कौन हैं IPS एम. सुनील नायक? पूर्व सांसद केस में गिरफ्तारी की कोशिश, पटना कोर्ट से मिली राहत

आंध्र प्रदेश पुलिस ने पटना में बिहार के आईजी एम. सुनील नायक को गिरफ्तार करने की कोशिश की, लेकिन पटना सिविल कोर्ट ने ट्रांजिट रिमांड देने से मना कर दिया। कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट और केस डायरी न होने पर पुलिस को फटकार लगाई। मामला 2021 में एक पूर्व सांसद के साथ मारपीट और हत्या के प्रयास से जुड़ा है।

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BNT Desk: बिहार में तैनात वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एम. सुनील नायक और आंध्र प्रदेश पुलिस के बीच पटना में चले ‘हाई-वोल्टेज ड्रामा’ ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। गिरफ्तारी की कोशिश और फिर कोर्ट से मिली फौरी राहत तक, यहाँ इस पूरे मामले का विस्तृत विवरण दिया गया है:

आईपीएस सुनील नायक केस: पटना में गिरफ्तारी की कोशिश, कोर्ट ने लगाई रोक

बिहार कैडर के 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी एम. सुनील नायक पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी, जब सोमवार को आंध्र प्रदेश पुलिस की एक विशेष टीम पटना पहुंची। शास्त्री नगर स्थित उनके सरकारी आवास पर टीम ने उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लेने की कोशिश की, लेकिन कानूनी दांवपेच के कारण पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा।

कोर्ट की फटकार और मिली राहत

आंध्र प्रदेश पुलिस जब सुनील नायक को गिरफ्तार करने के लिए पटना सिविल कोर्ट पहुंची, तो वहां स्थिति उनके पक्ष में नहीं रही। कोर्ट ने पुलिस की ट्रांजिट रिमांड की अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि टीम के पास न तो गिरफ्तारी वारंट था और न ही अपडेटेड केस डायरी। कोर्ट ने पुलिस की इस अधूरी तैयारी पर नाराजगी जताई, जिससे फिलहाल सुनील नायक को बड़ी राहत मिल गई है।

विवाद की जड़: 2021 का नरसापुरम केस

यह पूरा मामला मई 2021 का है, जब सुनील नायक प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर आंध्र प्रदेश सीआईडी में तैनात थे। उस समय नरसापुरम के तत्कालीन सांसद के. रघुराम कृष्णा राजू को गिरफ्तार किया गया था। पूर्व सांसद का आरोप है कि हिरासत के दौरान उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई और उन्हें जान से मारने की कोशिश (धारा 307) की गई। इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी और सुनील नायक समेत कई अफसरों को आरोपी बनाया गया है।

कौन हैं एम. सुनील नायक?

एम. सुनील नायक मूल रूप से आंध्र प्रदेश के गुंटूर के रहने वाले हैं। 2005 में आईपीएस बनने के बाद उन्हें बिहार कैडर मिला। बिहार में वे कई जिलों में एसपी के पद पर रहे और अपनी सख्त छवि के लिए पहचाने जाते हैं। साल 2019 में वे निजी कारणों से तीन साल के लिए आंध्र प्रदेश गए थे, जहां सीआईडी में डीआईजी के पद पर रहने के दौरान यह विवादित घटना हुई।

क्या होगा अगला कदम?

भले ही पटना सिविल कोर्ट से फिलहाल उन्हें राहत मिल गई है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। आंध्र प्रदेश पुलिस कानूनी कमियों को दूर कर दोबारा कार्रवाई की कोशिश कर सकती है। वहीं, सुनील नायक का पक्ष अब अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) या एफआईआर रद्द करवाने के लिए उच्च न्यायालय का रुख कर सकता है।

 

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