BNT Desk: पटना में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई पहल की जा रही है। पटना स्मार्ट सिटी प्रबंधन अपने तीन बड़े प्रोजेक्ट्स को मॉनेटाइज कर राजस्व अर्जित करने की तैयारी में है। इनमें गांधी गोलंबर के पास स्थित मल्टी मॉडल हब, पटना जंक्शन का अंडरग्राउंड सब-वे और अदालतगंज तालाब शामिल हैं। इन परियोजनाओं के व्यावसायिक उपयोग के लिए योजना तैयार की गई है। इससे एक तरफ आम लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास होगा, वहीं दूसरी तरफ स्मार्ट सिटी को नियमित आय प्राप्त होने की उम्मीद है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन तीनों परियोजनाओं से सालाना करीब 15 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद जताई गई है। इसके लिए अनुबंध की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की योजना है। परियोजनाओं के संचालन, रखरखाव और व्यावसायिक गतिविधियों को व्यवस्थित करने के लिए निजी भागीदारी और संबंधित संस्थाओं के सहयोग पर जोर दिया जा रहा है।
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत पटना में कई छोटे-बड़े प्रोजेक्ट्स तैयार किए गए हैं। अब इन परियोजनाओं के रखरखाव के साथ-साथ नियमित आय के स्रोत विकसित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसी कड़ी में तीन प्रमुख परियोजनाओं को व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़ने की तैयारी की गई है।
मल्टी मॉडल हब में खुलेंगे रेस्टोरेंट, कैफेटेरिया और दुकानें
गांधी गोलंबर के पास बना मल्टी मॉडल हब इस योजना का प्रमुख हिस्सा है। करीब 66.81 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस बहुउद्देशीय केंद्र में बस, ऑटो, टैक्सी और निजी वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य अलग-अलग परिवहन साधनों का उपयोग करने वाले यात्रियों को एक ही स्थान पर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
अब इस परिसर में यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एटीएम, रेस्टोरेंट, कैफेटेरिया और रिटेल दुकानों के संचालन की योजना है। इन व्यावसायिक सुविधाओं से यात्रियों को खाने-पीने, खरीदारी और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए सुविधा मिलेगी। साथ ही दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से स्मार्ट सिटी को आय प्राप्त हो सकेगी।
मल्टी मॉडल हब के व्यावसायिक संचालन को व्यवस्थित करने के लिए अनुबंध की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसके माध्यम से दुकानों के संचालन, किराये और रखरखाव से जुड़े पहलुओं को तय किया जा सकेगा। इससे परिसर का नियमित उपयोग बढ़ाने और उपलब्ध सुविधाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पटना जंक्शन अंडरग्राउंड सब-वे का रखरखाव महावीर मंदिर ट्रस्ट के सहयोग से
पटना जंक्शन तक यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया अंडरग्राउंड सब-वे भी इस योजना में शामिल है। करीब 84.83 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस सब-वे में यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने के साथ व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करने की तैयारी है।
रिपोर्ट के अनुसार, जीपीओ से पटना जंक्शन जाने वाले इस अंडरग्राउंड सब-वे के रखरखाव पर हर महीने करीब आठ लाख रुपये खर्च होते हैं। अब इस खर्च का आधा हिस्सा, यानी लगभग चार लाख रुपये प्रतिमाह, श्री महावीर स्थान न्यास समिति उठाएगी। इसके साथ ही सब-वे में मौजूद छह दुकानों के संचालन की जिम्मेदारी भी ट्रस्ट को देने की योजना है। इसके बदले किराये का भुगतान भी किया जाएगा।
