क्लासरूम में सहपाठियों की पिटाई से चौथी की छात्रा स्मृति कुमारी की मौत — शिक्षक बोले ‘जो जीतेगा वही पिटेगा’, सीतामढ़ी में आक्रोश

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बिहार के सीतामढ़ी जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। जिले के सोनबरसा प्रखंड स्थित सहोरवा मध्य विद्यालय में चौथी कक्षा की मासूम छात्रा स्मृति कुमारी की सहपाठी छात्राओं द्वारा कथित पिटाई के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक और आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। साथ ही विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


पंखा चालू करने पर हुआ विवाद, मारपीट तक पहुंचा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार स्मृति कुमारी जितेंद्र कुमार राय की पुत्री थीं। घटना के दिन स्मृति क्लासरूम में पंखा चालू करने गई थी, जिस पर उसकी दो सहपाठी छात्राओं — राकेश साह और राम सागर महतो की पुत्रियों — ने आपत्ति जताई। इसी बात पर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हुई और देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुंच गया।

परिजनों का आरोप है कि दोनों सहपाठी छात्राओं ने मिलकर स्मृति की जमकर पिटाई कर दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई।


रास्ते में ही गांधी सेतु पर तोड़ा दम

घटना की सूचना मिलते ही पिता जितेंद्र राय तुरंत स्कूल पहुंचे और आनन-फानन में बेटी को इलाज के लिए पहले सोनबरसा, फिर सीतामढ़ी और उसके बाद पटना ले जाया जाने लगा। लेकिन दुर्भाग्यवश रास्ते में गांधी सेतु, पटना पर ही मासूम स्मृति ने दम तोड़ दिया। एक मासूम बच्ची की इस तरह मौत ने परिवार को तोड़ कर रख दिया है।


शिक्षकों पर गंभीर लापरवाही का आरोप

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि घटना के वक्त विद्यालय में शिक्षक हरेराम सिंह, जोगेंद्र सहनी समेत कई अन्य शिक्षक मौजूद थे। बावजूद इसके किसी ने भी बच्चों की लड़ाई में बीच-बचाव नहीं किया।

मृतका के पिता ने बताया कि जब बच्चों ने मारपीट की सूचना शिक्षकों को दी तब भी कोई आगे नहीं आया। यहां तक कि एक सहायक शिक्षक ने कथित तौर पर कह दिया — “जो जीतेगा, वही पिटेगा” — जिससे मामला और बिगड़ गया। शिक्षक के इस गैरजिम्मेदाराना बयान ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है और इस पर व्यापक आक्रोश देखा जा रहा है।


पुलिस जांच शुरू, परिजनों में आक्रोश

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। स्थानीय स्तर पर परिजनों और ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। लोगों की मांग है कि दोषी शिक्षकों और छात्राओं के अभिभावकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

यह घटना बिहार के सरकारी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों की जवाबदेही पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। जहां शिक्षकों की जिम्मेदारी बच्चों को सुरक्षित रखने की होती है, वहीं इस मामले में उनकी लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली।


 

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