BNT Desk: बिहार को लेकर अमूमन गरीबी, बेरोजगारी और बढ़ती महंगाई की चर्चाएं सुर्खियां बनती हैं, लेकिन इन तमाम चौतरफा चुनौतियों और आर्थिक संकटों के बीच बिहार के लोगों ने अपनी अद्भुत बचत क्षमता से सबको हैरान कर दिया है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बिहार के नागरिकों ने पिछले एक साल के भीतर राज्य के विभिन्न बैंकों में कुल 51,983 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जमा की है।
इस बंपर जमा (डिपॉजिट) के कारण बिहार की सभी बैंक शाखाओं में मौजूद कुल जमा राशि वित्त वर्ष 2025-26 के 5 लाख 63 हजार 445 करोड़ रुपये से बढ़कर अब वित्त वर्ष 2026-27 में 6 लाख 15 हजार 428 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है। इस आंकड़े की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यदि इस कुल जमा राशि की तुलना बिहार की अनुमानित 14 करोड़ की आबादी से की जाए, तो राज्य के हर नागरिक और यहां तक कि आज जन्म लेने वाले बच्चे के नाम पर भी बैंकों में औसतन 43,959 रुपये जमा हैं।
बैंकों की समीक्षा बैठक में सामने आए उत्साहजनक आंकड़े
बिहार वासियों की इस शानदार बचत क्षमता और राज्य की मजबूत होती आर्थिक स्थिति का खुलासा पटना में आयोजित बैंकों की उच्च स्तरीय राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में हुआ। इस बैठक में राज्य के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने बैंकिंग क्षेत्र की प्रगति रिपोर्ट पेश की।
विकास आयुक्त ने इन आंकड़ों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह राज्य सरकार, विभिन्न बैंकिंग संस्थानों और सरकारी विभागों के आपसी तालमेल और संयुक्त प्रयासों का एक बड़ा और सकारात्मक परिणाम है। सरकार की योजनाओं और बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार के कारण ही आज राज्य के सुदूर ग्रामीण इलाकों के लोग भी मुख्यधारा की बैंकिंग से जुड़कर बचत कर रहे हैं।
CD Ratio ने रचा इतिहास
बिहार के लोगों द्वारा बैंकों पर दिखाए गए इस भरोसे का असर लोन (ऋण) वितरण पर भी साफ नजर आ रहा है। बैंकों ने भी इस साल बिहार के विकास और कारोबारियों पर जमकर मेहरबानी दिखाई है। बैंकों ने राज्य के भीतर कुल 3 लाख 70 हजार 563 करोड़ रुपये का लोन बांटकर एक नया इतिहास रच दिया है।
इसके साथ ही, बिहार में पहली बार सीडी रेशियो (Credit-Deposit Ratio यानी जमा और कर्ज का अनुपात) 60 फीसदी के पार जाने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना है।
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वित्त वर्ष 2026-27 में बिहार के बैंकों का सीडी रेशियो 60.21 प्रतिशत दर्ज किया गया।
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जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा महज 57.36 प्रतिशत था।
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अगर बीते कुछ सालों की तुलना करें, तो वर्ष 2018-19 में बिहार का सीडी अनुपात केवल 44.09 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 60.21% हो गया है। इस साल कुल वितरित कर्ज में 37,882 करोड़ रुपये की भारी वृद्धि देखी गई है।
ऋण प्रवाह बढ़ने से बिहार के कारोबार को मिली रफ्तार
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह के अनुसार, राज्य के सीडी रेशियो में यह ऐतिहासिक सुधार इस बात का प्रतीक है कि बिहार में अब व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। बैंकों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में दिए जा रहे लोन ने राज्य की आर्थिक गाड़ी को रफ्तार दी है। विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में ऋण का प्रवाह काफी बढ़ा है:
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कृषि और ग्रामीण विकास: किसानों को खेती और सहायक कार्यों के लिए आसानी से ऋण मिल रहा है।
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MSME और स्टार्टअप: छोटे उद्योगों, नए स्टार्टअप्स और स्थानीय व्यवसायियों को आगे बढ़ने के लिए वित्तीय मदद दी जा रही है।
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महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार: जीविका दीदियों और महिला उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बैंक लोन दे रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।
19 मई से ‘सहयोग शिविर’
आम जनता को बैंकिंग सेवाओं में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों से निजात दिलाने के लिए विकास आयुक्त ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि आगामी 19 मई से राज्यभर में विशेष ‘सहयोग शिविरों’ का आयोजन किया जा रहा है।
इन शिविरों के माध्यम से आम खाताधारकों को बैंक के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। शिविर में मुख्य रूप से ग्राहकों के केवाईसी (KYC) से जुड़े रुके हुए आवेदन, पुराने खातों का नवीनीकरण (रिन्यूअल), लोन से संबंधित शिकायतें तथा अन्य सभी प्रकार की बैंकिंग समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट (मौके पर ही) त्वरित समाधान किया जाएगा। सरकार की इस पहल से ग्राहकों और बैंकों के बीच का रिश्ता और अधिक मजबूत होगा।