BNT Desk: देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शुमार ‘एम्स पटना’ (AIIMS Patna) से एक ऐसी हृदयविदारक और हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जिसने अस्पताल परिसर की सुरक्षा और वहां सक्रिय दलालों के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां अस्पताल के बेड पर एक मासूम बच्चा कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसकी जान बचाने के लिए दर-दर भटक रहे एक गरीब मामा को अस्पताल के बाहर सक्रिय दलालों ने अपनी ठगी का शिकार बना लिया।
बिहार और अन्य राज्यों से रोज हजारों गरीब मरीज इस उम्मीद के साथ पटना एम्स आते हैं कि उन्हें सही और सस्ता इलाज मिलेगा। कोई अपना खेत बेचकर आता है तो कोई भारी कर्ज लेकर। लेकिन इलाज की इसी बेबसी और लाचारी के बीच अस्पताल परिसर में दलालों का एक ऐसा गिरोह सक्रिय है, जो खून, बेड, सरकारी पर्ची और जल्दी जांच कराने के नाम पर इन बेबस परिवारों की गाढ़ी कमाई लूट रहा है।
कैंसर पीड़ित भांजे के लिए खून की तलाश में था परिवार
यह दर्दनाक मामला बिहार के सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर का है। यहाँ के रहने वाले नीरज कुमार पिछले करीब एक महीने से अपने 13 वर्षीय भांजे कृष्ण कुमार का इलाज कराने के लिए पटना एम्स में डेरा डाले हुए हैं। मासूम कृष्ण कुमार कैंसर से पीड़ित है और उसकी हालत काफी नाजुक बनी हुई है। इलाज के दौरान उसे अब तक कई बार खून (ब्लड) चढ़ाया जा चुका है।
बीती 11 मई को डॉक्टरों ने बच्चे की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए परिजनों से तुरंत एक यूनिट ब्लड का इंतजाम करने को कहा। भांजे की जान खतरे में देख मामा नीरज कुमार बदहवास हालत में एम्स के मुख्य गेट के बाहर किसी मददगार की तलाश कर रहे थे।
एक यूनिट खून के बदले मांगे 20 हजार रुपये
नीरज कुमार जब गेट के बाहर परेशान खड़े थे, तभी एक एंबुलेंस चालक ने उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हुए उन्हें सन्नी कुमार नाम के एक युवक से मिलवाया। सन्नी ने खुद को अस्पताल का जानकार बताते हुए तुरंत एक यूनिट ब्लड का इंतजाम कराने का दावा किया, लेकिन इसके बदले उसने 20 हजार रुपये की मोटी रकम मांग ली।
“भांजे की हालत इतनी खराब थी कि मेरे पास सोचने का वक्त नहीं था। डॉक्टर ने कहा था कि खून तुरंत नहीं मिला तो कुछ भी हो सकता है। मैंने बच्चे की जान बचाने के लिए बिना कुछ सोचे-समझे दलाल के बताए अकाउंट पर ऑनलाइन 20 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।” — नीरज कुमार, पीड़ित मामा
डॉक्टरों ने पकड़ा झूठ
पैसे ट्रांसफर होते ही आरोपी सन्नी कुमार ने नीरज को एक कार्ड थमा दिया और कहा कि इसे ब्लड बैंक में दिखाते ही तुरंत खून मिल जाएगा। जब नीरज कुमार उम्मीद के साथ अस्पताल के अंदर गए और डॉक्टरों को वह कार्ड दिखाया, तो डॉक्टरों ने उसे देखते ही फर्जी करार दे दिया। यह सुनते ही पीड़ित परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। एक तो बच्चा जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था, ऊपर से इलाज के लिए रखे पैसे भी ठग लिए गए थे।
पीड़ित ने सूझबूझ से आरोपी को दबोचा
ठगे जाने का अहसास होने पर नीरज कुमार ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने सूझबूझ से काम लेते हुए आरोपी सन्नी कुमार को दोबारा फोन किया और किसी दूसरे काम के बहाने एम्स गेट के पास बुलाया। जैसे ही आरोपी वहां पहुँचा, नीरज ने स्थानीय लोगों की मदद से उसे रंगे हाथों दबोच लिया। इसके बाद मामले की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई और आरोपी को फुलवारी शरीफ थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया।
सख्त कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद एम्स में इलाज कराने आने वाले मरीजों के परिजनों में भारी आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि एम्स के मुख्य गेट से लेकर ओपीडी (OPD), इमरजेंसी वार्ड और जांच केंद्रों तक दलालों का जाल फैला हुआ है। ये दलाल सीधे-सादे और दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों को अपना निशाना बनाते हैं।
कोई कम समय में डॉक्टर से दिखाने का दावा करता है तो कोई प्राइवेट बेड दिलाने का झांसा देता है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एम्स प्रबंधन और जिला प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल परिसर के अंदर और बाहर पुलिस की गश्त बढ़ाई जाए और सीसीटीवी कैमरों की मदद से ऐसे दलालों को चिह्नित कर जेल भेजा जाए।
पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
मामले की पुष्टि करते हुए फुलवारी शरीफ के थाना प्रभारी मोहम्मद गुलाम शाहबाज आलम ने बताया कि पीड़ित के बयान के आधार पर आरोपी युवक के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अब आरोपी से कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह में अस्पताल के कौन-कौन से कर्मचारी या एंबुलेंस चालक शामिल हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि अस्पताल के आसपास किसी भी दलाल को बख्शा नहीं जाएगा।