RJD का बड़ा फैसला: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर छात्र संगठन का बदला नाम, अब ‘SSAI’ के नाम से होगी नई पहचान

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BNT Desk: बिहार की राजनीति में जहाँ एक ओर सत्ता के शीर्ष पर बदलाव की सुगबुगाहट है, वहीं दूसरी ओर मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अपने संगठन के भीतर एक बहुत बड़े बदलाव की घोषणा कर दी है। पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने करीब तीन दशकों से सक्रिय ‘छात्र राजद’ को भंग कर उसे एक बिल्कुल नया स्वरूप और नया नाम दिया है। अब राजद का छात्र संगठन ‘ socialist students association of India’ (SSAI) के नाम से जाना जाएगा।

30 साल पुराने ढांचे में बदलाव: क्यों पड़ी जरूरत?

5 जुलाई 1997 को स्थापित ‘छात्र राजद’ पार्टी की रीढ़ माना जाता रहा है। हालांकि, सोमवार को तेजस्वी यादव ने इसकी औपचारिक समाप्ति और SSAI के गठन का ऐलान कर दिया। दरअसल, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने 6 मार्च को ही छात्र राजद की बिहार कमेटी को भंग कर दिया था। तब से ही संगठन के नए ढांचे और नाम को लेकर मंथन चल रहा था। इस बदलाव को तेजस्वी यादव की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वे पार्टी को आधुनिक और अखिल भारतीय स्वरूप देना चाहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और कानूनी अनिवार्यता

राजद ने इस बदलाव के पीछे एक महत्वपूर्ण कानूनी कारण का भी हवाला दिया है। तेजस्वी यादव के अनुसार, 2006 में सुप्रीम कोर्ट का एक निर्णय आया था जिसमें कहा गया था कि कोई भी राजनीतिक दल अपने नाम का सीधा इस्तेमाल छात्र संगठन के लिए नहीं करे। इसी निर्देश का पालन करते हुए राजद ने ‘छात्र राजद’ शब्द को हटाकर SSAI (Socialist Students Association of India) को अपनाया है।

दिल्ली और JNU की राजनीति पर नजर

तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया कि राजद का छात्र संगठन केवल बिहार तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “हम लोग जेएनयू (JNU) और दिल्ली के अन्य विश्वविद्यालयों में भी चुनाव लड़ते हैं। दिल्ली में हमारा संगठन काफी मजबूत है।” नए नाम (SSAI) के जरिए पार्टी अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहती है। इसका उद्देश्य भाजपा के एबीवीपी (ABVP) और वामपंथी दलों के एसएफआई (SFI) या आईसा (AISA) की तर्ज पर एक स्वतंत्र और प्रभावशाली छात्र इकाई खड़ा करना है।

संगठन के भीतर ‘पावर शिफ्ट’ के संकेत

राजनीतिक गलियारों में इस बदलाव को पार्टी के भीतर की शक्ति संरचना से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अब तक छात्र राजद की गतिविधियों और निर्णयों में तेज प्रताप यादव का काफी प्रभाव माना जाता था। लेकिन अब संगठन को भंग कर नया नाम देने और नई टीम बनाने की पूरी कमान तेजस्वी यादव ने अपने हाथ में ले ली है। सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी अब अपने नेतृत्व में एक ऐसी टीम तैयार करना चाहते हैं जो भविष्य की राजनीति और कैंपस इलेक्शन में नई ऊर्जा के साथ काम कर सके।

SSAI: नया लोगो, नई पहचान

तेजस्वी यादव ने सोमवार को SSAI के नए लोगो (Logo) की भी औपचारिक घोषणा की। अब यह संगठन देश भर के विश्वविद्यालयों में राजद के वैचारिक प्रकोष्ठ के रूप में काम करेगा। पार्टी का लक्ष्य है कि नए नाम और गैर-राजनीतिक ध्वज के साथ विश्वविद्यालय परिसरों में उन छात्रों को भी जोड़ा जाए जो सीधे तौर पर किसी क्षेत्रीय दल के नाम से जुड़ने में हिचकते थे।

कैंपस से लेकर दिल्ली तक विस्तार की योजना

छात्र राजद का नाम बदलकर SSAI करना केवल नाम का बदलाव नहीं, बल्कि राजद की विस्तारवादी नीति का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली और अन्य राज्यों में संगठन का विस्तार करने के लिए एक ‘न्यूट्रल’ और ‘सोशलिस्ट’ नाम की आवश्यकता थी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कैंपस की राजनीति में SSAI कितनी मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज करा पाता है और तेजस्वी की यह ‘नई टीम’ पार्टी को कितना चुनावी लाभ पहुंचाती है।

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