बिहार में 1 करोड़ परिवार बनेंगे उद्यमी! ‘Made in Bihar’ सामान की सरकारी खरीद में मिलेगी प्राथमिकता, हर उद्यमी को 10 लाख की मदद

BNT
By
7 Min Read
10 million families in Bihar to become entrepreneurs! Priority to be given to government procurement of ‘Made in Bihar’ products; each entrepreneur to receive assistance of ₹10 lakh.

BNT Desk : बिहार में उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि 2030 तक राज्य के एक करोड़ परिवारों को उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। पटना के बापू सभागार में मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के चयनित लाभुकों के उन्मुखीकरण और पहली किस्त वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उद्योग, रोजगार और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से जुड़ी कई घोषणाएं कीं। बिहार सरकार की उद्योग नीति में निवेश, उद्यमिता और रोजगार बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

‘Made in Bihar’ सामान को सरकारी खरीद में प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में तैयार होने वाले उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता देने की व्यवस्था की जा रही है। उनके अनुसार, राज्य सरकार की खरीद में बिहार में बने सामान को 25 से 40 प्रतिशत तक प्राथमिकता मिल सकती है।इसका उद्देश्य स्थानीय उद्यमियों और छोटे कारोबारियों को बड़ा बाजार उपलब्ध कराना है। यानी बिहार में तैयार होने वाले स्टील, कपड़े और दूसरे उत्पादों की गुणवत्ता तय मानकों के अनुरूप होने पर सरकारी खरीद में उन्हें प्राथमिकता देने की कोशिश की जाएगी।

दूसरे राज्यों से सामान मंगाने के बजाय बिहार में उत्पादन पर जोर

सरकार का जोर इस बात पर भी है कि जिन सामानों का उत्पादन बिहार में हो सकता है, उन्हें दूसरे राज्यों से मंगाने की जरूरत कम हो। मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर बिहार में साइकिल का उत्पादन संभव है तो उसे दूसरे राज्य से लाकर बेचने के बजाय बिहार में ही तैयार किया जाना चाहिए।इसी तरह दूसरे राज्यों से स्टील या अन्य औद्योगिक सामान तभी खरीदा जाए, जब उसकी जरूरत के मुताबिक उत्पादन बिहार में उपलब्ध न हो। सरकार की औद्योगिक नीतियों में भी राज्य में उत्पादन और निवेश का माहौल मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

50 करोड़ तक के टेंडर में बिहारी उद्यमियों को फायदा

सरकारी योजनाओं के काम में स्थानीय उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए टेंडर व्यवस्था में भी बदलाव की बात कही गई है।मुख्यमंत्री के मुताबिक, 50 करोड़ रुपये तक के सरकारी टेंडर में अगर कोई बिहारी उद्यमी L2, L3 या L4 पर है और L1 की दर पर काम करने को तैयार है, तो उसे काम देने का प्रावधान किया गया है।इस व्यवस्था से स्थानीय कारोबारियों को सरकारी परियोजनाओं में ज्यादा अवसर मिलने की उम्मीद है।

45 हजार नए उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार फिलहाल करीब 45 हजार नए उद्यमियों को तैयार कर रही है। कार्यक्रम के दौरान करीब सात हजार लाभुकों को पहली या अगली किस्त की राशि सीधे भेजे जाने की बात कही गई।इसके लिए राज्य सरकार की ओर से करीब 3,500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के जरिए अलग-अलग वर्गों के युवाओं और लोगों को अपना कारोबार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है।

हर उद्यमी को 10 लाख रुपये तक की मदद

मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत चयनित लाभुकों को अधिकतम 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसमें 5 लाख रुपये अनुदान और 5 लाख रुपये ऋण के रूप में शामिल हैं।चयनित लाभुकों में अनुसूचित जाति-जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग, महिलाओं, युवाओं और अल्पसंख्यक वर्ग के उद्यमी शामिल हैं। योजना का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि लोगों को अपना कारोबार शुरू करने और रोजगार देने के लिए तैयार करना है।

44 हजार उद्यमी रोजगार देंगे तो लाखों को मिलेगा काम

सरकार का अनुमान है कि अगर करीब 44 हजार उद्यमी औसतन पांच लोगों को भी रोजगार देते हैं, तो लगभग ढाई लाख लोगों को सीधे रोजगार मिल सकता है।सरकार के मुताबिक, छोटे कारोबार और एमएसएमई को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करना पलायन कम करने की दिशा में भी अहम कदम हो सकता है।

पलायन रोकने पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार से बड़ी संख्या में लोग मजदूरी और रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। सरकार का लक्ष्य राज्य में ही उद्योग और रोजगार के अवसर बढ़ाकर इस पलायन को कम करना है।इसके लिए एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने, नए उद्यमियों को तैयार करने और सरकारी खरीद में स्थानीय उत्पादों को जगह देने पर जोर दिया जा रहा है।

‘Made in Bihar’ को बाजार देने की तैयारी

उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने भी उद्यमिता को बिहार की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि राज्य की बड़ी आबादी और युवा शक्ति को रोजगार और कारोबार के अवसरों से जोड़ा जा सकता है।सरकार की औद्योगिक योजनाओं में निवेश, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने पर भी जोर है।

‘One District, One Product’ को मिलेगा बढ़ावा

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री क्लस्टर विकास योजना 2026 का भी लोकार्पण किया गया। इसके तहत ‘One District, One Cluster’ और ‘One District, One Product’ को बढ़ावा देने की योजना है।इसका उद्देश्य अलग-अलग जिलों में मौजूद स्थानीय उत्पादों और कारोबार की पहचान कर उन्हें संगठित तरीके से विकसित करना है। इससे स्थानीय उद्योगों को बाजार, उत्पादन और रोजगार के स्तर पर आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।

2030 तक बिहार की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर फोकस

बिहार सरकार आने वाले वर्षों में उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में बड़े बदलाव का लक्ष्य लेकर चल रही है। मुख्यमंत्री पहले भी 2030 तक राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाने और युवाओं को बाहर जाने से रोकने की बात कह चुके हैं।अब एक करोड़ परिवारों को उद्यमिता से जोड़ने, Made in Bihar उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता देने और छोटे कारोबारियों को आर्थिक सहायता देने की घोषणाओं के जरिए सरकार ने स्थानीय कारोबार को बढ़ाने का रोडमैप सामने रखा है।

अगर इन योजनाओं को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में बिहार के छोटे कारोबार, स्थानीय उत्पादन और रोजगार के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

Share This Article