बिहार: दरोगा भर्ती परीक्षा रद्द होने पर पटना में प्रदर्शन, CM हाउस कूच पर अड़े अभ्यर्थी; कंटीले तारों से घिरी सड़कें

BNT
By
6 Min Read

BNT Desk: बिहार में 1799 पदों वाली दरोगा भर्ती की मेंस परीक्षा रद्द किए जाने के विरोध में अभ्यर्थियों का आक्रोश अब सड़क पर दिखाई दे रहा है। सोमवार को पटना में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रदर्शन की तैयारी में जुटे हैं। सफल अभ्यर्थियों ने गांधी मैदान से लोक सेवक आवास तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। प्रस्तावित मार्च की शुरुआत गांधी मैदान के गेट नंबर-10 से होने की बात कही गई है। अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को देखते हुए पटना पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। डाकबंगला चौराहे पर बैरिकेडिंग की गई है और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कंटीले तार लगाए गए हैं। इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। लोहे की शील्ड और बैरिकेड के जरिए भी सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है।

10,789 सफल अभ्यर्थियों ने मार्च का किया ऐलान

दरोगा भर्ती परीक्षा के मामले में 10,789 सफल अभ्यर्थियों ने सोमवार को मार्च निकालने की घोषणा की है। अभ्यर्थियों के मुताबिक, वे गांधी मैदान के गेट नंबर-10 से मार्च शुरू करेंगे और लोक सेवक आवास तक जाने की कोशिश करेंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि मेंस परीक्षा रद्द किए जाने के बाद उनकी चिंता लगातार बढ़ रही है। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में आगे बढ़ चुके अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर अब स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थी सरकार से परीक्षा रद्द करने संबंधी फैसले को वापस लेने और भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

 

सात दिन से गर्दनीबाग में चल रहा धरना

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के अनुसार, वे पिछले सात दिनों से गर्दनीबाग धरना स्थल पर अपनी मांगों को लेकर बैठे हैं। उनका कहना है कि लगातार धरना देने के बावजूद अभी तक उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है। अभ्यर्थियों का कहना है कि इसी वजह से अब उन्होंने धरना स्थल से आगे बढ़कर सड़क पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। गांधी मैदान से लोक सेवक आवास तक प्रस्तावित मार्च को इसी आंदोलन का अगला चरण बताया जा रहा है। उनकी प्रमुख मांग 1799 पदों वाली दरोगा भर्ती की मेंस परीक्षा रद्द करने संबंधी नोटिस को वापस लेना है।

 

PT पास करने के बाद मेंस की परीक्षा दी थी

अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया के तहत सबसे पहले प्रारंभिक परीक्षा यानी PT में हिस्सा लिया था। PT में सफल होने के बाद उन्होंने मेंस परीक्षा की तैयारी की और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परीक्षा भी दी। अभ्यर्थियों के मुताबिक, मेंस परीक्षा में सफलता मिलने के बाद वे शारीरिक परीक्षा की तैयारी में जुट गए थे। कई अभ्यर्थियों ने इस तैयारी में कई महीने लगाए। इसके लिए उन्होंने समय के साथ आर्थिक संसाधन भी खर्च किए। अब मेंस परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले से अभ्यर्थियों के सामने आगे की प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।

 

परीक्षा रद्द होने से भविष्य को लेकर चिंता

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरणों को पार करने के बाद अचानक परीक्षा रद्द होने से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और इस भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण की तैयारी में जुटे थे। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस नहीं लिया जाता है तो उन्हें दोबारा पूरी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से वे सरकार से मामले में जल्द स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को अभ्यर्थियों की स्थिति को देखते हुए भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट फैसला लेना चाहिए।

 

पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा, डाकबंगला पर बैरिकेडिंग

प्रस्तावित मार्च को देखते हुए पटना पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। डाकबंगला चौराहे पर बैरिकेडिंग की गई है। प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए कंटीले तार भी लगाए गए हैं। इसके अलावा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। लोहे की शील्ड और बैरिकेड के जरिए सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। गांधी मैदान से डाकबंगला और आगे के इलाकों में भी सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन की कोशिश है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो।

अभ्यर्थी मांग पर कायम

फिलहाल प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी अपनी मांगों पर कायम हैं। उनका कहना है कि जब तक मेंस परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले को लेकर कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। गांधी मैदान से लोक सेवक आवास तक प्रस्तावित मार्च को लेकर अभ्यर्थियों की तैयारी और पुलिस की ओर से की गई सुरक्षा व्यवस्था के बीच पटना में स्थिति पर नजर बनी हुई है। अब देखना होगा कि प्रदर्शनकारी अपने प्रस्तावित मार्च को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है।

Share This Article