BNT Desk: बिहार के मुंगेर जिले में पशु तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए तस्करों से कथित साठगांठ रखने वाले चार पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गिरफ्तार पुलिसकर्मियों में एक ASI भी शामिल है। आरोप है कि ये पुलिसकर्मी पशुओं से लदे अवैध वाहनों को जिले की सीमा से सुरक्षित निकालने में तस्करों की मदद करते थे। इसके साथ ही तस्करों को पुलिस की गतिविधियों और चेकिंग से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती थी। पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले की जांच अब आगे बढ़ाई जा रही है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
गुप्त सूचना पर पकड़ा गया मवेशियों से भरा ट्रक
पूरे मामले का खुलासा जिला सूचना इकाई (DIU) को मिली एक गुप्त सूचना के बाद हुआ। सूचना मिलने के बाद DIU की टीम ने मुंगेर-जमालपुर मुख्य मार्ग पर बिंदवारा मोड़ के पास नाकेबंदी की। इसी दौरान पुलिस ने एक संदिग्ध ट्रक को रोककर उसकी तलाशी ली। ट्रक के अंदर बड़ी संख्या में भैंसों को बेहद खराब और कथित रूप से क्रूर तरीके से लादकर ले जाया जा रहा था पुलिस के मुताबिक, ट्रक में करीब 35 से 36 भैंसें मिलीं। मौके से तीन संदिग्ध पशु तस्करों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपितों ने बताया कि वे मवेशियों को खगड़िया ले जा रहे थे। ट्रक और उसमें लदे पशुओं को पुलिस ने कब्जे में ले लिया। इसके बाद मामले की जांच को आगे बढ़ाया गया।
मोबाइल और कॉल डिटेल से खुला पुलिस-तस्कर कनेक्शन
मामला सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक ने गिरफ्तार आरोपितों के मोबाइल फोन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच कराने का निर्देश दिया। तकनीकी अनुसंधान के दौरान पुलिस को कई ऐसे सुराग मिले, जिनसे तस्करों और पुलिसकर्मियों के बीच संपर्क होने की बात सामने आई। जांच में पुलिस को तस्करों और मुंगेर पुलिस के कुछ कर्मियों के बीच बातचीत के प्रमाण मिले। इसके बाद उन पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच शुरू की गई, जिनके मोबाइल नंबर तस्करों के संपर्क में पाए गए थे। पुलिस के अनुसार, ट्रैफिक थाना, मुफस्सिल थाना और अन्य थानों में तैनात पुलिसकर्मियों पर तस्करों की मदद करने का आरोप है।
तस्करों को लोकेशन और चेकिंग की जानकारी देने का आरोप
जांच में आरोप है कि पुलिसकर्मी तस्करों को रास्ते में पुलिस की मौजूदगी और चेकिंग की जानकारी देते थे। इसके अलावा उन्हें लोकेशन शेयर किए जाने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि इस जानकारी के आधार पर तस्कर अपने वाहनों को पुलिस की कार्रवाई से बचाकर आगे ले जाते थे। इससे पशु तस्करी का अवैध कारोबार लंबे समय तक चलने में मदद मिलने की आशंका है।तकनीकी जांच में पुलिसकर्मियों और तस्करों के बीच संपर्क के साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया।
ASI समेत चार पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी
जांच के दौरान पुलिस को जब चार पुलिसकर्मियों की भूमिका के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य मिले तो उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक ASI समेत चार पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार किए गए पुलिसकर्मियों पर पशु तस्करों को संरक्षण देने और अवैध रूप से मवेशियों को ले जाने वाले वाहनों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने में मदद करने का आरोप है। चारों आरोपित पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
पुलिस विभाग में मचा हड़कंप
पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी के बाद मुंगेर पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि आरोप सीधे पुलिसकर्मियों पर लगे हैं। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित पुलिस-तस्कर गठजोड़ कब से सक्रिय था और इस नेटवर्क में विभाग के कितने अन्य कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। जांच एजेंसी गिरफ्तार पुलिसकर्मियों और पशु तस्करों के बीच हुई बातचीत, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल की भी जांच कर रही है। इसके आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी होगी जांच
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच का दायरा सीमित नहीं रखा गया है। मामले में सामने आने वाले हर व्यक्ति की भूमिका की जांच की जाएगी। यदि जांच के दौरान किसी अन्य पुलिसकर्मी या अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि पशु तस्करी जैसे अवैध कारोबार को संरक्षण देने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मुंगेर में हुई इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन के स्तर पर बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। अब जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि पशु तस्करी का यह नेटवर्क कितना बड़ा है, इसमें कितने लोग शामिल हैं और पिछले कुछ वर्षों में कितने अवैध वाहनों को पुलिस की कथित मदद से जिले से बाहर निकाला गया।