BNT Desk: खगड़िया में मासूम से दरिंदगी के बाद हुआ हंगामा अब पुलिसिया कार्रवाई की जद में है। कलेक्ट्रेट में घुसकर तोड़फोड़ करने वालों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है।
कलेक्ट्रेट में हंगामा और बड़ी गिरफ्तारी
खगड़िया में 4 साल की बच्ची के साथ रेप और हत्या के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। 8 जनवरी को इस घटना के विरोध में प्रदर्शन कर रही भीड़ बेकाबू हो गई और कलेक्ट्रेट परिसर में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। इस मामले में पुलिस ने अब तक 14 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि 82 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। एसपी राकेश कुमार ने साफ कर दिया है कि कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
लापरवाही पर पुलिसवालों पर गिरी गाज
इस बवाल ने न सिर्फ आम जनता बल्कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की पोल भी खोल दी है। भीड़ को समय रहते न रोक पाने और सीनियर अधिकारियों को सूचना न देने के आरोप में 8 पुलिसकर्मियों और चौकीदारों को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है। इतना ही नहीं, शहर के चार थाना प्रभारियों (नगर थाना, चित्रगुप्तनगर, अलौली और एक अन्य) से जवाब-तलब (शोकॉज) किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि अगर पुलिस सतर्क होती, तो कलेक्ट्रेट के अंदर तोड़फोड़ की नौबत नहीं आती।
कुर्सी पर सेल्फी और सोशल मीडिया पर नजर
हंगामे के दौरान कुछ युवाओं की शर्मनाक हरकतें भी सामने आई हैं। भीड़ में शामिल लोग कलेक्ट्रेट के मीटिंग हॉल में घुस गए और अधिकारियों की कुर्सियों पर बैठकर सेल्फी लेने लगे। पुलिस अब सीसीटीवी और वीडियो के जरिए ऐसे लोगों की पहचान कर रही है। साथ ही, जिन लोगों ने सोशल मीडिया पर बच्ची की पहचान उजागर की है, उन पर आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज होगा। एसपी ने चेतावनी दी है कि पोस्ट डिलीट करने के बावजूद पुलिस उन तक पहुंच जाएगी।
स्पीडी ट्रायल की मांग और आगे की कार्रवाई
इस बीच, स्थानीय विधायक बबलू मंडल ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर मांग की है कि मासूम बच्ची के हत्यारों को ‘स्पीडी ट्रायल’ के जरिए जल्द से जल्द फांसी की सजा दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में गंभीर है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना प्राथमिकता है। फिलहाल पुलिस पूरे इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रही है और बाकी उपद्रवियों की तलाश जारी है।