BNT Desk: वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती की भव्यता अब बिहार की राजधानी पटना में भी जीवंत होने जा रही है। बिहार सरकार ने राज्य में धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम (BSTDC) की पहल पर अब पटना के प्रमुख गंगा घाटों पर बनारस की तर्ज पर नियमित ‘महाआरती’ का आयोजन किया जाएगा।
यह फैसला न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को सम्मान देने के लिए लिया गया है, बल्कि इसका उद्देश्य बिहार को देश के पर्यटन मानचित्र पर एक नई और आध्यात्मिक पहचान दिलाना भी है।
पटना के इन दो घाटों से होगी शुरुआत
योजना के पहले चरण में पटना के दो ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण घाटों का चयन किया गया है:
-
मित्तन घाट: अपनी प्राचीनता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाने वाला यह घाट अब शाम को दीपों की रोशनी से जगमगाएगा।
-
पर्यटन घाट: यहाँ आने वाले पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए इसे महाआरती के मुख्य केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इन घाटों पर आरती को भव्य रूप देने के लिए निगम ने पेशेवर एजेंसियों से प्रस्ताव (टेंडर) मांगे हैं। चयनित एजेंसी को 1 लाख रुपये की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी और पूरे आयोजन के संचालन की जिम्मेदारी संभालनी होगी।
कैसी होगी महाआरती की भव्यता?
बनारस की गंगा आरती अपनी लयबद्धता, भारी-भरकम दीपदान और शंखनाद के लिए जानी जाती है। बिहार में भी ठीक इसी तरह का माहौल बनाने की तैयारी है। आयोजन में निम्नलिखित मुख्य आकर्षण होंगे:
-
योग्य ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार: आरती का संचालन प्रशिक्षित और योग्य पुजारियों द्वारा किया जाएगा।
-
साउंड और लाइटिंग: मंत्रों की गूंज और विशेष लाइटिंग सिस्टम के जरिए घाटों पर एक दिव्य वातावरण तैयार किया जाएगा।
-
सजावट और सुविधा: घाटों को फूलों और रंगोली से सजाया जाएगा। साथ ही, आरती देखने आने वाले श्रद्धालुओं के बैठने और उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।
-
भक्ति संगीत: आरती के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों और भक्ति संगीत का संगम देखने को मिलेगा।
अन्य जिलों में विस्तार की बड़ी योजना
पटना में सफल शुरुआत के बाद, सरकार की योजना इसे राज्य के उन सभी जिलों तक ले जाने की है जो गंगा किनारे बसे हैं।
-
बक्सर और भागलपुर: इन दोनों ऐतिहासिक शहरों में गंगा का विशेष महत्व है, इसलिए यहाँ भी महाआरती शुरू करने का प्रस्ताव है।
-
बख्तियारपुर (सीढ़ी घाट), सुल्तानगंज और हाजीपुर: यहाँ वर्तमान में छोटे स्तर पर आरती होती है, जिसे अब सरकारी सहयोग से और अधिक भव्य और व्यवस्थित बनाया जाएगा।
इस पहल के पीछे का दोहरा उद्देश्य
बिहार सरकार इस योजना के जरिए दो लक्ष्यों को एक साथ साधना चाहती है:
-
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा: जिस तरह लोग बनारस की आरती देखने दुनिया भर से आते हैं, उसी तरह पटना में भी पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। इससे स्थानीय रोजगार, नाव चालकों और छोटे व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
-
गंगा स्वच्छता का संदेश: महाआरती के माध्यम से लोगों को ‘नमामि गंगे’ अभियान से जोड़ने और गंगा की पवित्रता व स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक किया जाएगा।
बिहार की नई सांस्कृतिक पहचान
लंबे समय से बिहार के लोग यह मांग कर रहे थे कि राज्य में भी गंगा आरती को संस्थागत रूप दिया जाए। अब वह सपना हकीकत बनने जा रहा है। शाम के समय गंगा की लहरों पर दीपों का प्रतिबिंब और शंख की ध्वनि बिहार की संस्कृति में एक नया अध्याय जोड़ेगी। आने वाले समय में, पटना की यह महाआरती बनारस की आरती की तरह ही बिहार की एक वैश्विक पहचान बन सकती है।