बिहार: Dial 112 की निगरानी होगी और मजबूत, SP- SDPO को भी तुरंत मिलेगा अलर्ट; बसों के Panic Button से जुड़ेगा सिस्टम

BNT
By
8 Min Read

BNT Desk: बिहार में आपातकालीन पुलिस सहायता की व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी चल रही है। अब किसी जिले में Dial 112 पर वारदात या किसी आपात स्थिति की सूचना मिलते ही संबंधित SP और SDPO को भी इसकी जानकारी तुरंत मिल सकेगी। इसके लिए Emergency Response Support System (ERSS) की ओर से सभी जिलों के SP और DSP को टैब उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही नई व्यवस्था के लिए सिस्टम के सर्वर को भी तैयार किया जा रहा है।

 

अभी नजदीकी 112 वाहन को भेजी जाती है सूचना

फिलहाल Dial 112 पर शिकायत मिलने के बाद शिकायतकर्ता की लोकेशन के आधार पर सबसे नजदीकी 112 वाहन को टैग किया जाता है। इसके बाद घटना की जानकारी संबंधित 112 वाहन और थानाध्यक्ष को भेजी जाती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यही अलर्ट संबंधित जिले के SP और SDPO तक भी पहुंचेगा। इससे वरिष्ठ अधिकारियों को किसी भी आपात स्थिति की जानकारी शुरुआत से ही मिल सकेगी।

 

जिले के सभी 112 वाहनों की लोकेशन देख सकेंगे SP

नई व्यवस्था के तहत जिले के SP अपने क्षेत्र में चल रहे सभी 112 वाहनों की लोकेशन देख सकेंगे। इससे अधिकारियों को यह जानकारी मिल सकेगी कि कौन-सा वाहन किस स्थान पर मौजूद है। साथ ही यह भी पता चल सकेगा कि वाहन लगातार क्षेत्र में गश्त कर रहा है या लंबे समय से किसी एक स्थान पर खड़ा है। इससे 112 वाहनों की निगरानी और उनकी उपलब्धता पर नजर रखना आसान होगा।

 

घटनास्थल के लिए वाहन रवाना हुआ या नहीं, होगी निगरानी

Dial 112 पर सूचना मिलने के बाद संबंधित वाहन घटनास्थल के लिए रवाना हुआ या नहीं, इसकी भी निगरानी की जा सकेगी। यदि किसी कारण से वाहन मौके के लिए रवाना नहीं होता है या तकनीकी अथवा अन्य समस्या के कारण वहां पहुंचने में परेशानी आती है, तो वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तुरंत संबंधित पुलिसकर्मियों से संपर्क कर सकते हैं। इससे आपात स्थिति में पुलिस की प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

 

हर जिले में खुलेगा Dial 112 का जिला समन्वय केंद्र

बिहार के सभी जिलों में Dial 112 का जिला समन्वय केंद्र खोलने की भी तैयारी है। इन केंद्रों पर DSP रैंक के अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। ये अधिकारी Dial 112 से जुड़ी घटनाओं की लगातार निगरानी करेंगे। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि सूचना मिलने के बाद संबंधित 112 वाहन घटनास्थल के लिए रवाना हुआ है या नहीं और जरूरत के मुताबिक वहां पहुंचा या नहीं।

 

जिला से थाना स्तर तक होगा समन्वय

जिला समन्वय केंद्र में तैनात अधिकारी जरूरत के अनुसार जिला, अनुमंडल और थाना स्तर के पुलिस अधिकारियों से समन्वय करेंगे। किसी घटना में अगर तत्काल अतिरिक्त पुलिस बल या स्थानीय स्तर पर मदद की जरूरत होगी, तो संबंधित अधिकारियों के साथ तालमेल कर कार्रवाई की जा सकेगी। इसका उद्देश्य आपात सूचना मिलने के बाद पुलिस की प्रतिक्रिया में आने वाली परेशानियों को कम करना है।

 

