लालू यादव की बढ़ सकती है मुश्किलें: चारा घोटाला मामले में जमानत रद्द करने पर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई

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BNT Desk: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। चारा घोटाला मामले में उन्हें मिली जमानत को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उनकी जमानत को चुनौती देते हुए अदालत से इसे रद्द करने की मांग की है।

CBI की दलील: ‘जमानत कानून के खिलाफ’

इस मामले की जांच कर रही सीबीआई का कहना है कि लालू यादव को दी गई जमानत कानूनी रूप से सही नहीं है। पिछली सुनवाई में सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल S. V. राजू ने तर्क दिया था कि लालू यादव ने अपनी सजा की आधी अवधि जेल में पूरी नहीं की है, जो जमानत के लिए एक सामान्य कानूनी प्रावधान है। सीबीआई ने जमानत को कानून के खिलाफ बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की अपील की है।

लालू यादव का पक्ष: वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की दलीलें

दूसरी ओर, लालू यादव का बचाव कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा था कि इस मामले के अन्य आरोपियों को अब तक नोटिस तक जारी नहीं किया गया है। उन्होंने दलील दी थी कि केवल लालू यादव की जमानत को निशाना बनाना और उसे रद्द करने की मांग करना उचित नहीं है। फिलहाल, लालू यादव खराब स्वास्थ्य के आधार पर भी जमानत पर बाहर हैं।

क्या है चारा घोटाला?

चारा घोटाला केवल एक केस नहीं, बल्कि 55 से ज्यादा मामलों का एक बड़ा जाल था।

  • कब का है मामला: यह घोटाला 1992 से 1995 के बीच का है।

  • कितनी राशि: बिहार के सरकारी खजाने से फर्जी बिलों के जरिए लगभग 950 करोड़ रुपये निकाले गए थे।

  • कैसे हुआ: पशुपालन विभाग के अधिकारियों और राजनेताओं ने मिलकर चारा, दवाइयों और कृत्रिम गर्भाधान के उपकरणों के नाम पर नकली बिल बनवाए और सरकारी पैसा हड़प लिया।

  • लालू पर केस: लालू यादव पर इस घोटाले के 6 मामले दर्ज थे, जिनमें से 5 मामले बिहार विभाजन के बाद झारखंड (रांची) ट्रांसफर हो गए थे।

पहली बार कैसे खुला राज?

चारा घोटाले की सुगबुगाहट 1979 से ही थी, लेकिन इसकी पहली ठोस रिपोर्ट 1992 में विजिलेंस इंस्पेक्टर बिधू भूषण द्विवेदी ने सौंपी थी। असली धमाका दिसंबर 1995 में हुआ, जब कैग (CAG) की रिपोर्ट में बिलों की धोखाधड़ी की बात सामने आई। उस समय लालू यादव ही मुख्यमंत्री थे और पशुपालन विभाग भी उन्हीं के पास था।

हाईकोर्ट के आदेश पर मार्च 1996 में इस मामले की जांच CBI को सौंपी गई। 24 जनवरी 1996 को चाईबासा खजाने से 37.7 करोड़ रुपये की अवैध निकासी को लेकर पहली FIR दर्ज हुई थी।

लालू यादव को अब तक किन मामलों में हुई सजा?

लालू यादव को चारा घोटाले के 5 अलग-अलग मामलों में अब तक दोषी करार दिया जा चुका है:

  1. चाईबासा ट्रेजरी (37.7 करोड़): 2013 में 5 साल की जेल।

  2. देवघर ट्रेजरी (80 लाख): 2017 में साढ़े तीन साल की जेल।

  3. चाईबासा ट्रेजरी (33.67 करोड़): 2018 में 5 साल की जेल।

  4. दुमका ट्रेजरी (3.13 करोड़): 2018 में 14 साल (7-7 साल के दो भाग) की जेल।

  5. डोरंडा ट्रेजरी (139.35 करोड़): 2022 में 5 साल की जेल और 60 लाख रुपये जुर्माना।

राजनीतिक और कानूनी असर

आज होने वाली सुनवाई बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर सुप्रीम कोर्ट जमानत रद्द करने का फैसला सुनाता है, तो लालू यादव को वापस जेल जाना पड़ सकता है। इसका असर बिहार की राजनीति और आने वाले चुनावों पर भी पड़ेगा, क्योंकि लालू यादव अपनी पार्टी के सबसे बड़े रणनीतिकार हैं।

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