इन दुकानों में नेवेद्यम सहित पूजन सामग्री और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं से संबंधित आउटलेट खोलने की योजना है। इससे यात्रियों को आवागमन के दौरान आवश्यक सामान खरीदने की सुविधा मिल सकेगी। दुकानों के संचालन से सब-वे परिसर में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने और नियमित रखरखाव में सहयोग मिलने की उम्मीद है।
इस व्यवस्था को लागू करने के लिए पटना स्मार्ट सिटी और महावीर मंदिर ट्रस्ट के बीच अनुबंध किया जाना है। अनुबंध की शर्तें पूरी होने के बाद रखरखाव और दुकानों के संचालन से संबंधित व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
अदालतगंज तालाब को फिर से विकसित करने की तैयारी
पटना के अदालतगंज तालाब को भी व्यावसायिक उपयोग के जरिए दोबारा सक्रिय करने की योजना बनाई गई है। इस परियोजना पर 10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने की जानकारी दी गई है। करीब डेढ़ साल से उपेक्षित पड़े इस परिसर को फिर से जीवंत बनाने के लिए पर्यटन और मनोरंजन से जुड़ी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाएगा।
योजना के तहत यहां पेडल बोट, कैफेटेरिया और बोटिंग जैसी सुविधाएं नए सिरे से शुरू करने की तैयारी है। इन गतिविधियों के संचालन में निजी भागीदारी की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को मनोरंजन के विकल्प मिलेंगे, साथ ही परिसर में नियमित गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
अदालतगंज तालाब को विकसित करने का उद्देश्य केवल परिसर का उपयोग बढ़ाना नहीं, बल्कि इसे शहर के सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों में शामिल करना भी है। हालांकि, इन सुविधाओं को शुरू करने की अंतिम समय-सीमा, संचालन की शर्तों और संभावित शुल्क के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
निजी भागीदारी से संचालन और रखरखाव पर जोर
पटना स्मार्ट सिटी की इन परियोजनाओं में निजी भागीदारी और संबंधित संस्थाओं के सहयोग से संचालन की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य परियोजनाओं के रखरखाव पर होने वाले खर्च को व्यवस्थित करना और व्यावसायिक गतिविधियों के माध्यम से आय के नियमित स्रोत तैयार करना है।
मल्टी मॉडल हब में दुकानों और खानपान की सुविधाओं का संचालन, अंडरग्राउंड सब-वे में छह दुकानों की व्यवस्था और अदालतगंज तालाब में पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां इसी योजना का हिस्सा हैं। इन व्यवस्थाओं के लिए संबंधित संस्थाओं और निजी एजेंसियों के साथ अनुबंध किए जाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
दूसरे चरण में अन्य परियोजनाएं भी होंगी शामिल
योजना के अगले चरण में स्मार्ट सिटी की कुछ अन्य परियोजनाओं को भी मॉनेटाइजेशन के दायरे में लाने की तैयारी है। इनमें मल्टीलेवल पार्किंग, स्मार्ट जिम, मॉर्निंग टावर और मीठापुर कॉमन सर्विस बिल्डिंग जैसी परियोजनाएं शामिल बताई गई हैं।
पटना स्मार्ट सिटी मिशन के तहत करीब 930 करोड़ रुपये की लागत से 44 छोटे-बड़े प्रोजेक्ट्स तैयार किए गए हैं। अब इन परियोजनाओं के रखरखाव, संचालन और नियमित आय के लिए अलग-अलग विकल्पों पर काम किया जा रहा है। दूसरे चरण में चयनित परियोजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों को देने की योजना भी शामिल है।
कुल मिलाकर, पटना स्मार्ट सिटी की तीन प्रमुख परियोजनाओं को व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़ने की तैयारी शहर के बुनियादी ढांचे के उपयोग और रखरखाव को लेकर महत्वपूर्ण है। यदि अनुबंध की प्रक्रिया निर्धारित योजना के अनुसार पूरी होती है, तो मल्टी मॉडल हब, अंडरग्राउंड सब-वे और अदालतगंज तालाब में सुविधाओं का संचालन नए तरीके से किया जा सकेगा। इससे यात्रियों और शहरवासियों को नई सुविधाएं मिलने के साथ स्मार्ट सिटी के लिए राजस्व जुटाने का रास्ता भी खुल सकता है।