वकील से जज तक का सफर; पटना के अंशुल राज बने हाई कोर्ट के नए न्यायाधीश

पटना के वरिष्ठ वकील अंशुल राज को पटना हाई कोर्ट का नया जज नियुक्त किया गया है। वे दिग्गज वकील योगेश चंद्र वर्मा के पुत्र और राहुल गांधी के वकील रह चुके हैं। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्रीय कानून मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।

BNT
By
3 Min Read

BNT Desk: पटना हाई कोर्ट को नया जज मिल गया है। राजधानी के जाने-माने वरिष्ठ वकील अंशुल राज अब पटना हाई कोर्ट में जज की जिम्मेदारी संभालेंगे। शुक्रवार देर रात केंद्रीय कानून मंत्रालय ने उनकी नियुक्ति का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया। अंशुल राज न केवल अपनी कानूनी समझ के लिए जाने जाते हैं, बल्कि वे पटना के दिग्गज वकील योगेश चंद्र वर्मा के बेटे भी हैं। इस खबर के बाद कानूनी गलियारों में खुशी की लहर है और जल्द ही उनका शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा।

राहुल गांधी के वकील से हाईकोर्ट जज तक का सफर

अंशुल राज का नाम बिहार के कानूनी हलकों में काफी सम्मान से लिया जाता है। वह पटना में कई बड़े केस लड़ चुके हैं और खास बात यह है कि वे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बिहार में वकील भी रहे हैं। उनकी काबिलियत को देखते हुए हाई कोर्ट कॉलेजियम ने उनके नाम की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट को भेजी थी। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनकी नियुक्ति पर अंतिम मुहर लगाई। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया पर इस फैसले की जानकारी देते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी की बधाई दी।

पिता का नाम और परिवार में जश्न का माहौल

अंशुल राज की इस कामयाबी के पीछे उनके पिता योगेश चंद्र वर्मा का बड़ा हाथ माना जाता है। योगेश चंद्र वर्मा खुद पटना हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में बिहार स्टेट बार काउंसिल के सदस्य हैं। एक पिता के लिए इससे गर्व की बात क्या होगी कि उनका बेटा भी उसी अदालत में जज बन गया है जहाँ उन्होंने सालों वकालत की। योगेश वर्मा ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए इसे मेहनत और ईमानदारी का फल बताया है।

कैसे होती है हाई कोर्ट में जज की नियुक्ति?

आपको बता दें कि हाई कोर्ट का जज बनना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए कम से कम 10 साल तक हाई कोर्ट या अन्य अदालतों में वकालत का अनुभव जरूरी है। प्रक्रिया के अनुसार, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाला कॉलेजियम योग्य वकीलों के नाम सरकार को भेजता है। सरकार इन नामों की जांच (रिव्यू) करने के बाद इन्हें राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पास भेजती है। जब सभी स्तरों पर कानूनी समझ और प्रतिष्ठा की पुष्टि हो जाती है, तब जाकर जज की नियुक्ति की जाती है।

Share This Article