बिहार: 288 लोगों के खातों में 150 करोड़ की संदिग्ध विदेशी फंडिंग का इनपुट, 119 खातों की जांच पूरी

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BNT Desk: बिहार में करीब 288 लोगों के बैंक खातों में लगभग 150 करोड़ रुपये की संदिग्ध विदेशी फंडिंग से जुड़ा मामला सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद आयकर विभाग ने संबंधित लोगों के बैंक खातों, आय के स्रोत, वित्तीय लेन-देन और चल-अचल संपत्तियों की जांच शुरू की है। शुरुआती पड़ताल में 119 लोगों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा चुकी है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिल सकी है।

 

119 लोगों के वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले गए

जांच के दौरान अब तक 119 लोगों के बैंकिंग और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल किए जाने की बात सामने आई है। इनमें कुछ खातों में असामान्य और बड़े लेन-देन के संकेत मिलने का दावा किया गया है। आयकर विभाग अब इन खातों में जमा रकम और संबंधित लोगों की घोषित आय के बीच अंतर की जांच कर रहा है। साथ ही पिछले वर्षों के Income Tax Returns, बैंक खातों और उपलब्ध संपत्ति के रिकॉर्ड का भी मिलान किया जा रहा है।

 

नेपाल सीमा से लगे जिलों पर फोकस

बताया जा रहा है कि जिन 288 लोगों के खातों में संदिग्ध रकम पहुंचने का इनपुट मिला है, उनमें बड़ी संख्या नेपाल सीमा से सटे बिहार के जिलों से संबंधित है। इसी वजह से जांच एजेंसियां सीमा से जुड़े इलाकों में वित्तीय गतिविधियों को लेकर विशेष रूप से जानकारी जुटा रही हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के खाते में संदिग्ध रकम मिलने का इनपुट अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित व्यक्ति किसी अवैध गतिविधि में शामिल है। अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।

 

छोटी-छोटी रकम ट्रांसफर किए जाने का दावा

जांच में कथित तौर पर एक खास पैटर्न सामने आने की बात कही जा रही है। इसके मुताबिक, किसी एक खाते में बड़ी रकम भेजने के बजाय अलग-अलग लोगों के खातों में छोटी-छोटी रकम ट्रांसफर की गई। एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इन अलग-अलग खातों के पीछे कोई समान स्रोत, मध्यस्थ या संगठित वित्तीय नेटवर्क है। अगर खातों के बीच कोई आपसी कड़ी सामने आती है, तो जांच का दायरा बढ़ सकता है।

 

दिल्ली और पटना में हुई समीक्षा

मामले को देश की वित्तीय और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली में गृह मंत्रालय की बैठक के दौरान बिहार से जुड़े अधिकारियों के साथ इस तरह के इनपुट और वित्तीय आंकड़ों पर चर्चा हुई। बिहार में भी संबंधित विभागों और जांच एजेंसियों के स्तर पर इस मामले की समीक्षा किए जाने की बात सामने आई है।

 

आयकर विभाग कर रहा दस्तावेजों का मिलान

आयकर विभाग की जांच में संबंधित लोगों के वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल के साथ उनकी घोषित आय और बैंक खातों में हुए लेन-देन का मिलान किया जा रहा है। जांच का एक प्रमुख बिंदु यह है कि संदिग्ध रकम किस स्रोत से आई, किस बैंकिंग माध्यम से पहुंची और बाद में उसे कहां ट्रांसफर या इस्तेमाल किया गया। जरूरत पड़ने पर लेन-देन से जुड़े दूसरे खातों और व्यक्तियों की भी जांच की जा सकती है।

 

भारत-नेपाल सीमा के कारण बढ़ी संवेदनशीलता

बिहार की नेपाल से लगती खुली सीमा के कारण सीमावर्ती जिलों में अवैध वित्तीय गतिविधियों और तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर सुरक्षा एजेंसियां नजर रखती हैं। संदिग्ध सीमा-पार लेन-देन मिलने पर संबंधित एजेंसियां उसके स्रोत और लाभार्थियों की जांच कर सकती हैं। विदेशी स्रोत से प्राप्त रकम के मामले में उसकी प्रकृति और उपयोग के आधार पर अलग-अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। यदि जांच में मनी लॉन्ड्रिंग या किसी अन्य अपराध से जुड़ा ठोस साक्ष्य सामने आता है, तो संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

 

जांच के बाद साफ होगी फंडिंग की असली तस्वीर

फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि बैंक खातों में पहुंची रकम का वास्तविक स्रोत क्या था और इन लेन-देन के पीछे कोई संगठित नेटवर्क था या नहीं। 288 लोगों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की जांच और 119 मामलों की शुरुआती पड़ताल के बाद एजेंसियां लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। जब तक जांच पूरी नहीं होती, संदिग्ध फंडिंग से जुड़े लोगों के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रकम का स्रोत क्या था और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।

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