BNT Desk: पटना के शम्भू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। पुलिस की सुस्ती और प्रशासन के रवैये से नाराज लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। छात्रा को न्याय दिलाने के लिए ‘ऐपवा’ (AIPWA) के नेतृत्व में ‘बेटी बचाओ न्याय यात्रा’ की शुरुआत की गई है। यह यात्रा छात्रा के गांव पतियावां से शुरू होकर जहानाबाद के अरवल मोड़ पहुंची, जहाँ एक बड़ी जनसभा हुई।
सरकार के नारों पर उठे सवाल, पुलिस पर गंभीर आरोप
इस न्याय यात्रा में शामिल महिलाओं ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर जमकर नारेबाजी की। जनसभा को संबोधित करते हुए ऐपवा नेताओं ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि बिहार में नई सरकार बने अभी तीन महीने भी नहीं हुए हैं, लेकिन बेटियों के खिलाफ अपराध बढ़ते जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा तो देती है, लेकिन असलियत में पढ़ने वाली बेटियां ही सुरक्षित नहीं हैं। नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन अपराधियों को सजा देने के बजाय उन्हें बचाने की कोशिश कर रहा है।
“पुलिस जाँच करे, जज न बने” – जाँच के तरीके पर भड़कीं महिलाएं
आंदोलनकारियों ने सबसे ज्यादा नाराजगी पुलिस की कार्यप्रणाली पर जताई। उनका कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले ही पुलिस ने जल्दबाजी में फैसला सुना दिया और किसी भी गलत हरकत की आशंका को खारिज कर दिया। वक्ताओं ने कहा, “पुलिस का काम निष्पक्ष जांच करना है, जज बनकर फैसला सुनाना नहीं।” आरोप लगाया जा रहा है कि किसी रसूखदार इंसान को बचाने के लिए पुलिस मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मांग की गई है कि वे इस मामले में दखल दें।
10 तारीख को विधानसभा घेराव की तैयारी
यह इंसाफ की लड़ाई अब सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं रहने वाली है। ऐपवा ने ऐलान किया है कि यह यात्रा मगध के अलग-अलग जिलों जैसे नालंदा, नवादा, गया, औरंगाबाद और अरवल से होते हुए 9 तारीख को पटना पहुंचेगी। इसके बाद 10 तारीख को बिहार विधानसभा का घेराव किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों की साफ मांग है कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI से कराई जाए। जैसे-जैसे यह मार्च आगे बढ़ रहा है, प्रशासन की चिंताएं भी बढ़ती जा रही हैं।