BNT Desk: बिहार के भागलपुर में मंगलवार सुबह मानवता को सलाम करने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ के विक्रमशिला सेतु पर अपनी जान देने जा रही एक महिला और उसके दूधमुँहे बच्चे के लिए एक पुलिस अधिकारी ‘देवदूत’ बनकर आए। नवगछिया में तैनात सब-इंस्पेक्टर सिकंदर पासवान ने अपनी सूझबूझ और फुर्ती से एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया और माँ-बेटे को नई जिंदगी दी।
गश्त के दौरान जब थम गईं सांसें
यह पूरी घटना मंगलवार सुबह की है, जब डायल 112 की टीम रूटीन गश्त पर निकली थी। सब-इंस्पेक्टर सिकंदर पासवान अपनी टीम के साथ विक्रमशिला सेतु से गुजर रहे थे। तभी उनकी नज़र पुल की रेलिंग के पास खड़ी एक महिला पर पड़ी। महिला की गोद में एक छोटा बच्चा था और वह बुरी तरह कांप रही थी। उसकी हरकतों को देखकर पुलिस अधिकारी को कुछ शक हुआ और उन्होंने तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई।
मौत के मुँह से खींच लिया जीवन
जैसे ही सिकंदर पासवान महिला के पास पहुँचे, उन्होंने देखा कि महिला गंगा की लहरों की ओर झुक रही थी और छलांग लगाने ही वाली थी। हालात की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने बिना एक पल गंवाए झपट्टा मारकर मासूम बच्चे को महिला की गोद से खींच लिया और उसे अपने सीने से लगा लिया। बच्चे के सुरक्षित होते ही उन्होंने महिला को भी पकड़ लिया और उसे रेलिंग से दूर खींच लाए। पुलिस की इस फुर्ती ने माँ और बेटे, दोनों को मौत के मुँह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
क्यों उठाना चाहती थी ऐसा खौफनाक कदम?
पूछताछ में सामने आया कि महिला किसी गहरी मानसिक परेशानी या घरेलू तनाव में थी, जिसके कारण वह अपनी और अपने बच्चे की जान लेना चाहती थी। पुलिस ने मौके पर ही महिला को ढांढस बंधाया और उसे सुरक्षित स्थान पर ले गए। सिकंदर पासवान की इस बहादुरी और संवेदनशीलता की अब पूरे इलाके में चर्चा हो रही है। लोग कह रहे हैं कि अगर कुछ सेकंड की भी देरी होती, तो आज एक हँसता-खेलता परिवार खत्म हो गया होता।
बहादुरी को मिल रहा है सलाम
सोशल मीडिया पर भी लोग सब-इंस्पेक्टर सिकंदर पासवान की जमकर तारीफ कर रहे हैं। जिस तरह उन्होंने अपनी ड्यूटी निभाते हुए एक माँ और बच्चे की जान बचाई, वह पुलिस के मानवीय चेहरे की एक बेहतरीन मिसाल है। नवगछिया पुलिस ने भी अपने जांबाज अधिकारी की इस कामयाबी पर गर्व जताया है।