शत्रुघ्न सिन्हा का बड़ा बयान: “अभी इतनी जल्दी नया CM नहीं बनेगा, नीतीश जी को आराम करने दीजिए”, ‘पर्ची वाले बाबा’ पर भी कसा तंज

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार में जहाँ कयास लगाए जा रहे हैं कि 14 अप्रैल को इस्तीफा और 15 को शपथ ग्रहण होगा, वहीं शत्रुघ्न सिन्हा ने इन अटकलों पर थोड़ा ब्रेक लगाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, “अभी मुझे नहीं लगता कि इतनी जल्दी कोई नया मुख्यमंत्री बनेगा। नीतीश कुमार अभी राज्यसभा जा रहे हैं, उन्हें थोड़ा आराम करने दीजिए। आप लोग (मीडिया) भी इतना परेशान न हों और थोड़ा आराम करें।” सिन्हा ने आगे कहा कि नीतीश कुमार उनके पुराने मित्र हैं और उन्होंने बिहार के लिए लंबा समय दिया है, अब यदि वे केंद्र की राजनीति में जा रहे हैं, तो स्थिति को सहज होने देना चाहिए।

बिहार में काबिलियत की कमी नहीं: तेजस्वी की तारीफ

बिहार के नेतृत्व पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि बिहार में प्रतिभाओं और काबिल नेताओं की कोई कमी नहीं है। उन्होंने तेजस्वी यादव का विशेष उल्लेख करते हुए कहा, “तेजस्वी यादव एक बहुत ही काबिल और ऊर्जावान नेता हैं। उन्होंने कम उम्र में अपनी राजनीतिक समझ का लोहा मनवाया है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि बिहार में तेजस्वी के अलावा भी कई ऐसे नेता हैं जिनमें राज्य की कमान संभालने की पूरी क्षमता है।

‘पर्ची वाले बाबा’ पर सियासी तंज: कहीं दिल्ली से न आए फरमान?

शत्रुघ्न सिन्हा अपने तीखे तंजों के लिए जाने जाते हैं। बिहार में मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, “ऐसा न हो कि कोई पर्ची वाला बाबा यहाँ की पर्ची निकाल दे और सबको चौंका दे।” उनका यह इशारा सीधा तौर पर भाजपा (BJP) की कार्यशैली की ओर था, जहाँ हाल के वर्षों में कई राज्यों (जैसे मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़) में मुख्यमंत्री के नामों का ऐलान दिल्ली से आई एक ‘पर्ची’ के माध्यम से हुआ और पुराने कद्दावर नेताओं को किनारे कर दिया गया। सिन्हा का कहना था कि बिहार के नेता का चयन बिहार की धरती और यहाँ की जरूरतों के हिसाब से होना चाहिए, न कि दिल्ली के किसी गोपनीय लिफाफे से।

प्रशांत किशोर पर ध्यान देने की सलाह

इंटरव्यू के दौरान शत्रुघ्न सिन्हा ने एक और नाम उछाला जिसने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने कहा, “आप लोग एक और शख्स पर ध्यान दीजिए, वो हैं प्रशांत किशोर (PK)। वे लगातार जमीन पर काम कर रहे हैं और बिहार की राजनीति को बारीकी से समझ रहे हैं।” सिन्हा का यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रशांत किशोर अपनी ‘जन सुराज’ पदयात्रा के जरिए बिहार के ग्रामीण इलाकों में एक बड़ा आधार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सिन्हा ने यह संकेत दिया कि आने वाले समय में पीके को कम आंकना भूल होगी।

बिहार की राजनीति में ‘बिहारी बाबू’ का नजरिया

शत्रुघ्न सिन्हा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में एनडीए की नई सरकार और नए चेहरे को लेकर भारी सस्पेंस बना हुआ है। सिन्हा ने स्पष्ट किया कि भले ही वे आज टीएमसी में हैं, लेकिन बिहार की मिट्टी और यहाँ की राजनीति से उनका जुड़ाव कभी कम नहीं होगा। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और स्थानीय नेतृत्व की मजबूती पर जोर दिया।

निष्कर्ष: क्या खामोश रहेंगे सिन्हा?

शत्रुघ्न सिन्हा के इस बयान ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। उनके ‘पर्ची वाले बाबा’ के तंज ने भाजपा समर्थकों को असहज किया है, तो वहीं तेजस्वी और प्रशांत किशोर के समर्थन ने विपक्षी और स्वतंत्र खेमे को नई ऊर्जा दी है। 14 अप्रैल की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, सिन्हा के ये शब्द बिहार के सियासी शतरंज के प्यादों की चाल को और भी पेचीदा बना रहे हैं।

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