BNT Desk: UPI से पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के लिए बड़ी खबर है। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को नोटिफिकेशन जारी कर ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर लगने वाले किसी भी तरह के शुल्क को लेकर स्थिति साफ कर दी है। अब ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर ग्राहक से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई चार्ज नहीं ले सकेंगे। RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले पेमेंट को भी इस छूट में शामिल किया गया है। दरअसल, अगस्त में संसद से टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026 पास होने के बाद UPI पेमेंट पर संभावित शुल्क को लेकर चर्चा शुरू हुई थी। इसके बाद यह सवाल उठने लगा था कि क्या ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाया जा सकता है। हालांकि, फिलहाल ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर कोई नई फीस लागू नहीं हुई है। देश में UPI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। जून 2026 तक करीब 55.5 करोड़ लोग UPI का इस्तेमाल कर रहे थे। ऐसे में किसी भी संभावित शुल्क का असर ग्राहकों के साथ-साथ दुकानदारों और कारोबारियों पर भी पड़ सकता है।
सवाल 1: क्या ₹2,000 UPI पेमेंट की नई लिमिट है?
जवाब: नहीं। ₹2,000 UPI पेमेंट की नई लिमिट नहीं है। UPI के जरिए इससे ज्यादा रकम भी भेजी जा सकती है। ₹2,000 की सीमा सिर्फ फीस से जुड़ी व्यवस्था के संदर्भ में है।
यानी ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर कोई डायरेक्ट या इनडायरेक्ट चार्ज नहीं लगा सकते। अगर भविष्य में इससे ज्यादा के पेमेंट पर कोई शुल्क लगाया जाता है, तो उसके लिए सरकार को संबंधित नियम बनाने होंगे।
सवाल 2: ₹2,500, ₹5,000 या ₹10,000 भेजने पर अभी फीस लगेगी?
जवाब: अभी नहीं। ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर फिलहाल कोई नई फीस लागू नहीं हुई है। सिर्फ ₹2,000 से अधिक रकम का पेमेंट करने से अपने आप कोई चार्ज नहीं कटेगा।
भविष्य में अगर किसी तरह का शुल्क लागू करने का फैसला होता है तो उसकी सीमा, दर और किन पेमेंट पर शुल्क लगेगा, यह सरकार की ओर से बनाए जाने वाले आगे के नियमों से स्पष्ट होगा।
सवाल 3: ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट को लेकर इतनी चर्चा क्यों हो रही है?
जवाब: इसकी सबसे बड़ी वजह बड़े कारोबारी पेमेंट हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दुकानदारों और कारोबारियों को UPI के जरिए करीब ₹198 लाख करोड़ का पेमेंट हुआ। इनमें ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन संख्या के हिसाब से सिर्फ करीब 4% थे, लेकिन उनकी कुल वैल्यू करीब ₹131 लाख करोड़ थी। यानी कुल पेमेंट वैल्यू का लगभग 66% हिस्सा ₹2,000 से अधिक वाले ट्रांजैक्शन का था। इसी वजह से बड़े UPI पेमेंट पर संभावित MDR को लेकर चर्चा शुरू हुई। संख्या कम होने के बावजूद अगर इन बड़े पेमेंट पर शुल्क लगता है तो कारोबारियों की डिजिटल पेमेंट लागत बढ़ सकती है।
सवाल 4: दोस्त या परिवार को ₹5,000-₹10,000 भेजने पर फीस लगेगी?
जवाब: नहीं। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P (Person-to-Person) UPI पेमेंट मुफ्त रहने की बात कही गई है।
इसका मतलब है कि अगर आप अपने दोस्त, परिवार के सदस्य या किसी अन्य व्यक्ति के बैंक अकाउंट में ₹5,000 या ₹10,000 UPI से भेजते हैं तो सिर्फ रकम ₹2,000 से ज्यादा होने के कारण कोई नई फीस नहीं लगेगी। मुख्य चर्चा मर्चेंट पेमेंट को लेकर है, यानी जब ग्राहक किसी दुकान, कारोबारी या सर्विस प्रोवाइडर को पेमेंट करता है।
सवाल 5: संभावित फीस किन पेमेंट पर लग सकती है?
जवाब: अगर भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो चर्चा मुख्य रूप से मर्चेंट पेमेंट को लेकर है। यानी किसी दुकान, कारोबारी या सर्विस प्रोवाइडर को UPI से किए जाने वाले पेमेंट।
हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि ₹2,001 का हर मर्चेंट पेमेंट शुल्क के दायरे में आएगा। सरकार आगे नियम बनाकर यह तय कर सकती है कि किस तरह के और कितनी रकम से ऊपर के मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू होगा।
सवाल 6: MDR क्या होता है और यह किससे लिया जाता है?
