BPSC TRE-4 आंदोलन की पूरी कहानी: पेपर लीक से लेकर 5000 छात्रों पर FIR तक; जानिए कब-क्या हुआ

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार में शिक्षक बहाली का मुद्दा पिछले कुछ समय से सियासी और सामाजिक रूप से सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित होने वाली शिक्षक नियुक्ति परीक्षा (TRE) के चौथे चरण (TRE-4) के नोटिफिकेशन को लेकर छात्र सड़कों पर हैं। लाठीचार्ज, गिरफ्तारियां, और मुकदमों के बीच यह आंदोलन अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर इस पूरे विवाद की शुरुआत कहां से हुई और यह वर्तमान स्थिति तक कैसे पहुंचा।

क्या है BPSC TRE?

बिहार सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में बड़े पैमाने पर शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए ‘शिक्षक नियुक्ति परीक्षा’ (TRE) की शुरुआत की थी।

  • TRE-1 और TRE-2: इन शुरुआती दो चरणों में क्रमशः 1.70 लाख और 70,000 शिक्षकों की रिकॉर्ड नियुक्तियां की गईं।

  • TRE-3: तीसरे चरण में आयोग ने 87,774 रिक्तियां निकाली थीं, लेकिन तमाम प्रक्रियाओं के बाद केवल 66,603 पदों पर ही भर्ती मुकम्मल हो सकी।

पिछले चरणों की बची हुई सीटों और नए पदों को मिलाकर ‘TRE-4’ बिहार के लाखों बेरोजगार शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए रोजगार की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर उभरा था, लेकिन यह उम्मीद विवादों के चक्रव्यूह में फंस गई।

TRE-3 का पेपर लीक विवाद और छात्रों का फूटा गुस्सा

विवाद की असली नींव तब पड़ी जब बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। जांच में सामने आया कि BPSC TRE 3.0 का प्रश्नपत्र प्रिंटिंग प्रेस में छपने से पहले ही लीक कर दिया गया था।

झारखंड के हजारीबाग में की गई छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में प्रश्नपत्र, कंप्यूटर और लैपटॉप बरामद किए गए। शुरुआत में BPSC ने इस पर तुरंत फैसला लेने से इनकार करते हुए कहा कि वह “ठोस सबूत” मिलने के बाद ही कोई कदम उठाएगा। आयोग के इस ढुलमुल रवैए ने अभ्यर्थियों के भीतर व्यवस्था के प्रति गहरे आक्रोश और अविश्वास को जन्म दे दिया।

1.2 लाख वैकेंसी का वादा और केवल 26 हजार पर अधिसूचना

विवाद तब और गहरा गया जब रिक्तियों की संख्या को लेकर सरकार और आयोग के दावों में भारी अंतर देखने को मिला। बिहार शिक्षा विभाग और शिक्षा मंत्री ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि TRE-4 के माध्यम से 1.20 लाख से अधिक शिक्षक पदों पर बंपर बहाली निकाली जाएगी।

वादा बनाम हकीकत: जब BPSC ने अपने आधिकारिक आंकड़े जारी किए, तो अभ्यर्थी यह देखकर दंग रह गए कि आयोग ने केवल 26,000 पदों पर ही वैकेंसी की बात कही थी। अभ्यर्थियों ने इसे अपने साथ बड़ा धोखा माना और तर्क दिया कि जब विभाग में पद खाली हैं और मंत्री ने वादा किया था, तो रिक्तियां इतनी कम क्यों की गईं?

पटना की सड़कों पर महासंग्राम और बर्बर लाठीचार्ज

कम वैकेंसी और अधिसूचना में हो रही देरी के खिलाफ अगस्त और सितंबर 2025 में आंदोलन उग्र हो गया।

  • STET अभ्यर्थियों का मोर्चा: अगस्त 2025 में हजारों बिहार STET अभ्यर्थियों ने पटना में प्रदर्शन किया। उनकी मांग थी कि माध्यमिक स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए STET अनिवार्य है, इसलिए TRE-4 से पहले सरकार STET की परीक्षा आयोजित कराए।

  • पटना में चक्का जाम: सितंबर 2025 में आक्रोशित छात्र पटना की सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने जेपी गोलंबर और डाकबंगला चौराहा की ओर मार्च किया, जिससे पूरी राजधानी की यातायात व्यवस्था ठप हो गई।

  • पुलिसिया कार्रवाई: बेकाबू भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड्स लगाए और अंततः बर्बर लाठीचार्ज कर दिया। इस लाठीचार्ज में कई महिला अभ्यर्थियों सहित दर्जनों छात्र गंभीर रूप से घायल हुए। छात्रों ने अल्टीमेटम दिया कि 15 सितंबर तक 1.20 लाख पदों के साथ नोटिफिकेशन जारी हो और स्थानीय युवाओं के लिए डोमिसाइल नीति लागू की जाए।

 

छात्र नेता की गिरफ्तारी और अलोकतांत्रिक दमन

प्रशासन ने आंदोलन को कुचलने के लिए रणनीतिक कदम उठाने शुरू किए। अक्टूबर 2025 में पटना में एक बड़े प्रस्तावित प्रदर्शन से ठीक एक रात पहले, प्रमुख छात्र नेता दिलीप कुमार को दरभंगा के लहरियासराय से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

इस गिरफ्तारी का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया। छात्रों और समर्थकों ने इसे “युवाओं की आवाज का अलोकतांत्रिक दमन” करार दिया। दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा युवाओं के लिए ₹62,000 करोड़ की योजनाओं की शुरुआत की जा रही थी, और ठीक उसी दिन पटना की सड़कों पर भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच सैकड़ों अभ्यर्थी अपनी नौकरी के लिए लाठियां खा रहे थे।

5000 से अधिक अभ्यर्थियों पर FIR

यह टकराव मई 2026 में अपने चरम पर पहुंच गया। नोटिफिकेशन में लगातार हो रही देरी के खिलाफ जब अभ्यर्थियों ने पटना कॉलेज से डाकबंगला चौराहे तक विशाल मार्च निकाला, तो पुलिस और छात्रों के बीच हिंसक झड़पें हो गईं।

  • मुकदमों की बौछार: प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए 5,000 से अधिक अज्ञात शिक्षक अभ्यर्थियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली और मौके से 4 छात्र नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।

  • वार्ता की मेज पर पहुंचे छात्र: इस भारी दबाव और लगातार बढ़ते बवाल के बाद आखिरकार BPSC बैकफुट पर आया। आयोग ने प्रदर्शनकारी छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए आमंत्रित किया। छात्र नेता दिलीप कुमार की अगुवाई में हुई इस बैठक के बाद उन्होंने बताया कि BPSC के परीक्षा नियंत्रक (Exam Controller) के साथ बेहद सकारात्मक माहौल में बातचीत हुई है और उम्मीद है कि छात्रों की जायज मांगों पर जल्द ही कोई ठोस और आधिकारिक निर्णय लिया जाएगा।

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