ERSS के लिए अलग पुलिस बल की तैयारी

Emergency Response Support System यानी ERSS के लिए अलग पुलिस बल तैयार करने की भी योजना है। इसके लिए पुलिस मुख्यालय की ओर से 40 DSP, 6,000 इंस्पेक्टर एवं ASI, 17,000 सिपाही और 5,500 चालकों का प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ERSS की व्यवस्था को और विस्तार देने की तैयारी है।

 

सरकारी बसों में लगे Panic Button भी जुड़ेंगे

बिहार में सरकारी बसों को भी Dial 112 के सिस्टम से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। राज्य की सरकारी बसों में चार Panic Button लगाए गए हैं। इनमें एक बटन चालक के पास और तीन यात्रियों की सीटों के पास लगाए गए हैं। इनका उद्देश्य बस में किसी आपात स्थिति के दौरान तुरंत सहायता उपलब्ध कराना है।

 

अभी Panic Button का अलर्ट कमांड सेंटर में पहुंचता है

फिलहाल सरकारी बस में Panic Button दबाने पर संबंधित कमांड सेंटर में अलार्म बजता है। इसके बाद बस के मैनेजर को फोन कर अलार्म और बस की लोकेशन की जानकारी दी जाती है। मैनेजर चालक या कंडक्टर से संपर्क करके स्थिति के बारे में जानकारी लेते हैं। जरूरत पड़ने पर संबंधित थाने को सूचना दी जाती है। इस प्रक्रिया में कई स्तरों पर संपर्क करना पड़ता है।

 

Dial 112 से सीधे जोड़ने का प्रस्ताव

ERSS ने सरकारी बसों में लगे Panic Button की मौजूदा व्यवस्था को Dial 112 से जोड़ने के लिए परिवहन विभाग को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद Panic Button दबाते ही बस की लोकेशन और अलार्म की जानकारी सीधे Dial 112 के सिस्टम तक पहुंच सकेगी। इसके बाद जरूरत के अनुसार बस के सबसे नजदीक मौजूद 112 वाहन को मौके पर भेजा जा सकेगा।

 

Police Didi को भी Dial 112 से जोड़ने की तैयारी

स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थानों और महिलाओं की अधिक आवाजाही वाले स्थानों पर निगरानी करने वाली Police Didi को भी Dial 112 से जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए उन्हें विशेष आपातकालीन डिवाइस उपलब्ध कराने की योजना है। जरूरत पड़ने पर इस डिवाइस के जरिए पुलिस सहायता का समन्वय किया जा सकेगा।

 

हाईवे की 1033 हेल्पलाइन होगी इंटीग्रेट

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की टोल फ्री हेल्पलाइन 1033 को भी Dial 112 से इंटीग्रेट करने की तैयारी है। हाईवे पर किसी आपात स्थिति की सूचना मिलने के बाद उसे पुलिस की आपातकालीन सहायता व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे हाईवे पर होने वाली घटनाओं में पुलिस तक सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया को बेहतर किया जा सकेगा।

 

रेलवे की 139 सेवा भी जुड़ेगी

रेल यात्रियों को आपातकालीन पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के लिए रेलवे की हेल्पलाइन 139 को भी Dial 112 के सिस्टम से जोड़ने की योजना है। इसके जरिए रेल से जुड़ी आपात सूचनाओं को भी पुलिस की आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है।

 

एक सिस्टम से जुड़ेगी अलग-अलग आपात सेवाएं

नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग माध्यमों से मिलने वाली आपात सूचनाओं को एक ही सिस्टम से जोड़ना है। सूचना मिलने के बाद उसकी प्रकृति और लोकेशन के आधार पर नजदीकी पुलिस टीम तक जानकारी पहुंचाई जा सकेगी। SP और SDPO स्तर पर निगरानी, जिला समन्वय केंद्र और अलग-अलग हेल्पलाइन के इंटीग्रेशन से Dial 112 की व्यवस्था को जिला स्तर पर और अधिक केंद्रीकृत और निगरानी आधारित बनाने की तैयारी है।

Share This Article