BNT Desk: बिहार के मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई हालिया समीक्षा बैठक ने राज्य के खेल परिदृश्य को पूरी तरह बदलने का रोडमैप तैयार कर दिया है। सरकार का मुख्य ध्यान अब खेलों में पारदर्शिता, सुरक्षा और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर है।
सुरक्षा और निगरानी: हर स्टेडियम पर होगी नज़र
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि अब बिहार के सभी पंचायत स्तर के खेल परिसरों और आउटडोर स्टेडियमों में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य खेल मैदानों में सुरक्षा सुनिश्चित करना और गतिविधियों में पारदर्शिता लाना है। साथ ही, खेल क्लबों के संचालन को संस्थागत रूप दिया जाएगा ताकि उनकी प्रगति की नियमित समीक्षा हो सके।
PPP मॉडल: निजी क्षेत्र के साथ बढ़ेगा तालमेल
बिहार में खेल विकास को गति देने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) पर विशेष जोर दिया गया है। मुख्य सचिव ने स्थानीय उद्योगों को खेल गतिविधियों से जोड़ने और युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक स्पष्ट नीतिगत ढांचा तैयार करने का निर्देश दिया। इससे राज्य में खेलों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा और फंड उपलब्ध हो सकेगा।
जमीनी जवाबदेही और सामग्री की खरीद में पारदर्शिता
खेलों में भ्रष्टाचार रोकने और जवाबदेही तय करने के लिए कुछ कड़े कदम उठाए गए हैं:
- टैगिंग व्यवस्था: हर खेल क्लब के साथ जिला खेल पदाधिकारी, प्रशिक्षक और शारीरिक शिक्षकों को सीधे तौर पर जोड़ा जाएगा।
- सामग्री की खरीद: खेल सामग्री की खरीद में किसी एक कंपनी का एकाधिकार खत्म करने के लिए ‘ओपन कॉल’ के जरिए विक्रेताओं को सूचीबद्ध किया जाएगा।
- प्राइस कैपिंग: खेल सामग्री की अधिकतम कीमत (Maximum Price) तय की जाएगी ताकि राज्य भर के क्लबों को समान और सही दर पर गुणवत्तापूर्ण सामान मिल सके और शोषण की गुंजाइश न रहे।
एकलव्य केंद्र और हाफ मैराथन का आयोजन
बैठक में राज्य के 27 एकलव्य केंद्रों के कामकाज पर संतोष व्यक्त किया गया और बाकी बचे केंद्रों को जल्द शुरू करने का आदेश दिया गया। इसके अलावा, बिहार में खेलों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हर साल नवंबर और फरवरी में हाफ मैराथन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है, जिसकी शुरुआत इसी नवंबर से होगी।