BNT Desk: बिहार में 42 विधायकों को पटना हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है। चुनावी नामांकन के दौरान कथित तौर पर गलत दस्तावेज देने के आरोपों ने सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों खेमों में हलचल पैदा कर दी है। इस संवेदनशील मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक रणविजय साहू ने अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया देते हुए सरकार और प्रशासन पर जमकर निशाना साधा है।
न्यायालय के नोटिस पर आरजेडी का रुख
रणविजय साहू ने स्पष्ट किया कि विधायकों को नोटिस मिलना पूरी तरह से माननीय न्यायालय का विषय है। उन्होंने कहा कि जिन्हें भी नोटिस मिला है, वे सभी सदन के सम्मानित सदस्य हैं और वे कानून के दायरे में रहकर अपना पक्ष रखेंगे। साहू ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी का न्यायपालिका में पूर्ण विश्वास है और उन्हें उम्मीद है कि न्यायालय से ही दूध का दूध और पानी का पानी होगा।
“वोट चोरी” और निर्वाचन आयोग की भूमिका
वोटों की हेराफेरी और नामांकन में गड़बड़ी के आरोपों पर विधायक ने निर्वाचन आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरजेडी ने चुनाव के दौरान इन शिकायतों को राज्य और मुख्य निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रमुखता से उठाया था, लेकिन उस समय उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया। अब जब हाईकोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लिया है, तो विपक्ष इसे निष्पक्ष न्याय की दिशा में एक बड़ी उम्मीद मान रहा है।
प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा पर सवाल
रणविजय साहू ने नगर विकास विभाग को आड़े हाथों लेते हुए पटना में एक बच्ची की मौत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि खुले नाले की वजह से मासूम की जान जाना सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता है। इसके साथ ही उन्होंने गृह विभाग के बजट पर चर्चा करते हुए सम्राट चौधरी को घेरा और मांग की कि सरकार को प्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
अपराध और नीतिश छात्र मामला
बिहार की सुरक्षा स्थिति पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में अपराधियों का बोलबाला है और आम जनता ‘भगवान भरोसे’ जी रही है। उन्होंने नीतिश छात्र मामले का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि केस सीबीआई को ट्रांसफर होने के बावजूद पीड़ित परिवार को धमकियां मिल रही हैं और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।