जवाब: MDR यानी Merchant Discount Rate। आसान भाषा में यह डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की सुविधा के बदले दुकानदार या कारोबारी से लिया जाने वाला शुल्क है।
कार्ड से होने वाले पेमेंट में इस तरह का शुल्क पहले से मौजूद है। अगर भविष्य में UPI पर MDR लागू किया जाता है तो यह मुख्य रूप से मर्चेंट से जुड़ा शुल्क होगा। इसलिए MDR का मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक के UPI पेमेंट से सीधे पैसा काट लिया जाएगा।
सवाल 7: क्या ₹2,000 से ज्यादा के हर मर्चेंट पेमेंट पर MDR लगेगा?
जवाब: जरूरी नहीं। अभी ऐसी कोई व्यवस्था लागू नहीं हुई है कि ₹2,001 का हर मर्चेंट पेमेंट अपने आप MDR के दायरे में आ जाए।
सरकार की ओर से कहा गया है कि अगर भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो तय सीमा से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर इसे लागू किया जा सकता है। साथ ही छोटे और सामान्य मर्चेंट पेमेंट को मुफ्त रखने की बात कही गई है। इसलिए फिलहाल ₹2,000 से अधिक के प्रत्येक UPI पेमेंट पर शुल्क लगने की बात मानना सही नहीं होगा।
सवाल 8: अगर MDR लागू हुआ तो इसकी दर कितनी होगी?
जवाब: अभी अंतिम दर तय नहीं हुई है। सरकार के अनुसार, यदि भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो इसकी दर बहुत मामूली रखी जाएगी और डेबिट या क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले MDR की तुलना में काफी कम होगी। यानी अभी ग्राहकों और कारोबारियों के लिए यह स्पष्ट नहीं है कि संभावित शुल्क कितना होगा। इसके लिए सरकार की ओर से आगे नियम या अधिसूचना जारी होने का इंतजार करना होगा।
सवाल 9: MDR का असर ग्राहक पर पड़ेगा या दुकानदार पर?
जवाब: MDR मूल रूप से मर्चेंट से जुड़ा शुल्क है। इसलिए इसका सीधा असर दुकानदार या कारोबारी की डिजिटल पेमेंट लागत पर पड़ सकता है। हालांकि, अगर किसी कारोबारी की लागत बढ़ती है तो वह उसे अपने कारोबार की लागत में शामिल कर सकता है। इसका असर सामान या सेवा की कीमत पर पड़ेगा या नहीं, यह आगे की व्यवस्था और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा। फिलहाल ग्राहक के रोजमर्रा के छोटे UPI पेमेंट पर किसी नई फीस का सीधा असर नहीं है।
सवाल 10: सरकार कानून में बदलाव क्यों कर रही है?
जवाब: सरकार का कहना है कि देश में UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को सुरक्षित रखने, साइबर फ्रॉड से बचाव, तकनीकी ढांचे को अपग्रेड करने और पेमेंट सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में लगातार खर्च होता है। इसी लंबी अवधि की जरूरत से कानून में बदलाव को जोड़ा जा रहा है। हालांकि, फिलहाल आम यूजर के छोटे UPI पेमेंट पर कोई सीधा शुल्क नहीं लगाया गया है।
UPI से सिर्फ पैसे भेजना ही नहीं, कई काम आसान
UPI यानी Unified Payments Interface ने डिजिटल पेमेंट को काफी आसान बना दिया है। UPI आईडी के जरिए बैंक अकाउंट नंबर, बैंक का नाम या IFSC कोड याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती। मोबाइल नंबर, UPI आईडी या उपलब्ध अन्य विकल्पों के जरिए सीधे भुगतान किया जा सकता है। इसके अलावा बिजली-पानी जैसे यूटिलिटी बिल, ऑनलाइन खरीदारी और दुकानों पर भुगतान के लिए भी UPI का इस्तेमाल किया जा सकता है।
भारत में कितना बड़ा है UPI का नेटवर्क?
जुलाई 2026 तक देश के 741 बैंक UPI नेटवर्क से जुड़े थे। सिर्फ जुलाई में करीब 2,366 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल रकम करीब ₹29.88 लाख करोड़ रही। वित्त वर्ष 2025-26 में देश के कुल डिजिटल पेमेंट में UPI की हिस्सेदारी करीब 84% रही। इससे साफ है कि छोटे दुकानदारों से लेकर ऑनलाइन खरीदारी और बड़े कारोबारी पेमेंट तक UPI डिजिटल लेनदेन का बड़ा माध्यम बन चुका है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर कोई फीस नहीं लगेगी और ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर भी अभी कोई नई फीस लागू नहीं हुई है। आगे अगर MDR या किसी अन्य शुल्क की व्यवस्था आती है तो उसकी सीमा और दर सरकार के अगले नियमों से स्पष्ट होगी।