लैंड फॉर जॉब मामला: कोर्ट में आज अहम पेशी, क्या लालू यादव की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं?

नौकरी के बदले जमीन मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट आज सुनवाई करेगी। लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी पेश हो सकते हैं। कोर्ट ने इसे 'आपराधिक गिरोह' की तरह रची गई साजिश बताया है। 9 मार्च से रोजाना सुनवाई होगी, जिसमें संपत्तियों के अवैध हस्तांतरण पर आरोप तय किए जाएंगे

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BNT Desk: लैंड फॉर जॉब (जमीन के बदले नौकरी) घोटाला मामला अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई लालू परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आइए जानते हैं इस मामले के मुख्य बिंदु और वर्तमान स्थिति।

अदालत में लालू परिवार की पेशी

कोर्ट के आदेश के अनुसार, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी दिल्ली पहुंच चुके हैं। आज की सुनवाई में उनके व्यक्तिगत रूप से पेश होने की संभावना है। पिछली सुनवाई में लालू यादव व्हीलचेयर पर अदालत पहुंचे थे, जहां उन्होंने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि वे ‘ट्रायल’ (मुकदमे) का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

9 मार्च से शुरू होगी रोजाना सुनवाई

कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 9 मार्च से डे-टू-डे (प्रतिदिन) सुनवाई करने का फैसला किया है। आज से कोर्ट में आरोपियों पर आरोप (Charges) तय करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सकती है। लालू यादव दिल्ली दौरे के दौरान अपनी सेहत का रूटीन चेकअप भी कराएंगे।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘एक गिरोह की तरह काम’

बीती 29 जनवरी को सुनवाई के दौरान स्पेशल जज विशाल गोगने ने बहुत कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि यह पूरा परिवार एक ‘आपराधिक गिरोह’ की तरह काम कर रहा था। कोर्ट के अनुसार, सरकारी नौकरियों को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया ताकि लोगों से जमीनें हड़पी जा सकें और उन्हें परिवार के सदस्यों के नाम कराया जा सके।

CBI की चार्जशीट और मुख्य आरोप

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच में पाया है कि मामला सिर्फ गलत तरीके से नौकरी देने तक सीमित नहीं है। इसमें कई गंभीर बिंदु शामिल हैं:

  1. नौकरी के बदले जमीन का ट्रांसफर।
  2. जमीनों की कीमतों में भारी विसंगति।
  3. करीबियों और रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियों का हस्तांतरण।
  4. संदिग्ध व्यावसायिक लेन-देन।

आरोप तय होना और आगे की राह

हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आरोप तय होने का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं है। कानूनी प्रक्रिया के तहत बचाव पक्ष (लालू परिवार) को CBI के सबूतों को चुनौती देने का पूरा मौका मिलेगा। कोर्ट ने CBI को भी निर्देश दिया है कि वे अभियोजन से जुड़ी कागजी कार्रवाई को जल्द पूरा करें।

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