बिहार: गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे की मंजूरी में देरी, 417 KM हिस्से में भूमि अधिग्रहण पर संकट; 6 लेन की मांग

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BNT Desk: बिहार में गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना की मंजूरी का इंतजार बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार से समय पर स्वीकृति नहीं मिलने की स्थिति में परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसे देखते हुए बिहार के पथ निर्माण विभाग ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से परियोजना को जल्द मंजूरी देने का आग्रह किया है। राज्य सरकार ने एक्सप्रेसवे को प्रस्तावित चार लेन के बजाय छह लेन में विकसित करने की मांग भी दोहराई है। करीब 568 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में बिहार का हिस्सा लगभग 417 किलोमीटर होगा।

 

PPP मूल्यांकन समिति की मंजूरी का इंतजार

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मूल्यांकन समिति की मंजूरी के लिए भेजा है। इस स्तर पर स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना से जुड़ी आगे की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।

बिहार सरकार चाहती है कि परियोजना की मंजूरी में तेजी लाई जाए, ताकि जमीन अधिग्रहण और निर्माण की तैयारियों को आगे बढ़ाया जा सके। फिलहाल, मंजूरी की स्थिति और छह लेन के प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय महत्वपूर्ण बना हुआ है।

 

भूमि अधिग्रहण में देरी से बढ़ सकती है परेशानी

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए बिहार के संबंधित जिलों में भूमि अधिग्रहण की तैयारियां की जा रही हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, किशनगंज को छोड़कर अन्य संबंधित जिलों में जमीन अधिग्रहण से जुड़ी अधिसूचना जारी की जा चुकी है। इन अधिसूचनाओं में परियोजना के दायरे में आने वाली जमीन का विवरण शामिल है।

पथ निर्माण विभाग के अनुसार, यदि इस साल के अंत तक भूमि अधिग्रहण का अगला चरण शुरू नहीं हो पाता है, तो कुछ मामलों में नए सिरे से अधिसूचना जारी करने की जरूरत पड़ सकती है। इससे परियोजना की प्रक्रिया और लंबी हो सकती है।

भूमि अधिग्रहण के दौरान संबंधित जमीन के मालिकों को जानकारी देना और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होता है। विभाग की चिंता है कि परियोजना की मंजूरी में देरी होने से जमीन अधिग्रहण का काम तय समय पर आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।

 

चार की जगह छह लेन बनाने की मांग

बिहार सरकार ने गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को चार लेन के बजाय छह लेन में विकसित करने का प्रस्ताव रखा है। पथ निर्माण विभाग के अनुसार, इस संबंध में पहले भी केंद्र के सामने मांग रखी गई थी, लेकिन अब तक इस पर सहमति नहीं मिली है।

राज्य सरकार की मांग के पीछे भविष्य में बढ़ने वाले यातायात और बेहतर सड़क संपर्क की जरूरत को ध्यान में रखने की बात कही गई है। छह लेन का प्रस्ताव स्वीकार होने पर परियोजना की डिजाइन और अन्य तकनीकी पहलुओं में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम फैसला संबंधित केंद्रीय स्तर पर होना है।

 

बिहार के आठ जिलों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे

प्रस्तावित गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 568 किलोमीटर बताई जा रही है। इसमें बिहार के हिस्से की लंबाई करीब 417 किलोमीटर होगी। यह मार्ग राज्य के आठ जिलों से होकर गुजरेगा।

इन जिलों में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज शामिल हैं। एक्सप्रेसवे की शुरुआत उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से होगी। इसके बाद यह देवरिया से होते हुए बिहार में प्रवेश करेगा और आगे पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा।

इस मार्ग का उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाना है। सिलीगुड़ी के जरिए पूर्वोत्तर भारत की ओर जाने वाले यात्रियों और मालवाहक वाहनों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यात्रा समय और परिवहन लागत में वास्तविक कमी परियोजना के अंतिम डिजाइन, मार्ग और संचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगी।

 

धार्मिक पर्यटन को भी मिल सकता है बढ़ावा

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से उत्तर बिहार के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है। सीतामढ़ी को माता सीता की जन्मभूमि माना जाता है। यहां मां जानकी मंदिर के निर्माण की योजना भी धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

बेहतर सड़क संपर्क होने पर सीतामढ़ी और उत्तर बिहार के अन्य धार्मिक स्थलों तक पहुंचना आसान हो सकता है। इससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों की आवाजाही को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से आगे असम स्थित कामाख्या मंदिर जाने वाले यात्रियों को भी व्यापक सड़क नेटवर्क का लाभ मिल सकता है। हालांकि, किसी विशेष धार्मिक स्थल तक यात्रा में कितना समय बचेगा, यह अंतिम मार्ग और उससे जुड़ी सड़कों पर निर्भर करेगा।

 

मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगी निर्माण की दिशा

फिलहाल गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना के सामने तीन प्रमुख मुद्दे हैं—केंद्रीय स्तर पर मंजूरी, छह लेन के प्रस्ताव पर सहमति और भूमि अधिग्रहण के अगले चरण की शुरुआत। इन प्रक्रियाओं में देरी होने पर परियोजना की समयसीमा प्रभावित हो सकती है।

बिहार सरकार की ओर से जल्द मंजूरी का आग्रह किया गया है, ताकि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में बाधा न आए। अब देखना होगा कि केंद्र स्तर पर परियोजना को कब स्वीकृति मिलती है और छह लेन की मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है। इसके बाद ही निर्माण की आगे की प्रक्रिया और समयसीमा को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

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