बिहार: गंगा किनारे बिछेगा सड़कों का जाल; 5500 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट, मनेर, दिघवारा और गोपालगंज को मिलेगी जाम से मुक्ति

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार में सड़क संपर्क (कनेक्टिविटी) और बुनियादी ढांचे को एक नया आयाम देने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। विकास की इसी कड़ी में गंगा और सोन नदी के किनारे बड़े पैमाने पर मेगा प्रोजेक्ट्स शुरू करने की तैयारी है। बिहार सरकार ने गंगा तट के आसपास तीन नई भव्य फोर लेन सड़कों के निर्माण की एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके साथ ही, परिवहन व्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सोन नदी पर एक नया पुल भी बनाया जाएगा।

इस पूरी मेगा योजना पर करीब 5,500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। सरकार का दावा है कि इन बड़ी परियोजनाओं के धरातल पर उतरने के बाद राजधानी पटना सहित बिहार के कई महत्वपूर्ण जिलों की कनेक्टिविटी बेहद शानदार हो जाएगी और आम जनता को वर्षों से मिल रहे ट्रैफिक जाम के दर्द से हमेशा के लिए राहत मिल जाएगी।

मनेर से बक्सर तक बनेगा ‘विश्वामित्र पथ’

इस पूरी योजना में सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी परियोजना ‘विश्वामित्र पथ’ है। यह फोर लेन सड़क पटना के मनेर से शुरू होकर बक्सर तक जाएगी। लगभग 90 किलोमीटर लंबी यह फोर लेन सड़क गंगा नदी के किनारे बने बाढ़ सुरक्षा बांध के सहारे विकसित की जाएगी। इस मार्ग की खास बात यह होगी:

  • नए बांध का निर्माण: जिन इलाकों में गंगा किनारे बांध पहले से मौजूद नहीं है, वहां सरकार पहले एक मजबूत नया बांध बनाएगी और फिर उसके ऊपर सड़क का निर्माण किया जाएगा। इससे बाढ़ सुरक्षा भी होगी और रास्ता भी बनेगा।

  • एट-ग्रेड सड़क: यह सड़क पूरी तरह से ‘एट-ग्रेड’ होगी, जिसका मतलब है कि इसे एलिवेटेड (पिलर के ऊपर) न बनाकर सीधे जमीन या बांध के स्तर पर बनाया जाएगा। यह मार्ग पटना और बक्सर के बीच एक बेहतरीन और तेज वैकल्पिक रास्ता बनेगा।

 

सोन नदी पर नया पुल और सर्वे की तैयारी तेज

विश्वामित्र पथ परियोजना के अंतर्गत ही सोन नदी के ऊपर एक नए पुल का निर्माण भी प्रस्तावित है। यह पुल पटना और भोजपुर-बक्सर के बीच के सफर को और अधिक सुगम और सुरक्षित बना देगा। बिहार राज्य पथ विकास निगम (BSRDC) ने इस पूरे प्रोजेक्ट की विस्तृत कार्य योजना (DPR) तैयार करने के लिए सर्वे एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इस सिलसिले में आगामी 27 मई को एक प्री-बिड बैठक बुलाई गई है, जबकि 10 जून तक एजेंसी का अंतिम रूप से चयन करने का लक्ष्य रखा गया है। जिस एजेंसी का चयन होगा, उसे अगले छह महीने के भीतर पूरे इलाके का तकनीकी सर्वे पूरा करके सरकार को अपनी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) सौंपनी होगी।

गंगा-अंबिका पथ और नारायणी पथ का निर्माण

विश्वामित्र पथ के अलावा, सरकार गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे दो अन्य बेहद महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं पर एक साथ काम कर रही है:

  1. गंगा-अंबिका पथ: यह सड़क करीब 56 किलोमीटर लंबी होगी। यह मुख्य रूप से वैशाली के बिदुपुर से लेकर सारण के दिघवारा को आपस में जोड़ने का काम करेगी।

  2. नारायणी पथ: इस हाईवे की लंबाई लगभग 73.51 किलोमीटर होगी। यह गोपालगंज के दरिहारा से शुरू होकर डुमरिया घाट तक जाएगी, जिससे उत्तर बिहार के जिलों को सीधा फायदा होगा।

 

PPP मॉडल पर होगा विकास

सरकार इन तीनों ही नए कॉरिडोर को पीपीपी (Public-Private Partnership) मॉडल के तहत विकसित करने की योजना बना रही है। इसमें निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियां निवेश करेंगी और सड़क बनने के बाद टोल टैक्स के जरिए अपनी लागत वसूलेंगी।

इन सड़कों के बन जाने से गंगा और सोन किनारे बसे जिलों में न केवल आम लोगों का आवागमन आसान होगा, बल्कि व्यापार, कृषि उत्पादों की ढुलाई और धार्मिक व ऐतिहासिक पर्यटन को भी एक नई और तेज गति मिलने की पूरी उम्मीद है।

तेजी से बढ़ रहा जेपी गंगा पथ फेज-2 का काम

इन तीन नई सड़कों के समानांतर, पटना का लाइफलाइन माना जाने वाला ‘जेपी गंगा पथ फेज-2’ का काम भी बेहद युद्धस्तर पर आगे बढ़ रहा है। यह प्रोजेक्ट दीघा से लेकर कोईलवर तक कुल 35.65 किलोमीटर की लंबाई में तैयार किया जा रहा है।

इस फेज के तहत शेरपुर से कोईलवर तक की सड़क बांध के ऊपर एट-ग्रेड फोर लेन होगी, जबकि दीघा से शेरपुर के बीच गंगा नदी के समानांतर एलिवेटेड फोर लेन सड़क का निर्माण किया जा रहा है।

अगले 4 वर्षों में पूरा होगा काम

परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन सभी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर संयुक्त रूप से करीब 5,500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश होना है। सरकार का मुख्य लक्ष्य यह है कि आगामी चार वर्षों के भीतर इन सभी सड़कों और पुलों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए। इनके तैयार होने के बाद, पटना से लेकर बिहार के पश्चिमी जिलों और उत्तर बिहार के इलाकों तक का सफर मिनटों में तय होने लगेगा।

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