CM नीतीश के बेटे की सादगी: बिना किसी सुरक्षा के ई-रिक्शा में घूमे निशांत कुमार, हवाई चप्पल में देख दंग रह गए लोग

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की सादगी ने सबका ध्यान खींचा है। हाल ही में वे बिना किसी सुरक्षा या वीआईपी प्रोटोकॉल के, पैरों में हवाई चप्पल पहनकर ई-रिक्शा से वृंदावन की गलियों में घूमते नजर आए। सत्ता से दूर उनका यह जमीन से जुड़ा अंदाज अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

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BNT Desk: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भले ही दशकों से सत्ता के शिखर पर हों, लेकिन उनके बेटे निशांत कुमार एक बार फिर अपनी सादगी की वजह से चर्चा का केंद्र बन गए हैं। बुधवार को वृंदावन की गलियों में एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। निशांत कुमार वहां बिना किसी VIP तामझाम, सुरक्षा घेरे या महंगी गाड़ियों के, एक आम इंसान की तरह घूमते नजर आए। उन्होंने पैरों में सामान्य हवाई चप्पल पहनी थी और वे ई-रिक्शा में बैठकर मंदिरों के दर्शन करने निकले थे।

बिना किसी VIP प्रोटोकॉल के पहुंचे मंदिर

अक्सर देखा जाता है कि रसूखदार परिवारों के लोग भारी-भरकम सुरक्षा और गाड़ियों के काफिले के साथ चलते हैं, लेकिन निशांत कुमार ने इन सब से दूरी बनाए रखी। वृंदावन यात्रा के दौरान उन्होंने किसी भी तरह के विशेष प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। वे साधारण कपड़ों और हवाई चप्पल में ई-रिक्शा पर सवार होकर सड़कों पर निकले। उन्हें इस तरह आम लोगों के बीच घुलते-मिलते देख वहां मौजूद श्रद्धालु और स्थानीय लोग दंग रह गए। उनकी यह सादगी अब सोशल मीडिया पर खूब तारीफ बटोर रही है।

सत्ता के बीच रहकर भी सादगी की मिसाल

निशांत कुमार चाहते तो उन्हें देश के किसी भी हिस्से में कड़ी सुरक्षा और सरकारी सुविधाएं मिल सकती थीं। मुख्यमंत्री का बेटा होने के नाते उनके पास हर सुख-सुविधा मौजूद है, लेकिन उन्होंने कभी इनका इस्तेमाल नहीं किया। वे शुरू से ही खुद को दिखावे और राजनीति की चकाचौंध से दूर रखते आए हैं। वृंदावन की यह तस्वीरें बताती हैं कि इंसान अगर चाहे तो सत्ता के करीब रहकर भी जमीन से जुड़ा रह सकता है। उनकी यही सादगी लोगों के दिलों को छू रही है।

नीतीश कुमार की छवि को मिली मजबूती

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निशांत का यह व्यवहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उस छवि को और मजबूत करता है, जिसमें वे पद के दुरुपयोग से दूर रहने के लिए जाने जाते हैं। सार्वजनिक जीवन में रहते हुए मर्यादा और सादगी कैसे बरकरार रखी जाती है, निशांत कुमार इसका एक बड़ा उदाहरण बन गए हैं। यह उन लोगों के लिए भी एक संदेश है जो पद मिलते ही खुद को जनता से ऊपर समझने लगते हैं। उनकी इस यात्रा ने साबित कर दिया कि सादगी ही सबसे बड़ा गहना है।

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