आज पूरा देश पूर्व प्रधानमंत्री और अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती मना रहा है। इस खास मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक गुरु और मार्गदर्शक अटल जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की है। नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।” लेकिन क्या आप जानते हैं कि नीतीश कुमार को बिहार की सत्ता के शिखर तक पहुंचाने के पीछे असल में अटल जी का ही हाथ था?
वो किस्सा जब अटल जी ने सबको चौंका दिया
यह बात साल 2000 की है, जब बिहार की राजनीति में भारी हलचल मची थी। उस समय हुए विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। लालू यादव की राजद 124 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी, जबकि बीजेपी के पास 67 और नीतीश कुमार की समता पार्टी के पास सिर्फ 34 सीटें थीं। हर कोई हैरान तब रह गया जब अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी पार्टी (BJP) की सीटें ज्यादा होने के बावजूद नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया। अटल जी के अटूट भरोसे के चलते ही 3 मार्च 2000 को नीतीश कुमार ने पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
7 दिन की सरकार और ‘सुशासन’ का सफर
हालांकि, बहुमत का आंकड़ा न जुटने के कारण नीतीश कुमार की वह सरकार सिर्फ 7 दिनों में ही गिर गई थी। इसके बाद राबड़ी देवी फिर से मुख्यमंत्री बनीं, लेकिन नीतीश कुमार ने हार नहीं मानी। अटल जी के दिखाए रास्ते पर चलते हुए उन्होंने जनता के बीच अपनी पैठ बनाई। साल 2005 में जब एनडीए को पूर्ण बहुमत मिला, तो नीतीश दोबारा मुख्यमंत्री बने। इसके बाद उन्होंने बिहार की कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर जो लगाम कसी, उसी का नतीजा है कि आज लोग उन्हें प्यार से ‘सुशासन बाबू’ कहकर पुकारते हैं।
आज भी कायम है नीतीश का जलवा
अटल जी ने जिस पौधे को सींचा था, वह आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। नीतीश कुमार ने पिछले दो दशकों में कई बार गठबंधन बदले, उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन बिहार की सत्ता की चाबी उन्हीं के पास रही। इस साल हुए चुनावों में भी एनडीए ने प्रचंड जीत हासिल की और नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया। आज उनकी सफलता को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने दशकों पहले जो हीरा पहचाना था, वह आज भी बिहार की राजनीति में चमक रहा है।