BNT Desk: दो साल का कार्यकाल पूरा होने के बावजूद सांसद निधि (एमपी फंड) से एक भी रुपये का उपयोग न करने वाले छह सांसदों के नाम हाल ही में सामने आए हैं। इस सूची में देश की सबसे युवा सांसदों में शामिल और समस्तीपुर से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शांभवी चौधरी का नाम भी है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और विपक्ष लगातार उनके कामकाज पर सवाल उठा रहा है।
समस्तीपुर दौरे में दिया विवादित बयान
मंगलवार को एक कार्यक्रम में शामिल होने समस्तीपुर पहुंचीं सांसद शांभवी चौधरी से जब पत्रकारों ने एमपी फंड खर्च न किए जाने को लेकर सवाल पूछा, तो उनका जवाब चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने साफ कहा कि एमपी फंड खर्च करना उनका अधिकार है और वह इसे विपक्ष की मर्जी से खर्च नहीं करेंगी। उनका कहना था कि यह फंड विकास के लिए है और इसके उपयोग का फैसला उनके पार्टी और एनडीए कार्यकर्ताओं की सहमति से होगा।
कार्यकर्ताओं की भूमिका पर जोर
शांभवी चौधरी ने कहा कि जब उनके कार्यकर्ताओं के बीच यह तय हो जाएगा कि किस क्षेत्र में और किस मद में राशि खर्च करनी है, तभी फंड का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह विकास को लेकर गलत नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहा है, जो सफल नहीं होगी। सांसद ने दावा किया कि अगर विकास नहीं हुआ होता, तो पिछले विधानसभा चुनाव में एनडीए को इतनी बड़ी सफलता नहीं मिलती।
मनरेगा और जी रामजी योजना पर बयान
इस दौरान सांसद शांभवी चौधरी ने मनरेगा को बंद कर उसकी जगह प्रस्तावित ‘जी रामजी योजना’ को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि विपक्ष बेवजह इस मुद्दे पर हायतौबा मचा रहा है। उनके अनुसार, जी रामजी योजना पहले से ज्यादा बेहतर है और इसका सीधा लाभ बेरोजगार मजदूरों को मिलेगा। उन्होंने इसे रोजगार और विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।