BNT Desk: पटना में बीजेपी के प्रदेश मुख्यालय में आज एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में पार्टी के सभी विधायक और वरिष्ठ नेता मौजूद थे। जैसे ही बैठक शुरू हुई, सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी विधायकों ने एक स्वर में समर्थन दिया।
सम्राट चौधरी को नेता चुने जाने की घोषणा होते ही बीजेपी कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। पटना की सड़कों पर ढोल-नगाड़े बजने लगे और समर्थकों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया।
नीतीश के इस्तीफे के बाद पलटा पासा
आज सुबह जैसे ही नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) से अपना नाता तोड़ा, बिहार की राजनीति की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। बीजेपी ने बिना देर किए नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू की। पार्टी ने इस बार किसी के पीछे चलने के बजाय अपने सबसे आक्रामक चेहरे सम्राट चौधरी को आगे कर यह संदेश दिया है कि अब बिहार में बीजेपी ड्राइविंग सीट पर होगी।
कौन हैं सम्राट चौधरी? ‘मुरैठा’ वाले नेता की कहानी
सम्राट चौधरी वर्तमान में बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हैं और उनकी पहचान एक जुझारू और जमीनी नेता की है।
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कुशवाहा समाज का चेहरा: वे बिहार के प्रभावशाली कुशवाहा समाज से आते हैं और पिछड़े वर्गों के बीच उनकी मजबूत पकड़ है।
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राजनीतिक अनुभव: वे पहले भी बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं और उन्हें प्रशासन का अच्छा अनुभव है।
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चर्चित संकल्प: सम्राट चौधरी अपनी आक्रामक शैली के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने नीतीश सरकार को सत्ता से हटाने के लिए अपने सिर पर ‘मुरैठा’ (पगड़ी) बांधा था और संकल्प लिया था कि जब तक सत्ता परिवर्तन नहीं होगा, वे इसे नहीं खोलेंगे। आज उनका वह संकल्प पूरा होता दिख रहा है।
तेजस्वी के तंज का करारा जवाब
हाल ही में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी पर तंज कसते हुए उन्हें ‘लालू की पाठशाला’ का छात्र बताया था। बीजेपी ने सम्राट को मुख्यमंत्री के रूप में पेश कर तेजस्वी और लालू यादव को सीधा संदेश दिया है कि वे उनकी पुरानी राजनीति को उन्हीं के अंदाज में चुनौती देने के लिए तैयार हैं। यह नियुक्ति बिहार में ‘मंडल राजनीति’ के नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है।
राजभवन में शपथ ग्रहण की तैयारी
राजभवन में गहमागहमी तेज हो गई है। शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। जानकारी के अनुसार, सम्राट चौधरी के साथ बीजेपी और एनडीए के अन्य सहयोगी दलों के नेता भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। इस बदलाव के साथ ही बिहार में पिछले डेढ़ साल से चल रहा आरजेडी-जेडीयू का गठबंधन औपचारिक रूप से खत्म हो गया है।
मिशन 2026: बीजेपी का बड़ा दांव
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाना बीजेपी की एक सोची-समझी रणनीति है।
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जातीय समीकरण: बीजेपी ने लव-कुश समीकरण को साधने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है।
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स्वतंत्र नेतृत्व: सालों तक छोटे भाई की भूमिका में रहने के बाद, अब बीजेपी 2026 के विधानसभा चुनाव में अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल करने के मिशन पर निकल पड़ी है।