BNT Desk: बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अलग-अलग मामलों में तीन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की है। विभाग की ओर से जारी पत्र में अधिकारियों पर लापरवाही, गलत और भ्रामक प्रतिवेदन देने तथा पद से जुड़े दायित्वों के निर्वहन में अनियमितता के आरोपों का उल्लेख किया गया है। कार्रवाई बांका, अररिया और सारण जिले से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ की गई है। इनमें एक अंचल अधिकारी को निलंबित किया गया है, जबकि एक राजस्व अधिकारी की वेतन वृद्धि पर रोक लगाई गई है। वहीं, एक अन्य अंचल अधिकारी की पेंशन में पांच वर्षों तक 15 प्रतिशत कटौती करने का फैसला लिया गया है। विभाग की ओर से यह कार्रवाई राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर किए जाने की बात कही गई है। विभाग के पत्र में तीनों मामलों में अलग-अलग आरोप और उनके आधार पर की गई कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
बांका के चांदन CO रविकांत कुमार निलंबित
बांका जिले के चांदन के अंचल अधिकारी रविकांत कुमार के खिलाफ विभाग ने सबसे कठोर कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। विभागीय जानकारी के अनुसार, रविकांत कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तारी के बाद विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया। जारी पत्र के अनुसार, रविकांत कुमार को गिरफ्तारी की तारीख से ही निलंबित करने का फैसला किया गया है। सरकारी पद पर रहते हुए रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तारी के बाद निलंबन की कार्रवाई विभागीय स्तर पर की गई है। हालांकि, इस मामले में आरोपों की अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी और विभागीय प्रक्रिया के परिणाम पर निर्भर करेगी। फिलहाल विभाग ने गिरफ्तारी से जुड़ी घटना को आधार बनाते हुए निलंबन का आदेश जारी किया है।
अररिया के नरपतगंज राजस्व अधिकारी पर कार्रवाई
दूसरी कार्रवाई अररिया जिले के नरपतगंज के राजस्व अधिकारी रामउदगार चौपाल के खिलाफ की गई है। विभागीय पत्र के अनुसार, उनके खिलाफ दाखिल-खारिज से जुड़े एक मामले में गलत और भ्रामक प्रतिवेदन के आधार पर कार्रवाई का आरोप लगाया गया है। दाखिल-खारिज भूमि से संबंधित महत्वपूर्ण राजस्व प्रक्रिया है। इसमें भूमि के स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड में परिवर्तन किया जाता है। विभाग के मुताबिक, रामउदगार चौपाल पर गलत और भ्रामक प्रतिवेदन के आधार पर एक मामले को अस्वीकृत करने का आरोप लगाया गया। विभागीय कार्रवाई के तहत उनकी वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई विभागीय जांच में सामने आए आरोपों के आधार पर की गई है। विभाग की ओर से जारी पत्र में मामले से संबंधित आरोपों और दंड का उल्लेख किया गया है।
गलत प्रतिवेदन को लेकर विभाग ने जताई आपत्ति
राजस्व विभाग के कामकाज में अधिकारियों की ओर से तैयार किए जाने वाले प्रतिवेदन का महत्वपूर्ण स्थान होता है। दाखिल-खारिज जैसे मामलों में भूमि से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाती है। ऐसे में विभाग ने अररिया के मामले में गलत और भ्रामक प्रतिवेदन के आधार पर दाखिल-खारिज आवेदन को अस्वीकार किए जाने को गंभीरता से लिया। विभागीय कार्रवाई के तहत वेतन वृद्धि रोकने का निर्णय लिया गया है। इस मामले में विभाग का उद्देश्य अधिकारियों की जवाबदेही तय करना बताया गया है। भूमि से जुड़े मामलों में गलत रिपोर्ट या निर्णय का सीधा असर संबंधित लोगों पर पड़ सकता है। इसी वजह से विभागीय स्तर पर ऐसे मामलों की जांच और कार्रवाई की जाती है।
सारण के CO जयशंकर प्रसाद की पेंशन में कटौती
तीसरी कार्रवाई सारण जिले के अंचल अधिकारी जयशंकर प्रसाद के खिलाफ हुई है। विभागीय पत्र के अनुसार, उन पर नामांतरण रिविजन वाद संख्या 66/99-2000 में पारित आदेश की अवहेलना करने का आरोप लगाया गया है। विभाग के मुताबिक, संबंधित मामले में विक्रेता के नाम से जमाबंदी कायम नहीं रहने के बावजूद नामांतरण के लिए अनुशंसा की गई। इसी मामले को लेकर जयशंकर प्रसाद के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है। इस मामले में विभाग ने उनकी पेंशन में पांच वर्षों तक 15 प्रतिशत कटौती करने का फैसला लिया है। यानी निर्धारित अवधि के दौरान उनकी पेंशन से 15 प्रतिशत राशि की कटौती की जाएगी। पेंशन में कटौती का फैसला सेवा से जुड़े मामले में विभागीय कार्रवाई के तहत लिया गया है। संबंधित आदेश में आरोप और उसके आधार पर तय दंड का उल्लेख किया गया है।\
तीन जिलों के मामलों में अलग-अलग दंड
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से की गई इन तीन कार्रवाइयों में अधिकारियों की भूमिका और मामले की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग दंड निर्धारित किए गए हैं। बांका के चांदन CO रविकांत कुमार को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तारी के बाद निलंबित किया गया है। अररिया के नरपतगंज राजस्व अधिकारी रामउदगार चौपाल के खिलाफ गलत और भ्रामक प्रतिवेदन के आधार पर दाखिल-खारिज मामले को अस्वीकृत करने के आरोप में वेतन वृद्धि रोकने की कार्रवाई हुई है। वहीं, सारण के CO जयशंकर प्रसाद के खिलाफ नामांतरण रिविजन वाद में पारित आदेश की अवहेलना और संबंधित प्रक्रिया में अनुशंसा को लेकर पांच वर्षों तक पेंशन में 15 प्रतिशत कटौती का फैसला किया गया है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर लगातार कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल कई मौकों पर विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की बात कह चुके हैं। सरकार की ओर से कहा जाता रहा है कि आम लोगों को राजस्व एवं भूमि से जुड़ी सेवाएं समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। अधिकारियों और कर्मचारियों से नियमों के अनुसार काम करने की अपेक्षा की जाती है। विभाग का कहना है कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को पद का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। शिकायतों और विभागीय स्तर पर सामने आने वाले मामलों की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इन तीन मामलों में भी विभाग ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उपलब्ध रिकॉर्ड और विभागीय प्रक्रिया के आधार पर अलग-अलग कार्रवाई की है। आगे विभागीय और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत इन मामलों से जुड़े अन्य पहलुओं की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।