण काल से जुड़ा इतिहास

उपलब्ध विवरण के अनुसार, वर्ष 1912 में बिहार अलग राज्य बना था। इसके बाद राजधानी क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सरकारी और संस्थागत निर्माण कार्य शुरू हुए। इसी दौर में सरकारी कार्यालयों और दूसरे महत्वपूर्ण भवनों में जलापूर्ति की जरूरत महसूस हुई। उस समय अंग्रेजी शासन था और शहर में बढ़ती प्रशासनिक गतिविधियों के बीच पानी की व्यवस्था को लेकर इस जलमीनार का निर्माण कराया गया। बताया गया है कि जलमीनार को तैयार होने में करीब तीन वर्ष का समय लगा। इसके बाद मिलर हाई स्कूल की स्थापना हुई। इस तरह यह जलमीनार पटना के प्रशासनिक और शैक्षणिक विकास के पुराने दौर की कहानी से भी जुड़ी हुई है।

 

ऐतिहासिक विरासत को सहेजने की तैयारी

जलमीनार के जीर्णोद्धार और परिसर के सौंदर्यीकरण की योजना को पटना की ऐतिहासिक संरचनाओं को सहेजने की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद यहां आने वाले लोगों को पुरानी जलमीनार के साथ आधुनिक सुविधाएं भी मिल सकेंगी। फिलहाल पटना नगर निगम की ओर से निविदा प्रक्रिया चल रही है। कार्यकारी एजेंसी के चयन के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। अब निगाह इस बात पर होगी कि ऐतिहासिक जलमीनार का संरक्षण किस तरह किया जाता है और विकसित परिसर को लोगों के लिए कब तक उपलब्ध कराया जाता है।

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