अरवल में देखते-देखते ढह गया पुल, मच गई चीख-पुकार; हादसे में 5 घायल, सुरक्षा पर उठे सवाल

अरवल के कुर्था में निर्माणाधीन पुल गिरने से 5 ग्रामीण घायल हो गए, जिनमें 2 की हालत गंभीर है। सुरक्षा मानकों और बेरिकेटिंग की कमी के कारण यह हादसा हुआ, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। फिलहाल घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है और प्रशासन मामले की जांच कर रहा है।

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BNT Desk: बिहार के अरवल जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ कुर्था प्रखंड के राजेपुर गांव में रविवार को एक निर्माणाधीन पुल अचानक गिर गया। इस हादसे में वहां मौजूद 5 ग्रामीण मलबे की चपेट में आने से घायल हो गए। घायलों में से दो की स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया है। घटना के बाद से ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है और स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी गुस्सा देखा जा रहा है।

कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के मुताबिक, राजेपुर गांव में ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से पुराने पुल को तोड़कर नए पुल का निर्माण कराया जा रहा था। रविवार को जब पुराने पुल को तोड़ने का काम चल रहा था, तभी गांव के कुछ लोग वहां काम देखने के लिए जमा थे। इसी दौरान पुल का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर गिर पड़ा। प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद इकबाल अंसारी ने बताया कि सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। लाल पंडित, रामप्रीत यादव और जैन अंसारी समेत पांच लोग सीधे मलबे के नीचे दब गए।

घायलों की स्थिति और रेस्क्यू

हादसे के तुरंत बाद ग्रामीणों ने बहादुरी दिखाते हुए खुद ही बचाव कार्य शुरू किया और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला। सभी घायलों को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कुर्था ले जाया गया। वहां के डॉक्टरों ने लाल पंडित और रामप्रीत यादव की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद अरवल सदर अस्पताल भेज दिया है। बाकी तीन लोगों का इलाज अभी स्थानीय अस्पताल में ही चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते लोग मदद के लिए नहीं दौड़ते, तो जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता था।

सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर फूटा गुस्सा

इस पूरी घटना ने निर्माण कार्य में हो रही लापरवाही को उजागर कर दिया है। ग्रामीण नागेंद्र यादव और अन्य लोगों का आरोप है कि ठेकेदार ने सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए थे। कार्यस्थल पर न तो बेरिकेटिंग की गई थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था। लोगों का कहना है कि अगर वहां घेराबंदी होती, तो कोई भी पुल के इतने करीब नहीं जाता। दूसरी ओर, ठेकेदार कौशल किशोर शर्मा का कहना है कि कुछ लोग पुल से निकल रहे सरिया को देखने के चक्कर में पास खड़े थे, तभी यह हादसा हो गया।

प्रशासनिक जांच और तनाव

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल गांव में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लोग विभाग और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि आखिर बिना सुरक्षा मानकों के इतना बड़ा काम कैसे चल रहा था? अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस लापरवाही पर क्या कड़े कदम उठाता है।

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