BNT Desk: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर पटना में आज ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) की ओर से ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ निकाला जाएगा। मार्च दोपहर 12 बजे गांधी मैदान स्थित गांधी मूर्ति से शुरू होने की जानकारी दी गई है। संगठन की ओर से इसे वोट चोरी के आरोपों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन बताया गया है। प्रदर्शन के दौरान AISA की ओर से “ज्ञानेश इट्स डन ब्रो!” जैसे नारे लगाए जाने की बात कही गई है। कार्यक्रम में भाकपा माले महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य के शामिल होने की भी उम्मीद जताई गई है।
गांधी मैदान से शुरू होगा मार्च
पटना में प्रस्तावित मार्च गांधी मैदान की गांधी मूर्ति से शुरू होगा। AISA की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए जाएंगे। संगठन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की जा रही है। प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ से जुड़े आरोप हैं। मार्च के दौरान इन मुद्दों को लेकर नारेबाजी और विरोध दर्ज कराने की तैयारी है।
इंडिया ब्लॉक ने भी 2 से 8 अक्टूबर तक प्रदर्शन का ऐलान किया
इसी मुद्दे पर INDIA ब्लॉक की ओर से भी 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में जिला स्तर पर प्रदर्शन और ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ आयोजित करने का ऐलान किया गया है। दिए गए स्रोत के अनुसार, कांग्रेस समेत 19 विपक्षी दलों की ओर से देश के अलग-अलग हिस्सों में मार्च और प्रदर्शन किए जाने की योजना है। जिला स्तर पर मार्च के साथ DM कार्यालय के बाहर भी प्रदर्शन की बात कही गई है। इस कार्यक्रम का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची से जुड़े आरोप हैं।
6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च की योजना
विपक्षी दलों की ओर से 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक ‘सेव डेमोक्रेसी’ मार्च निकालने की योजना भी बताई गई है। इसके तहत विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे। यह फैसला दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई INDIA ब्लॉक की बैठक में लिए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में विपक्षी नेता राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए समय मांगने की योजना बना रहे हैं। स्रोत के अनुसार, 1 नवंबर को दिल्ली में ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर रैली आयोजित करने की भी योजना है। इसके साथ ही विपक्ष की ओर से पांच बड़ी रैलियां आयोजित किए जाने की बात कही गई है।
23 सितंबर की रिपोर्ट के बाद विवाद ने पकड़ा जोर
मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर चल रहा यह विवाद 23 सितंबर को प्रकाशित द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद और चर्चा में आया। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका आरोप था कि आयोग के कुछ फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए और जारी किए गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ कदमों को ‘अनधिकृत और गैरकानूनी’ बताया था। ये आरोप रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों के रुख के रूप में सामने रखे गए हैं।
तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक का भी जिक्र
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों की जानकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को दी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, करीब चार महीने बाद 9 सितंबर को तीनों चुनाव आयुक्तों की पूर्ण बैठक हुई थी। हालांकि इस बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई और उसका क्या निष्कर्ष रहा, इसकी जानकारी रिपोर्ट में सामने नहीं आने की बात कही गई है। इस वजह से चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर कथित मतभेद का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है।
आज पटना में प्रदर्शन पर रहेगी नजर
अब पटना में AISA के ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ के जरिए इस मुद्दे को उठाया जाएगा। गांधी मैदान से शुरू होने वाले मार्च में संगठन के छात्र और समर्थक शामिल होंगे। वहीं, आने वाले दिनों में INDIA ब्लॉक की ओर से जिला स्तर पर प्रस्तावित कार्यक्रमों और 6 अक्टूबर के चुनाव आयोग मार्च पर भी नजर रहेगी। इन प्रदर्शनों के जरिए विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर अपनी आपत्तियां सार्वजनिक करेंगे।