किशनगंज आर्मी कैंप के खिलाफ AIMIM विधायक, मुख्यमंत्री से की मुलाकात

किशनगंज में आर्मी कैंप के लिए 200 एकड़ खेती की जमीन के अधिग्रहण का विरोध तेज हो गया है। AIMIM विधायक तौसीफ आलम और सांसद मोहम्मद जावेद ने किसानों की बर्बादी और विस्थापन का हवाला देते हुए इसे आबादी से दूर किसी दूसरी जगह बनाने की मांग सरकार से की है।

BNT
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बिहार के किशनगंज जिले में प्रस्तावित आर्मी कैंप को लेकर अब सियासी पारा गरमा गया है। बहादुरगंज से AIMIM विधायक तौसीफ आलम ने इस प्रोजेक्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विधायक का साफ कहना है कि जिस जमीन पर सेना का कैंप बनाने की तैयारी चल रही है, वह बेहद उपजाऊ खेती वाली जमीन है। अगर वहां कैंप बना, तो इलाके के सैकड़ों किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे और उनके पास आजीविका का कोई साधन नहीं बचेगा।

क्यों हो रहा है इस कैंप का विरोध?

दरअसल, किशनगंज के कोचाधामन और बहादुरगंज इलाके में करीब 200 एकड़ जमीन का अधिग्रहण आर्मी कैंप के लिए किया जा रहा है। विधायक तौसीफ आलम का तर्क है कि यह इलाका न सिर्फ खेती के लिए मशहूर है, बल्कि यहां घनी आबादी भी रहती है। विधायक ने बुधवार को पटना में मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे जिले में आर्मी कैंप के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे ऐसी जगह बनाया जाना चाहिए जहां किसानों का नुकसान न हो और लोगों को अपना घर न छोड़ना पड़े।

मुख्यमंत्री से मिलकर रखी अपनी बात

विवाद को बढ़ता देख विधायक तौसीफ आलम ने इस मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाकात की है। उन्होंने मुख्यमंत्री को एक मांग पत्र सौंपा है, जिसमें अपील की गई है कि प्रस्तावित सैनिक कैंप को किसी दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए। उनका कहना है कि सरकार को ऐसी जमीन तलाशनी चाहिए जो बंजर हो या जहां आबादी कम हो, ताकि विकास और सुरक्षा के नाम पर किसी गरीब किसान की रोटी न छिनी जाए।

संसद तक गूंजी विरोध की आवाज

आपको बता दें कि यह विरोध सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी गूंज देश की संसद में भी सुनाई दी है। हाल ही में कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने लोकसभा के शीतकालीन सत्र में यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने भी केंद्र सरकार से मांग की थी कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए आर्मी कैंप को किसी वैकल्पिक स्थान पर ले जाया जाए। अब देखना यह होगा कि जनभावनाओं और नेताओं के इस विरोध के बाद प्रशासन क्या फैसला लेता है।

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