बाढ़: बेढ़ना शराब पार्टी में चार मौतों का मामला गरमाया, ग्रामीणों ने CBI जांच की उठाई मांग

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BNT Desk: बाढ़ अनुमंडल के बेढ़ना गांव में शराब पार्टी के दौरान चार लोगों की मौत के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। घटना के बाद ग्रामीणों और मृतकों के परिजनों ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने पुलिस की ओर से गठित एसआईटी की जांच पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि मौजूदा जांच से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।

ग्रामीणों का कहना है कि चार लोगों की मौत जैसे गंभीर मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच होनी चाहिए, ताकि घटना के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सके। इसी को लेकर अब ग्रामीण स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग पर जोर दे रहे हैं।

 

शुरुआती जांच में प्रेम प्रसंग की बात आई थी

मामले में ग्रामीण एसपी कुंदन कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शुरुआती जांच के आधार पर घटना को प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया था। पुलिस की प्रारंभिक जांच में इसी दिशा में मामले को देखा गया था। हालांकि, इसके कुछ ही दिनों बाद ग्रामीण एसपी कुंदन कुमार का तबादला प्रशासन विभाग में कर दिया गया।

इसके बाद ग्रामीणों के बीच इस मामले को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे। ग्रामीणों का आरोप है कि शुरुआती जांच में जल्दबाजी की गई और एक आरोपी के बयान के आधार पर चार मौतों की पूरी घटना को प्रेम प्रसंग से जोड़ दिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह घटना को प्रेम प्रसंग का रूप देने से पूरे गांव और समाज की बदनामी हुई। उनका दावा है कि मामले की जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर होनी चाहिए थी, न कि किसी एक बयान के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए था।

 

आरोपी के बयान पर जांच को लेकर सवाल

ग्रामीणों ने पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस ने शुरुआती दौर में आरोपी के बयान को काफी महत्व दिया और उसी आधार पर मामले की दिशा तय कर दी।

ग्रामीणों के मुताबिक, चार लोगों की मौत का मामला बेहद गंभीर है और इसकी जांच में हर संभावित कारण और घटनाक्रम की अलग-अलग तरीके से पड़ताल जरूरी है। उनका कहना है कि जब तक सभी तथ्यों और परिस्थितियों की स्वतंत्र रूप से जांच नहीं होगी, तब तक घटना की असली वजह सामने आना मुश्किल है।

हालांकि, पुलिस की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर इस रिपोर्ट में कोई अलग पक्ष उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

 

फोन पर बातचीत के बाद FIR कराने का आरोप

ग्रामीणों ने पुलिस पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका दावा है कि पुलिस ने गांव वालों के सामने आरोपी लाली से फोन पर बातचीत की थी। ग्रामीणों के अनुसार, इसी बातचीत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने को लेकर दबाव बनाया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस समय चार लोगों की मौत के बाद गांव में आक्रोश था और लोग सड़क पर उतरकर फोरलेन जाम कर रहे थे, उस दौरान पुलिस को लिखित शिकायत भी दी गई थी। आरोप है कि उस आवेदन पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया।

ग्रामीणों ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अगर शुरुआत में दी गई शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई होती तो जांच की दिशा अलग हो सकती थी।

हिरासत में आरोपी से फोन पर बातचीत कराने का भी आरोप

ग्रामीणों ने बाढ़ थाने की पुलिस पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका दावा है कि हिरासत में मौजूद आरोपी से फोन पर बातचीत कराने के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

ग्रामीणों के इन आरोपों के कारण अब पुलिस की जांच प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के आधिकारिक निष्कर्ष या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी की रिपोर्ट से ही हो सकेगी।

ग्रामीणों का कहना है कि चार लोगों की मौत के मामले में जांच पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। किसी भी पक्ष पर दबाव या प्रभाव की संभावना नहीं रहनी चाहिए, ताकि मृतकों के परिवारों को सही न्याय मिल सके।

 

सीबीआई जांच की मांग पर अड़े ग्रामीण

घटना के बाद अब ग्रामीणों और मृतकों के परिजनों ने साफ तौर पर मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा जांच को लेकर उनके मन में कई सवाल हैं और उन्हें भरोसा है कि स्वतंत्र एजेंसी की जांच से घटना की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

ग्रामीणों का तर्क है कि सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी अगर मामले की जांच करेगी तो घटनास्थल, आरोपों, बयानों और अब तक हुई पुलिस कार्रवाई की अलग-अलग स्तर पर जांच की जा सकेगी। इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि चारों लोगों की मौत के पीछे आखिर वास्तविक कारण क्या था।

 

चार मौतों के बाद कई सवाल अब भी कायम

बेढ़ना गांव की इस घटना में चार लोगों की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि आखिर इन मौतों की वास्तविक वजह क्या थी और घटना के पीछे कौन-सी परिस्थितियां जिम्मेदार थीं।

ग्रामीणों के आरोप और पुलिस की शुरुआती जांच के बीच सामने आए मतभेद ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सभी सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक उन्हें न्याय मिलने का भरोसा नहीं होगा।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या ग्रामीणों की सीबीआई जांच की मांग पर कोई निर्णय लिया जाता है। फिलहाल ग्रामीण स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर अपनी आवाज उठा रहे हैं।

 

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