BNT Desk: 24 अप्रैल, 2026 को भारतीय राजनीति में एक ऐसा भूचाल आया जिसने ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की बुनियाद हिला दी है। आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने राज्यसभा के 6 अन्य सांसदों के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का ऐलान कर दिया है। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चड्ढा ने इसे ‘देशहित’ में लिया गया फैसला बताया, जबकि विपक्षी खेमे में इसे ‘डर और लालच’ की राजनीति करार दिया जा रहा है।
राघव चड्ढा का आरोप: ‘रास्ते से भटक गई है AAP’
अपने इस्तीफे के कारणों का खुलासा करते हुए राघव चड्ढा ने बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा:
“जिस आम आदमी पार्टी को मैंने 15 सालों तक अपने खून-पसीने से सींचा, वह आज अपने मूल सिद्धांतों और मार्ग से भटक गई है। अब यह पार्टी देशहित के लिए नहीं, बल्कि केवल कुछ लोगों के निजी फायदों के लिए काम कर रही है। मैं अब पार्टी से दूर और जनता के करीब जा रहा हूँ।”
चड्ढा ने दावा किया कि उनके साथ राज्यसभा के दो-तिहाई (2/3) से ज्यादा सांसद हैं, जिनमें हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता और स्वाति मालीवाल जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
तेजस्वी यादव का तीखा हमला: ‘जो डर गए, वही बिक गए’
विपक्ष के नेता और आरजेडी (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने इस दलबदल पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बिहार विधानसभा परिसर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से वैचारिक आत्मसमर्पण है।
तेजस्वी ने कहा, “राजनीति में कुछ लोग संघर्ष नहीं कर पाते। वे या तो जांच एजेंसियों के डर से डर जाते हैं या फिर सत्ता के लालच में समझौता कर लेते हैं। जो लोग भाजपा में जा रहे हैं, वे अपनी विचारधारा बेच चुके हैं।” उन्होंने साफ किया कि जो लोग आज भी संविधान बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, वे भाजपा के सामने कभी नहीं झुकेंगे।
AAP का पलटवार: ‘ED के छापे से डराकर तोड़ी गई पार्टी’
आम आदमी पार्टी ने अपने सांसदों की बगावत के पीछे केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों का हाथ बताया है। ‘आप’ नेता अनुराग ढांडा ने तीखे लहजे में कहा कि देश आज इन सांसदों का असली चरित्र देख रहा है।
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ED का आरोप: ढांडा ने दावा किया कि तीन दिन पहले ही सांसद अशोक मित्तल के यहाँ ईडी (ED) का छापा पड़ा था। इसके बाद अन्य सांसदों को डराया गया कि अगर वे साथ नहीं आए, तो उनके साथ भी यही होगा।
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पंजाब का डर: उन्होंने कहा कि पंजाब में भगवंत मान सरकार की लोकप्रियता से भाजपा डरी हुई है। वे चुनाव में ‘आप’ को नहीं हरा सकते, इसलिए पिछले दरवाजे से सांसदों को तोड़ रहे हैं।
राज्यसभा का नया समीकरण
राघव चड्ढा के इस कदम से राज्यसभा में ‘आप’ की ताकत लगभग खत्म होने की कगार पर है। कुल 10 सांसदों में से अगर 7 (दो-तिहाई) भाजपा में चले जाते हैं, तो दलबदल कानून के तहत उनकी सदस्यता भी सुरक्षित रहेगी और राज्यसभा में विपक्ष का गणित पूरी तरह बदल जाएगा।
बगावत में शामिल संभावित नाम:
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राघव चड्ढा
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हरभजन सिंह
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स्वाति मालीवाल
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अशोक मित्तल
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राजेंद्र गुप्ता (और अन्य)
संघर्ष और सत्ता की जंग
राघव चड्ढा का भाजपा में जाना केवल एक व्यक्ति का दलबदल नहीं है, बल्कि यह अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती है। जहाँ एक ओर चड्ढा इसे ‘पार्टी की गुटबाजी और भटकाव’ का नतीजा बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे ‘एजेंसियों का डर’ कह रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ‘आप’ के बचे हुए सदस्य इस बिखराव को रोक पाते हैं या यह पार्टी के राष्ट्रीय अस्तित्व के अंत की शुरुआत है।