BNT Desk: बिहार की राजधानी पटना के निवासियों के लिए गुरुवार की सुबह एक बुरी खबर लेकर आई। शहर के व्यस्ततम इलाकों में शुमार ‘पटना बाईपास’ स्थित नायरा (Nayara) पेट्रोल पंप पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पश्चिम एशिया के अस्थिर हालातों और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच स्थानीय स्तर पर कीमतों में हुए इस उछाल ने आम आदमी की जेब पर सीधा हमला किया है।
गुरुवार सुबह 6:00 बजे से ही नई दरें प्रभावी कर दी गई हैं, जिससे वाहन चालकों के बीच हड़कंप मच गया है।
नई दरें: कितना बढ़ा बोझ?
गुरुवार सुबह से लागू हुए नए रेट चार्ट के अनुसार, ईंधन की कीमतों में एकमुश्त बड़ी वृद्धि की गई है:
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पेट्रोल: ₹5 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी के साथ अब यह ₹110.35 प्रति लीटर हो गया है।
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डीजल: ₹3 प्रति लीटर महंगा होकर अब ₹94.58 प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है।
अचानक हुई इस बढ़ोतरी से सुबह-सुबह कार्यालय और अपने गंतव्य के लिए निकले लोग दंग रह गए। कई वाहन चालकों ने बताया कि कल तक जो टंकी कम पैसों में फुल हो रही थी, आज उसके लिए काफी ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं।
पटना बाईपास पर क्यों बढ़ी परेशानी?
पटना का बाईपास इलाका शहर की लाइफलाइन माना जाता है। यहाँ से न केवल शहर की गाड़ियाँ गुजरती हैं, बल्कि यह उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग भी है। भारी मालवाहक ट्रक, अंतरराज्यीय बसें और रोजाना ऑफिस जाने वाले हजारों लोग इसी मार्ग का उपयोग करते हैं।
बाईपास स्थित नायरा पंप पर इस बढ़ोतरी का मतलब है कि लंबी दूरी तय करने वाले ट्रकों और बसों के परिचालन खर्च में भारी इजाफा होगा। इसका सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में फल, सब्जी और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों में भी तेजी आ सकती है।
आम उपभोक्ताओं और मध्यम वर्ग पर दोहरी मार
इस मूल्य वृद्धि का सबसे गहरा असर मध्यम वर्ग और उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना निजी वाहनों (बाइक या कार) से आवाजाही करते हैं।
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निजी वाहन चालक: महीने का बजट बिगड़ना तय है। ₹5 प्रति लीटर की वृद्धि मामूली नहीं है, यह सीधे तौर पर बचत को प्रभावित करती है।
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ऑटो और बस यात्री: ईंधन के दाम बढ़ते ही सार्वजनिक परिवहन के किराए में वृद्धि की मांग उठने लगती है। पटना में ऑटो चालकों ने पहले ही संकेत दिए हैं कि यदि कीमतें इसी तरह बढ़ीं, तो वे न्यूनतम किराए में बढ़ोतरी कर सकते हैं।
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माल ढुलाई: ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिसका अंतिम बोझ आम जनता पर ही पड़ेगा।
क्या वैश्विक संकट है वजह?
हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी विशेष कारण का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान-इजरायल संघर्ष और ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ में पैदा हुए गतिरोध के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव का असर अब स्थानीय रिटेल आउटलेट्स पर दिखना शुरू हो गया है।
उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया
पटना बाईपास पर पेट्रोल भरवाने आए एक निजी कर्मचारी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “एक तरफ घर का राशन महंगा हो रहा है और दूसरी तरफ ऑफिस आने-जाने का खर्च। सरकार को कीमतों पर नियंत्रण रखना चाहिए, वरना आम आदमी का सड़क पर चलना मुश्किल हो जाएगा।” वहीं, बस चालकों का कहना है कि ₹3 डीजल बढ़ने से उनके दैनिक मुनाफे में बड़ी कटौती हो जाएगी।