BNT Desk: बिहार में साइबर अपराधियों का जाल लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने पटना और शेखपुरा जिले के कई ठिकानों पर छापेमारी कर एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने अलग-अलग जगहों से कुल 27 जालसाजों को गिरफ्तार किया है। ये ठग पिछले चार सालों से लोगों की गाढ़ी कमाई लूट रहे थे। जांच में सामने आया है कि इन्होंने अब तक लगभग 500 लोगों से 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की है। पुलिस को मौके से भारी मात्रा में स्मार्टफोन, लैपटॉप, फर्जी सिम कार्ड और कई डिजिटल उपकरण बरामद हुए हैं।
कैसे बिछाते थे ठगी का जाल?
ये साइबर ठग बेहद शातिर तरीके से काम करते थे। ये लोग गूगल और अन्य सोशल मीडिया साइट्स से आम लोगों के मोबाइल नंबर निकालते थे। इसके बाद, पटना के दानापुर और रूपसपुर जैसे इलाकों में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर से लोगों को फोन किया जाता था। ये ठग खुद को सरकारी सेवा केंद्र या बैंक का कर्मचारी बताकर लोगों को मोबाइल रिचार्ज, रेल-हवाई टिकट बुकिंग, आधार अपडेट और डिजिटल सेवाओं का झांसा देते थे। विश्वास जीतने के लिए इस गैंग में महिला कर्मियों को भी रखा गया था, जो अपनी मीठी बातों से लोगों को फंसा लेती थीं।
लोन के नाम पर लूट का नया तरीका
शेखपुरा जिले में चल रहा गैंग ‘इंस्टेंट लोन’ के नाम पर लोगों को निशाना बना रहा था। ये लोग जरूरतमंदों को मोबाइल ऐप के जरिए आसानी से लोन दिलाने का लालच देते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति लोन के लिए तैयार होता, उससे प्रोसेसिंग फीस, केवाईसी चार्ज और फाइल चार्ज के नाम पर ऑनलाइन पैसे मंगवा लिए जाते थे। एक बार पैसे मिलने के बाद, ठग उस व्यक्ति का नंबर ब्लॉक कर देते थे। इस तरह पीड़ित को न तो लोन मिलता था और न ही उसके पैसे वापस आते थे।
EOU की जनता से अपील: सतर्क रहें
आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने आम नागरिकों को चेतावनी दी है कि वे किसी भी अनजान कॉल या मैसेज के झांसे में न आएं। पुलिस ने साफ कहा है कि कोई भी बैंक या सरकारी संस्था फोन पर पैसे की मांग नहीं करती। अगर आपको किसी संदिग्ध नंबर से कॉल आता है या कोई आपको बिना किसी गारंटी के लोन देने का वादा करता है, तो तुरंत अपने नजदीकी थाने या साइबर पुलिस को इसकी सूचना दें। आपकी एक छोटी सी सावधानी आपको बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है।