कैशलेस इलाज पर बिहार विधानसभा में गरमाई राजनीति, स्वास्थ्य सुविधा पर सरकार से जवाब मांगते दिखे विधायक

बिहार विधानसभा में विधायकों और पूर्व विधायकों के लिए कैशलेस इलाज की मांग तेज हुई। भाजपा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने मुद्दा उठाया। उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार सुझावों पर विचार करेगी। विधानसभा अध्यक्ष ने एक सप्ताह में बैठक बुलाकर फैसला लेने का निर्देश दिया। सदन में इस मुद्दे पर बहस तेज रही।

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BNT Desk: बिहार विधानसभा के अंदर विधायकों और पूर्व विधायकों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया। भाजपा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने सरकार से मांग की कि मौजूदा विधायक, पूर्व विधायक, पदाधिकारी, सेवानिवृत्त कर्मचारी और उनके आश्रितों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा जरूरी है।

उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का जवाब

इस मुद्दे पर उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर CGHS जैसी सुविधा चाहिए तो राज्य सरकार उस पर विचार कर सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार की स्वास्थ्य सुविधा CGHS से बेहतर है। सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार इस मामले में सकारात्मक है और अच्छे सुझावों का स्वागत करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर सभी सदस्य कैशलेस इलाज की सुविधा चाहते हैं तो सरकार इस पर सहमत है और आगे कार्रवाई करेगी।

विधानसभा अध्यक्ष का निर्देश

विधानसभा अध्यक्ष ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सरकार को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के अंदर बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर निर्णय लिया जाए। इससे साफ है कि सरकार पर इस मामले में जल्द फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है।

सरकार पर बढ़ा दबाव, विधायकों ने उठाए सवाल

कैशलेस इलाज के मुद्दे पर सरकार थोड़ी असहज नजर आई। कई भाजपा विधायकों ने इस पर गंभीर सवाल उठाए। प्रभारी मंत्री ने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है और प्रक्रियाओं को जल्द ठीक किया जाएगा। लेकिन कई विधायक इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने कहा कि सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा, ठोस कार्रवाई जरूरी है। इसको लेकर सदन में कुछ समय तक हलचल और बहस जारी रही।

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